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लखनऊ में वाटर वूमेन शिप्रा पाठक का दूसरे बड़े मंगल पर हरित महाअभियान, 45 हजार हरे पत्तल और 5 हजार अभिमंत्रित पौधे बांटे

May 12, 2026By admin0 comments
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लखनऊ। ज्येष्ठ मास के दूसरे बड़े मंगल पर राजधानी में पर्यावरण संरक्षण और धार्मिक आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला, जहां “वाटर वूमेन” के नाम से पहचान बना चुकीं पर्यावरण प्रेमी शिप्रा पाठक ने अपने विशाल हरित अभियान से पूरे शहर का ध्यान आकर्षित किया। शिप्रा पाठक के अभियान में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल ने पहुंचकर उन्हें आशीर्वाद दिया।पंचतत्व संस्था के माध्यम से उन्होंने विभिन्न बड़े मंगल भंडारों में लगभग 45 हजार हरी पत्तलों और 5 हजार हनुमान चालीसा से अभिमंत्रित पौधों का निःशुल्क वितरण कर पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संदेश दिया।सुबह से ही पंचतत्व संस्था के स्वयंसेवक वाहनों के माध्यम से राजधानी के अलग-अलग क्षेत्रों में पहुंचे और बड़े मंगल के अवसर पर आयोजित भंडारों में हरी पत्तलों तथा पौधों का वितरण किया। बर्लिंगटन चौराहे सहित कई प्रमुख स्थलों पर श्रद्धालुओं को पौधे प्रसाद स्वरूप भेंट किए गए। इस दौरान श्रद्धालुओं में पौधों को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला।वाटर वूमेन शिप्रा पाठक ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि इन पौधों को केवल पौधा न समझें बल्कि हनुमान जी का प्रसाद मानकर उनका संरक्षण करें। उन्होंने कहा कि आज लगाया गया एक पौधा आने वाले वर्षों में बच्चों और आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ ऑक्सीजन प्रदान करेगा और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में मदद करेगा।उन्होंने लोगों से बड़े मंगल के अवसर पर कम से कम पांच पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने का संकल्प लेने की अपील की।शिप्रा पाठक ने कहा कि उनकी संस्था का उद्देश्य केवल पौधे बांटना नहीं बल्कि लोगों के भीतर प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना है। उन्होंने बताया कि इस बार बड़े मंगल के आयोजनों को प्लास्टिक मुक्त बनाने की दिशा में उल्लेखनीय सफलता मिली है। कई सामाजिक संस्थाएं और स्वयंसेवी संगठन भी इस अभियान से जुड़कर पर्यावरण संरक्षण की मुहिम को आगे बढ़ा रहे हैं।उन्होंने जानकारी दी कि आज लगभग आठ हजार प्लास्टिक की पत्तलों के उपयोग को रोका गया और उनके स्थान पर पर्यावरण अनुकूल हरी पत्तलों का उपयोग कराया गया। इससे प्लास्टिक प्रदूषण कम होगा और धार्मिक आयोजनों के माध्यम से समाज में पर्यावरण के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी।

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उन्होंने कहा कि यदि धार्मिक और सामाजिक आयोजनों में प्लास्टिक का उपयोग बंद हो जाए तो पर्यावरण को होने वाले नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है।अभियान के दौरान राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक कृष्ण गोपाल भी पहुंचे और उन्होंने स्वयं हरी पत्तलों तथा पौधों का वितरण किया। उन्होंने वाटर वूमेन शिप्रा पाठक के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि आज के समय में पर्यावरण संरक्षण सबसे बड़ी आवश्यकता है और शिप्रा पाठक जिस समर्पण के साथ समाज को जागरूक कर रही हैं, वह अत्यंत प्रेरणादायी है।उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजनों को प्रकृति संरक्षण से जोड़ना समाज के लिए सकारात्मक दिशा देने वाला प्रयास है।
अभियान में शामिल स्वयंसेवकों का उत्साह भी देखने लायक था। देर रात तक पौधों और पत्तलों की व्यवस्था में जुटे स्वयंसेवकों ने पूरे समर्पण के साथ अभियान को सफल बनाने में योगदान दिया। शिप्रा पाठक ने सभी स्वयंसेवकों की प्रशंसा करते हुए कहा कि सामूहिक प्रयासों से ही समाज में बड़ा परिवर्तन लाया जा सकता है।उल्लेखनीय है कि वाटर वूमेन शिप्रा पाठक इससे पहले भी कई बड़े पर्यावरण अभियानों को लेकर चर्चा में रह चुकी हैं। गोमती नदी संरक्षण अभियान से लेकर अयोध्या से रामेश्वरम तक लगभग 13 हजार किलोमीटर की ऐतिहासिक पदयात्राये कर उन्होंने पर्यावरण और जल संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक किया था। उनकी इस यात्रा को देशभर में सराहा गया और उन्हें “वाटर वूमेन” की पहचान मिली।गौरतलब है कि पिछले मंगलवार को भी शिप्रा पाठक ने 55 हजार हरी पत्तलों के वितरण के साथ इस विशेष पर्यावरण अभियान का शुभारंभ किया था। लगातार दूसरे बड़े मंगल पर हुए इस महाअभियान ने राजधानी में पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का रूप देना शुरू कर दिया है।राजधानी लखनऊ में बड़े मंगल पर चला यह अभियान अब सामाजिक चेतना और पर्यावरण संरक्षण की नई मिसाल बनता जा रहा है। वाटर वूमेन शिप्रा पाठक ने यह साबित कर दिया है कि यदि संकल्प मजबूत हो तो धार्मिक आयोजनों के माध्यम से भी समाज और पर्यावरण दोनों की सेवा की जा सकती है।

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