राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की योजनाओं से बदायूँ में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में आया सुधार, कई जिंदगियाँ हुईं सुरक्षित
बदायूँ,। जनपद में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत संचालित विभिन्न स्वास्थ्य योजनाएं जरूरतमंद परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, नवजात देखभाल तथा राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) जैसी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से अनेक परिवारों को नया जीवन, सुरक्षा और बेहतर भविष्य मिला है।
ग्राम कुआंडा में जन्मी नन्हीं सरस्वती इसका जीवंत उदाहरण बनी। जन्म के समय उसका वजन मात्र 2.1 किलोग्राम था और वह लो बर्थ वेट की श्रेणी में थी। पर्याप्त स्तनपान न मिलने और उचित देखभाल के अभाव में उसकी स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही थी। नियमित गृह भ्रमण के दौरान आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने स्थिति की पहचान कर स्वास्थ्य विभाग को अवगत कराया। इसके बाद परिवार को परामर्श, कंगारू मदर केयर (KMC) की जानकारी और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया गया। निरंतर निगरानी के बाद बच्ची का स्वास्थ्य सुधरा और आज वह सामान्य एवं सक्रिय जीवन जी रही है।
इसी प्रकार भोजपुर क्षेत्र की ज्योति को गर्भावस्था के शुरुआती चरण में ही उच्च जोखिम गर्भवती (HRP) के रूप में चिन्हित किया गया। उनका हीमोग्लोबिन स्तर काफी कम था, जिससे मां और शिशु दोनों के लिए खतरा उत्पन्न हो गया था। स्वास्थ्य टीम द्वारा लगातार काउंसलिंग, नियमित जांच, आयरन थेरेपी और संस्थागत प्रसव के लिए प्रेरित किया गया। परिणामस्वरूप सुरक्षित प्रसव हुआ और 2800 ग्राम वजन के स्वस्थ शिशु का जन्म हुआ। वर्तमान में मां और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं।बिसौली क्षेत्र के ग्राम पहाड़पुर में जुड़वा बच्चों के जन्म का मामला स्वास्थ्य विभाग की सतर्कता का उदाहरण बना। गर्भवती महिला को पहले ही उच्च जोखिम श्रेणी में चिन्हित कर लगातार निगरानी की गई। समय पर रेफरल, सुरक्षित संस्थागत प्रसव और जन्म के बाद कंगारू मदर केयर एवं होम-बेस्ड न्यूबॉर्न केयर के माध्यम से दोनों नवजातों की विशेष देखभाल सुनिश्चित की गई। परिणामस्वरूप दोनों बच्चे स्वस्थ हैं और सामान्य विकास कर रहे हैं।राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत ग्राम नदायल निवासी सात वर्षीय सोहेल को जन्मजात हृदय रोग से राहत मिली। विद्यालय स्वास्थ्य जांच के दौरान बीमारी की पहचान हुई। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के लिए इलाज कराना संभव नहीं था, लेकिन आरबीएसके टीम के समन्वय से उसे उच्च स्तरीय चिकित्सा संस्थान में निःशुल्क उपचार मिला। सफल हृदय शल्य चिकित्सा के बाद सोहेल अब सामान्य बच्चों की तरह खेल-कूद और दैनिक गतिविधियों में भाग ले रहा है।
इन सभी उदाहरणों से स्पष्ट है कि समय पर पहचान, प्रभावी परामर्श, समर्पित स्वास्थ्य कर्मियों की मेहनत और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से गंभीर परिस्थितियों को भी सफलता में बदला जा सकता है। ये पहलें न केवल जीवन बचा रही हैं, बल्कि समाज में विश्वास और स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जागरूकता भी बढ़ा रही हैं।















































































