बरेली के बेसिक शिक्षा विभाग का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पूरे विभाग को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है।प्राथमिक विद्यालय साहूकारा में तैनात प्रधानाध्यापिका शकुंतला भास्कर ने खुद को सेवानिवृत्त मानते हुए विद्यालय का चार्ज सौंप दिया, सहकर्मियों से विदाई ली और शानदार रिटायरमेंट पार्टी भी दे डाली।लेकिन कहानी में ट्विस्ट तब आया, जब पेंशन संबंधी प्रक्रिया शुरू हुई। जांच में पता चला कि शिक्षिका की सेवा अवधि अभी समाप्त ही नहीं हुई थी और उन्हें नियमों के अनुसार एक वर्ष और नौकरी करनी है। बताया जा रहा है कि 2 अप्रैल के बाद शिक्षकों को अगले वर्ष 31 मार्च तक सेवा में बने रहने का लाभ मिलता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई? विभागीय रिकॉर्ड गलत थे या फिर शिक्षिका को अपनी ही सेवा पुस्तिका और जन्मतिथि की जानकारी नहीं थी?सबसे बड़ा सवाल यह है कि जो शिक्षिका वर्षों से बच्चों को शिक्षा देती रही, उन्हें अपने ही रिटायरमेंट की सही तिथि का पता क्यों नहीं था? और अगर शिक्षिका से चूक हुई तो विभागीय अधिकारियों ने समय रहते इसे पकड़ा क्यों नहीं? जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी विनीता का कहना है कि शिक्षिका को दोबारा ज्वाइन कराया जाएगा। हालांकि इस जवाब से कई सवाल अनुत्तरित रह गए। मीडिया के सवालों पर विभागीय अधिकारी स्पष्ट जवाब देने से बचते नजर आए। अब पूरे मामले ने बेसिक शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और रिकॉर्ड प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर रिटायरमेंट जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में इतनी बड़ी लापरवाही की जिम्मेदारी कौन लेगा?