साहित्य में नए कीर्तिमान गढ़ रहे हैं साहित्यभूषण एवं लोकतंत्र सेनानी सुरेश बाबू मिश्रा

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बरेली। साहित्यभूषण से सम्मानित एवं लोकतंत्र सेनानी रहे सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य सुरेश बाबू मिश्रा देश के जाने- माने साहित्यकार हैं । उनकी कहानियां और लघुकथाएं देश की प्रतिष्ठित पत्रिकाओ में प्रकाशित होती रहती हैं । उनका समसामयिक आलेख प्रतिदिन किसी ना किसी समाचार पत्र में भी प्रकाशित होता रहता है । कनाडा से प्रकाशित होने बाली प्रतिष्ठित मासिक साहित्यिक पत्रिका – “साहित्य कुंज ” में इनकी कहानी एवं लेख नियमित रूप से प्रकाशित होते रहते हैं । साहित्य की अति प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय वेव मैग्जीन- “व्यंजना ” के यह संस्थापक संरक्षक हैं । वह विगत दस वर्षों तक “पंजाब केसरी ” और ” राष्ट्रीय सहारा ” के नियमित लेखक रहे हैं ।
प्रराम्भिक जीवन –
सेवानिवृत प्रधानाचार्य सुरेश बाबू मिश्रा का जन्म पाँच जुलाई सन् उन्नीस सौ छप्पन ईस्वी को उत्तर प्रदेश के बदायूँ जिला के चन्दोखा नामक ग्राम में हुआ। इनके पिता गुलजारी लाल मिश्रा एक समृद्ध कृषक थे। इनकी माता श्रीमती रम्पा देवी मिश्रा एक धर्मपरायण महिला थीं। इनके पिता भी जमींदार खानदान से ताल्लुक रखते थे। इसलिए आसपास के गांवों उनकी अच्छी प्रतिष्ठा थी । इनके पाँच भाई और दो बहिन थीं। भाईयों में सबसे छोटे होने के कारण इनका पालन-पोषण बहुत ही लाड़-प्यार के साथ हुआ।
सुरेश बाबू मिश्रा की प्रारम्भिक शिक्षा अपने ग्राम से दो किलोमीटर दूर स्थित सेरहा ग्राम के प्राथमिक विद्यालय में हुई। कक्षा आठ तक की शिक्षा ग्राम बेलाडांडी के जूनियर हाईस्कूल में प्राप्त की। बदायूं की तहसील मुख्यालय दातागंज में स्थित संतोष कुमार मैमोरियल इण्टर काॅलेज गनगोला से सन् 1970 में हाईस्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण की। सन् 1972 में जनपद मुख्यालय बदायूँ में स्थित एस. के. इण्टर काॅलेज से इण्टर की परीक्षा उत्तीर्ण की। उसके पश्चात् सुरेश बाबू मिश्रा उच्च शिक्षा प्राप्त करने मुरादाबाद गए। मुरादाबाद के हिन्दू महाविद्यालय से सन् 1974 में इन्होंने बी. ए. की परीक्षा उत्तीर्ण की। सन् 1976 में इन्होंने के. जी. के. काॅलेज मुरादाबाद से भूगोल विषय से एम. ए. किया । सन् 1978 में एस. एन. दास डिग्री काॅलेज बदायूँ से बी. एड. किया। बाद में राजकीय सेवा के दौरान सन् 2002 में इन्होंने अंग्रेजी से एम. ए. किया।सुरेश बाबू मिश्रा की 29 सितम्बर सन् 1980 को राजकीय सेवा में शिक्षा विभाग उत्तर प्रदेश मे प्रथम नियुक्ति हुुई । उन्होंने शिक्षा विभाग में 37 वर्ष तक निरन्तर राजकीय सेवा के दौरान विभिन्न पदों पर रहते हुए अपने दायित्वों का निर्वहन बड़ी लगन और निष्ठा के साथ किया । राजकीय सेवा की व्यस्तता के बावजूद यह साहित्य सृजन के लिए समय निकाल लेते थे । इनकी दस पुस्तकें राजकीय सेवा के दौरान ही प्रकाशित हुईं । अपनी राजकीय सेवा के दौरान यह उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों में कार्यरत रहे । अपनी सुदीर्घ राजकीय सेवा के उपरांत सुरेश बाबू मिश्रा 31 मार्च 2017 को राजकीय इण्टर काॅलेज बरेली के प्रधानाचार्य पद से सेवानिवृत्त हुए थे ।
सन् 1984 में उनका लेखन कार्य प्रारम्भ हुआ। इसी वर्ष इनकी पहली कहानी ‘सुख का महल’ पंजाब केसरी दैनिक समाचार पत्र के कहानी संस्करण में प्रकाशित हुई। यह कहानी बहुत चर्चित हुई । इसके बाद से इनकी लेखनी अनवरत रूप से चल रही है। इनकी 100 से अधिक कहानी, 200 लघुकथाएँ तथा 250 से अधिक लेख देश की प्रमुख पत्रिकाओं एवं समाचार पत्रों में प्रकाशित हो चुके हैं । यह ‘सृजन’ और ‘वाणी’ पत्रिकाओं का सम्पादन भी कर चुके हैं।
कहानी वार्ताएँ और नाटक आकाशवाणी रामपुर और बरेली से प्रकाशित होते रहते हैं। कई वार्ताएँ, परिचर्चाएँ एवं साक्षात्कार बरेली दूरदर्शन केन्द्र से निरंतर प्रसारित होते रहते हैं।सुरेश बाबू मिश्रा के 1 सहमा हुआ शहर, 2 लहू का रंग 3 थरथराती लौ, 4 बलिदान की कहानियाँ, 5 आविष्कार की कहानियाँ, 6 संघर्ष का विगुल 7 जमीन से जुड़े लोग 8 साकार होते सपने 9 उजाले की किरन, 10 जानलेवा धुआँ 11 कैक्टस के जंगल, 12. सवालों के बीचb13 जिनका यश फैला अम्बर तक 14 रावी की लहरें 15 स्वतंत्रता समर के अल्पज्ञात बलिदानी 16. यथार्थ, चेतना और रचना एक साहित्यिक विमर्श 17 राष्ट्र के कर्मयोगी प्रकाशित हो चुकी हैं। साथ ही अंग्रेजी में अनुदित कृतियों में द फाॅरेस्ट आफ कैक्टस, वेव्स ऑफ रावी,
मराठी में अनुदित कहानी संग्रह “कैक्टस के जंगल” साझा कहानी संग्रह, साझा लघुकथा संग्रह आदि हैं।सुरेश बाबू मिश्रा को साहित्य उत्कृष्टता के लिए उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान द्वारा साहित्य भूषण सम्मान- 2018, राज्य कर्मचारी साहित्य संस्थान उत्तर प्रदेश द्वारा हिन्दी साहित्य की दीर्घकालीन सेवा हेतु मीर तकी मीर सम्मान-2019, मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी भोपाल द्वारा अखिल भारतीय निर्मल वर्मा संस्मरण सम्मान-2024, युगधारा फांउडेशन, लखनऊ द्वारा प्रताप नारायण मिश्र सम्मान – 2025, विद्योत्तमा फांउडेशन नासिक, महाराष्ट्र द्वारा साहित्य विभूषण सम्मान, विक्रम शिला विश्व विद्यालय विहार द्वारा विद्या वाचस्पति की मानद उपाधि, केन्द्रीय सचिवालय हिन्दी परिषद द्वारा शब्द शिरोमणि सम्मान- 2021, रीयल फाॅर कल्चर एसोसिएशन द्वारा एक्सीलेंस अवार्ड -2020, वैश्विक हिन्दी संगठन नीदरलैंड, आचार्य कुल भारत और वागीश यू ए ई द्वारा अंतर्राष्ट्रीय साहित्य सम्मान, थ्योपिया यूनिवर्सिटी द्वारा डी . लिट . की मानद उपाधि,
अखिल हिन्दी साहित्य सभा, नासिक महाराष्ट्र द्वारा साहित्य श्री सम्मान- 2018, के. वी. एस. हिन्दी साहित्य समिति द्वारा आचार्य चतुरसेन स्मृति सम्मान- 2018, हिन्दी साहित्य परिषद प्रयाग, इलाहाबाद द्वारा कथा श्री सम्मान, के. वी. एस. प्रकाशन दिल्ली द्वारा के. वी. एस. गौरव सम्मान।
‘कथादेश’ नई दिल्ली द्वारा अखिल भारतीय हिन्दी लघुकथा प्रतियोगिता- 2017 में द्वितीय पुरस्कार, (लघुकथा- ‘समाधान’ हेतु), ‘प्रेरणा अंशु’ दिनेशपुर उत्तराखण्ड द्वारा अखिल भारतीय लघुकथा प्रतियोगिता में सान्त्वना पुरस्कार (लघुकथा- ‘सोता रहा पुलिसिया’ हेतु), शब्दांगन सामाजिक एवं साहित्यिक संस्था बरेली द्वारा पांचाल साहित्य शिरोमणि सम्मान,
रोटरी क्लब आफ बरेली साउथ द्वारा रोहेलखण्ड कहानी गौरव सम्मान,
मानव सेवा क्लब बरेली द्वारा- कहानी श्री सम्मान-2015,
श्रीमदार्यावर्त विद्वत परिषद्, प्रयाग द्वारा – सम्मान पत्रम,
इनवर्टिस यूनिवर्सिटी द्वारा रोहेलखण्ड रत्न अवार्ड- 2015, श्री सिद्धि विनायक ग्रुप आफ इन्स्टीट्यूशन्स द्वारा पांचाल रत्न अवार्ड- 2014, भारतीय पत्रकारिता संस्थान, बरेली उत्तर प्रदेश द्वारा साहित्य श्री सम्मान- 2016,
प्रजातन्त्र का स्तम्भ प्रकाशन राजस्थान द्वारा प्रजातन्त्र का स्तम्भ गौरव सम्मान-2019,
साहित्यिक संघ वाराणसी द्वारा सेवक स्मृति साहित्य श्री सम्मान-2019 मिल चुके हैं।
सुरेश बाबू मिश्रा सम्प्रति-
आजकल सेवानिवृत्ति के उपरान्त साहित्य सृजन के साथ- साथ सामाजिक क्रिया- कलापों में सक्रिय योगदान दे रहे हैं। सुरेश बाबू मिश्रा अखिल भारतीय साहित्य परिषद के प्रांतीय अध्यक्ष भी हैं । यह संकल्प सामाजिक एवं साहित्यिक संस्था के अध्यक्ष हैं। इस संस्था के माध्यम से यह लोगों में देश प्रेम और सामाजिक सरोकार की अलख जगा रहे हैं। यह भारतीय लोकतंत्र रक्षक सेनानी कल्याण समिति के मण्डल अध्यक्ष और राजकीय शिक्षक संघ के प्रान्तीय संरक्षक हैं। सुरेश मिश्रा स्वर संगम शिक्षा चैरिटेबल ट्रस्ट के भी संरक्षक पद पर हैं । निर्भय सक्सेना

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