हज़रत कोहाड़ा पीर शाह रहमतुल्लाह अलैह का 3 रोज़ा सालाना उर्स पूरी शानो-शौकत के साथ संपन्नदेश की तरक्की, अमन-ओ-शांति और खुशहाली के लिए मांगी गई खास दुआएं
बरेली। हज़रत कोहाड़ा पीर शाह रहमतुल्लाह अलैह का तीन रोज़ा सालाना उर्स मुबारक बड़ी अकीदत, एहतराम और पूरी शानो-शौकत के साथ मनाया गया। उर्स के आखिरी दिन कुल शरीफ की रस्म अदा की गई, जिसके साथ ही इस मुबारक उर्स का समापन हुआ।उर्स के मौके पर 13 जून को बाद नमाज़-ए-इशा जलसा-ए-महफ़िल-ए-मीलाद का आयोजन किया गया, जिसमें उलमा-ए-किराम ने सरकार-ए-दो आलम हज़रत मोहम्मद रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सीरत-ए-पाक और सहाबा-ए-किराम की ज़िंदगी, उनके नेक अमल और इंसानियत के पैगाम पर रोशनी डाली।14 जून को बाद नमाज़-ए-इशा रात 9 बजे महफ़िल-ए-समा का आयोजन हुआ, जिसमें ख़्वाजा हज़रत मोईनुद्दीन चिश्ती अजमेरी रहमतुल्लाह अलैह और हज़रत कोहाड़ा पीर शाह रहमतुल्लाह अलैह की शान में सूफियाना कलाम पेश किए गए। पूरी रात जायरीन और अकीदतमंद बड़ी मोहब्बत, अदब और अकीदत के साथ महफ़िल में मौजूद रहे।सुबह 9 बजे कुहाड़ापीर शाह बाबा के दरगाह प्रबंधक उर्स के आयोजक चौधरी अहमद मियां दरगाह शाहदाना वली के सज्जादा नशीन अब्दुल वाजिद, हाजी सलीम, हकीम निराले मियां और वसी अहमद की मौजूदगी में गुस्ल की रस्म अदा की गई। इसके बाद महफ़िल-ए-समा में रंग पेश किया गया और फातेहा-ख्वानी हुई।क्षेत्र के तमाम लोगों ने अपने-अपने घरों से नज़र-नियाज़ का सामान लाकर अकीदत पेश की। फातेहा के बाद सैय्यद असलम मियां वामिकी, अब्दुल वाजिद, हाजी नजमुल इस्लाम, दरगाह प्रबंधक चौधरी अहमद मियां और हकीम निराले मियां ने मिलकर देश की तरक्की, अमन-ओ-चैन, भाईचारे और खुशहाली के लिए खास दुआ की।इस मौके पर उर्स में शामिल सभी जायरीन और क्षेत्रवासियों की तरक्की, कामयाबी, इज़्ज़त, जान-माल की हिफाज़त और आपसी मोहब्बत व भाईचारे के लिए भी दुआएं मांगी गईं।उर्स के दौरान बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने पहुंचकर हज़रत कोहाड़ा पीर शाह रहमतुल्लाह अलैह की बारगाह में अपनी अकीदत पेश की और आध्यात्मिक माहौल में हिस्सा लिया।
(चौधरी अहमद मियां)
दरगाह प्रबंधक आयोजक उर्सप्रकाशनार्थ
हज़रत कोहाड़ा पीर शाह रहमतुल्लाह अलैह का 3 रोज़ा सालाना उर्स पूरी शानो-शौकत के साथ संपन्न
देश की तरक्की, अमन-ओ-शांति और खुशहाली के लिए मांगी गई खास दुआएंहज़रत कोहाड़ा पीर शाह रहमतुल्लाह अलैह का तीन रोज़ा सालाना उर्स मुबारक बड़ी अकीदत, एहतराम और पूरी शानो-शौकत के साथ मनाया गया। उर्स के आखिरी दिन कुल शरीफ की रस्म अदा की गई, जिसके साथ ही इस मुबारक उर्स का समापन हुआ।उर्स के मौके पर 13 जून को बाद नमाज़-ए-इशा जलसा-ए-महफ़िल-ए-मीलाद का आयोजन किया गया, जिसमें उलमा-ए-किराम ने सरकार-ए-दो आलम हज़रत मोहम्मद रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सीरत-ए-पाक और सहाबा-ए-किराम की ज़िंदगी, उनके नेक अमल और इंसानियत के पैगाम पर रोशनी डाली।4 जून को बाद नमाज़-ए-इशा रात 9 बजे महफ़िल-ए-समा का आयोजन हुआ, जिसमें ख़्वाजा हज़रत मोईनुद्दीन चिश्ती अजमेरी रहमतुल्लाह अलैह और हज़रत कोहाड़ा पीर शाह रहमतुल्लाह अलैह की शान में सूफियाना कलाम पेश किए गए। पूरी रात जायरीन और अकीदतमंद बड़ी मोहब्बत, अदब और अकीदत के साथ महफ़िल में मौजूद रहे।सुबह 9 बजे कुहाड़ापीर शाह बाबा के दरगाह प्रबंधक उर्स के आयोजक चौधरी अहमद मियां दरगाह शाहदाना वली के सज्जादा नशीन अब्दुल वाजिद, हाजी सलीम, हकीम निराले मियां और वसी अहमद की मौजूदगी में गुस्ल की रस्म अदा की गई। इसके बाद महफ़िल-ए-समा में रंग पेश किया गया और फातेहा-ख्वानी हुई।क्षेत्र के तमाम लोगों ने अपने-अपने घरों से नज़र-नियाज़ का सामान लाकर अकीदत पेश की। फातेहा के बाद सैय्यद असलम मियां वामिकी, अब्दुल वाजिद, हाजी नजमुल इस्लाम, दरगाह प्रबंधक चौधरी अहमद मियां और हकीम निराले मियां ने मिलकर देश की तरक्की, अमन-ओ-चैन, भाईचारे और खुशहाली के लिए खास दुआ की।इस मौके पर उर्स में शामिल सभी जायरीन और क्षेत्रवासियों की तरक्की, कामयाबी, इज़्ज़त, जान-माल की हिफाज़त और आपसी मोहब्बत व भाईचारे के लिए भी दुआएं मांगी गईंउर्स के दौरान बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने पहुंचकर हज़रत कोहाड़ा पीर शाह रहमतुल्लाह अलैह की बारगाह में अपनी अकीदत पेश की और आध्यात्मिक माहौल में हिस्सा लिया।















































































