उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने द आर्ट ऑफ लिविंग के 45 वर्ष पूरे होने पर स्मारक डाक टिकट का अनावरण किया

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बंगलुरू/ बरेली। भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने द आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर में युवा विकास, उद्यमिता, स्थिरता, चेतना अध्ययन और शिक्षा से जुड़ी पांच प्रमुख राष्ट्रीय पहलों का शुभारंभ किया। यह आयोजन ऐसे समय में हुआ है जब आर्ट ऑफ लिविंग संस्था ने मानवीय सेवा के 45 वर्ष में प्रवेश किया हैं। इसी माह 70 वर्ष के हुए गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर के शांति, कल्याण एवं मानवीय मूल्यों के प्रति उनके जीवनपर्यंत योगदान को रेखांकित किया गया है।उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने गणमान्य अतिथियों के साथ एक स्मारक डाक टिकट का भी अनावरण किया। जो व्यक्तिगत कल्याण, सामाजिक परिवर्तन और वैश्विक शांति में द आर्ट ऑफ लिविंग के 45 वर्षों के योगदान का प्रतीक है।इन शुरू की गई पहलों में युवा करियर उत्कृष्टता कार्यक्रम (यूथ करियर एक्सीलेंस प्रोग्राम), पूर्वी ज्ञान प्रणाली संकाय (फैकल्टी ऑफ ईस्टर्न नॉलेज सिस्टम्स), नवाचार एवं उद्यमिता (आर्ट ऑफ लिविंग इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप इंक्यूबेशन), चेतना अध्ययन और मानव क्षमता उत्कृष्टता केंद्र (सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ऑन कॉन्शियसनेस स्टडी एंड ह्यूमन पोटेंशियल), तथा इको शांति सम्मिलित हैं। यह पहले शिक्षा, नवाचार, पर्यावरणीय स्थिरता और मानव विकास पर संगठन के बढ़ते ध्यान को प्रतिबिंबित करती हैं। समारोह द आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर में महीने भर चले उत्सव का चरमोत्कर्ष था, जिसमें भारत और विश्व भर के 678 प्रतिष्ठित अतिथियों ने भाग लिया। इनमें विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं के राष्ट्रीय नेता, व्यापारिक दिग्गज, खिलाड़ी, उद्यमी, शिक्षाविद, आध्यात्मिक गुरु, राजनयिक, कलाकार और सामाजिक परिवर्तनकर्ता सम्मिलित थे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने श्री श्री रवि शंकर द्वारा स्थापित इस आंदोलन की असाधारण वैश्विक पहुंच पर विचार व्यक्त किए।
उन्होंने कहा, आज उस महान दूरदर्शिता का उत्सव है जिसने विभिन्न महाद्वीपों में करोड़ों जीवनों को स्पर्श किया है। मैं यह जानकर विस्मित रह गया कि द आर्ट ऑफ लिविंग 182 देशों में विद्यमान है। मानव जाति की लगभग संपूर्ण सभ्यता इस आंदोलन के माध्यम से परस्पर जुड़ रही है।संगठन की यात्रा का वर्णन करते हुए उन्होंने आगे कहा, पैंतालीस वर्ष पूर्व, एक सरल किंतु गहन विचार के साथ एक आंदोलन का सूत्रपात हुआ था कि आंतरिक शांति ही बाह्य सामंजस्य की आधारशिला है। संघर्ष और अनिश्चितता से घिरे इस संसार में, गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर विवेक, जागरूकता, शांति और सद्भाव के मूल्यों से मानवता को निरंतर अनुप्राणित कर रहे हैं।
गुरुदेव की सरलता और उनके प्रभाव की प्रशंसा करते हुए श्री राधाकृष्णन ने टिप्पणी की, उनकी मुस्कान, उनकी विनम्रता और उनका स्नेह प्रत्येक व्यक्ति के हृदय को छू लेता है। जो बात उनके योगदान को असाधारण बनाती है, वह उनके भीतर समाहित विनम्रता और मानवता है।उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन का स्वागत करते हुए गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर ने समकालीन चुनौतियों के समाधान में आंतरिक विकास की शाश्वत प्रासंगिकता पर बल दिया।
गुरुदेव ने कहा, आज विश्व ने स्वीकार कर लिया है कि ध्यान अब कोई विलासिता नहीं है। विश्व ध्यान दिवस घोषित करने के लिए 192 देशों के एक साथ आने से यह समझ सुदृढ़ हुई है कि एक स्वस्थ, सुखी और तनावमुक्त जीवन के लिए ध्यान एक मूलभूत आवश्यकता है।
मानव विकास के प्रति एक समग्र दृष्टिकोण का आह्वान करते हुए उन्होंने आगे कहा, जीवन भर तीन चीजें सदैव हमारे साथ होनी चाहिए: ज्ञान, ध्यान और संगीत। वैश्विक सद्भाव के संदेश के साथ अपनी बात समाप्त करते हुए गुरुदेव ने कहा, आइए हम एक ऐसे वसुधैव कुटुम्बकम् का स्वप्न देखें, जो भय, तनाव और घृणा से मुक्त एक वैश्विक परिवार हो। एक शांत और सौहार्दपूर्ण विश्व का प्रारंभ शांत और सौहार्दपूर्ण व्यक्तियों से ही होता है।
कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया और संगठन के उद्गम के साथ कर्नाटक के गहन संबंध को रेखांकित किया।
उन्होंने कहा, यह कर्नाटक के लिए गौरव का विषय है कि इस वैश्विक आंदोलन की जड़ें हमारी इस पवित्र भूमि से जुड़ी हुई हैं। चार दशकों से अधिक समय से, द आर्ट ऑफ लिविंग विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से व्यक्तिगत, सामुदायिक और वैश्विक स्तर पर शांति और कल्याण को बढ़ावा दे रहा है।
शांति स्थापना में गुरुदेव के योगदान पर प्रकाश डालते हुए राज्यपाल गहलोत ने आगे कहा, मानवीय सेवा से परे, गुरुदेव के शांति- स्थापना के प्रयासों ने दीर्घकालिक संघर्षों को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मानवीय मूल्यों के पुनरुत्थान के माध्यम से एक हिंसा- मुक्त और तनाव-मुक्त समाज की उनकी दूरदर्शिता को संपूर्ण विश्व में सराहना और मान्यता प्राप्त हुई है।
आयोजन के दौरान शुरू की गई पांच पहलें शिक्षा, नवाचार, स्थिरता और मानव विकास के माध्यम से समकालीन समाज की कुछ अत्यंत तात्कालिक आवश्यकताओं को पूरा करने का प्रयास करती हैं।
यूथ करियर एक्सीलेंस प्रोग्राम युवाओं को सिविल सेवा में करियर के लिए तैयार करेगा, साथ ही ग्रामीण और शहरी युवाओं में रोजगार क्षमता बढ़ाने के लिए उद्योग-उन्मुख आतिथ्य प्रशिक्षण भी प्रदान करेगा।
फैकल्टी ऑफ ईस्टर्न नॉलेज सिस्टम्स एक बहुविषयक मंच के रूप में कार्य करेगा जो पूर्वी ज्ञान परंपराओं को समकालीन शिक्षा और अनुसंधान के साथ एकीकृत करेगा, जिससे आधुनिक नैतिक, सामाजिक और पारिस्थितिक चुनौतियों का समाधान किया जा सके।
आर्ट ऑफ लिविंग इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप इंक्यूबेशन पहल का उद्देश्य मार्गदर्शन, प्रोटोटाइपिंग सुविधाओं और प्रारंभिक चरण के वित्तपोषण सहायता के माध्यम से नवाचार-संचालित और हार्डवेयर-केंद्रित स्टार्टअप को पोषित करना है, जिसका लक्ष्य 500 स्टार्टअप को सक्षम बनाना है।
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ऑन कॉन्शियसनेस स्टडीज एंड ह्यूमन पोटेंशियल चेतना, संज्ञान, मानसिक कल्याण और मानव क्षमता में अनुसंधान, शिक्षा और नवाचार के लिए एक अंतःविषय पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करेगा।
द आर्ट ऑफ लिविंग की एक स्थिरता पहल इको शांति का उद्देश्य संधारणीय विकल्पों के माध्यम से एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक को समाप्त करना है, जिसका लक्ष्य 2030 तक प्लास्टिक उत्पादन और उपयोग को प्रतिवर्ष कम से कम 1लाख टन कम करना है।
आश्रम प्रवास के दौरान, उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने संगठन की विभिन्न सुविधाओं और पहलों का अवलोकन किया। उन्होंने श्री श्री गुरुकुलम का भ्रमण किया, छात्रों से संवाद किया, प्रताप गणपति मंदिर में प्रार्थना की, श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के पवित्र अवशेषों के दर्शन किए और लगभग 1,600 स्वदेशी गायों के निवास स्थान श्री श्री गौशाला का भी भ्रमण किया।
इस यात्रा का एक विशेष आकर्षण द आर्ट ऑफ लिविंग के इंट्यूशन प्रोग्राम के अभ्यासकर्ताओं द्वारा दी गई प्रस्तुति थी, जहां बच्चों ने व्यवस्थित प्रशिक्षण और अभ्यास के माध्यम से विकसित अपनी सहज ज्ञान संबंधी क्षमताओं का प्रदर्शन किया।
सेवा, संस्कृति और मानवीय मूल्यों का महीना भर चला उत्सव लगभग एक महीने तक, द आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर ने जीवन के प्रत्येक क्षेत्र से आने वाले लोगों का स्वागत किया, जो वसुधैव कुटुम्बकम् यानी एक विश्व परिवार की भावना को दर्शाता है।
इस उत्सव में सम्मिलित होने वाली प्रतिष्ठित विभूतियों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और सर्बानंद सोनोवाल, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, एन. चंद्रबाबू नायडू और प्रमोद सावंत, राज्यपाल अजय कुमार भल्ला और लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह, महान अभिनेता रजनीकांत, अभिनेता विक्रांत मैसी, उद्योगपति मुकेश अंबानी, अनंत अंबानी और निरंजन हिरानंदानी के साथ-साथ प्रमुख आध्यात्मिक गुरु, कलाकार, राजनयिक और विद्वान उपस्थित थे।
इस उत्सव में उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष सतीश महाना, भदोही से विधायक जाहिद बेग, कथा वाचक इंद्रेश उपाध्याय तथा अयोध्या स्थित सिद्धपीठ श्री हनुमत निवास (हनुमान पीठ) के महंत आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण भी शामिल हुए। इसके अतिरिक्त कानपुर से भाजपा के लोकप्रिय नेता एवं तीन बार के विधान परिषद सदस्य अरुण पाठक ने भी उत्सव में सहभागिता की।
इंद्रेश उपाध्याय, कथा वाचक की उपस्थिति से शाम के सत्संग का भव्य और भक्तिमय वातावरण और भी अधिक दिव्य एवं भावपूर्ण हो उठा। इस अवसर पर उन्होंने कहा, “मुझे यहाँ ‘सकारात्मकता का स्रोत’ मिला। यह स्थान केवल अपने दर्शन मात्र से लोगों को ठीक कर देता है; यहाँ सकारात्मक ऊर्जा का अद्भुत भंडार है।”
आर्ट ऑफ लिविंग अंतरराष्ट्रीय केंद्र में आयोजित उत्तर प्रदेश महोत्सव ने संगीत, नृत्य, शिल्प, आध्यात्मिकता और एक जिला एक उत्पाद प्रदर्शनी के माध्यम से उत्तर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भव्य रूप से प्रस्तुत किया।
यह महोत्सव उत्तर और दक्षिण भारत के बीच एक जीवंत सांस्कृतिक सेतु बनकर उभरा, जिसने हजारों लोगों को अपनी जड़ों, परंपराओं और भारतीयता से पुनः जोड़ा।
इस पूरे महीने के दौरान नवनिर्मित ध्यान मंदिर में वैश्विक ध्यान सत्र, भारत की कलात्मक विरासत का उत्सव मनाते सांस्कृतिक कार्यक्रम, मानसिक कल्याण एवं चेतना पर परिचर्चाएं, और उन व्यक्तियों के जीवन परिवर्तन की गाथाएं प्रस्तुत की गईं, जिनके जीवन को पिछले साढ़े चार दशकों में गुरुदेव के कार्यों ने प्रभावित किया है।
मूल रूप से, यह उत्सव आंतरिक शांति, सेवा और मानवीय मूल्यों पर आधारित एक तनाव-मुक्त, हिंसा-मुक्त समाज के गुरुदेव के निरंतर चले आ रहे दृष्टिकोण को अभिव्यक्त करने का माध्यम बना। निर्भय सक्सेना

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