बरखेड़ा थाना दिवस में एसडीएम को सौंपा ज्ञापन, करोड़ों खर्च के बाद भी बंद पड़ी गौशाला पर फूटा गुस्सा
पीलीभीत। नगर पंचायत बिलसंडा की कान्हा गौशाला एक बार फिर बड़े सवालों के घेरे में है। वर्षों से अधूरी पड़ी गौशाला, बढ़ते छुट्टा गोवंश और किसानों की बर्बाद होती फसलों को लेकर अब मामला गरमा गया है। अखिल भारत हिंदू महासभा ने बरखेड़ा थाना दिवस में एसडीएम बीसलपुर को ज्ञापन सौंपते हुए प्रशासन की कार्यशैली पर तीखा हमला बोला।ज्ञापन में साफ तौर पर कहा गया कि वर्ष 2020 में शुरू हुआ गौशाला निर्माण 2023 तक लगभग पूरा हो गया, लेकिन इसके बाद काम ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद गौशाला का संचालन शुरू न होना सीधे तौर पर प्रशासनिक लापरवाही और जवाबदेही पर सवाल खड़े करता है।संगठन ने आरोप लगाया कि सरकार के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद स्थानीय अधिकारी गौवंश संरक्षण जैसे गंभीर विषय को नजरअंदाज कर रहे हैं। इसका नतीजा यह है कि बिलसंडा और आसपास के क्षेत्रों में छुट्टा गोवंश खुलेआम किसानों की फसलों को तबाह कर रहे हैं।
प्रदेश उपाध्यक्ष संजीव मिश्रा ने दो टूक कहा कि “यह लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि जल्द गौशाला शुरू नहीं हुई तो संगठन सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेगा।”जिला अध्यक्ष पंडित पंकज शर्मा ने प्रशासन को सीधे कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि “यह किसानों के साथ अन्याय है। बार-बार शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होना यह दर्शाता है कि जिम्मेदार अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से भाग रहे हैं। यदि समय रहते व्यवस्था ठीक की जाती तो आज यह नौबत नहीं आती।”युवा जिला अध्यक्ष गौरव शर्मा ने कड़े शब्दों में कहा कि “किसानों की मेहनत को इस तरह बर्बाद होते देखना बेहद चिंताजनक है। गौशाला का निर्माण होने के बाद भी उसे बंद रखना कहीं न कहीं बड़े स्तर की लापरवाही को उजागर करता है। अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो यह आंदोलन जिलेभर में तेज किया जाएगा।”
इस दौरान बीसलपुर नगर अध्यक्ष सुनील अवस्थी, बरखेड़ा नगर अध्यक्ष गंगा प्रकाश, उपाध्यक्ष पंडित रामपाल, राजवीर पाल और रामप्रताप मिश्रा समेत कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।ज्ञापन में मांग की गई है कि कान्हा गौशाला का शेष कार्य तत्काल पूरा कर उसे शुरू किया जाए और छुट्टा गोवंश को उसमें संरक्षित कर किसानों को राहत दी जाए। साथ ही यह भी सवाल उठाया गया कि यदि भूमि विवादित थी तो बिना जांच के निर्माण कार्य क्यों कराया गया और सरकारी धन क्यों खर्च किया गया।अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर कितनी तेजी से कार्रवाई करता है या फिर किसानों की परेशानी यूं ही जारी रहती है।















































































