बरेली। बरेली कॉलेज के हिंदी विभाग में भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद एवं शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में “भारतीय भाषाओं में ज्ञान परंपरा” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन व सरस्वती वंदना के साथ हुआ।उद्घाटन सत्र में उत्तराखंड ओपन यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहनी ने मुख्य वक्ता के रूप में भारतीय भाषाओं की ज्ञान परंपरा को वैश्विक परिप्रेक्ष्य में महत्वपूर्ण बताते हुए मातृभाषा में शिक्षा के महत्व पर बल दिया। इस अवसर पर प्राचार्य प्रो. ओमप्रकाश राय, हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. परमजीत कौर एवं प्रो. सुषमा गोंदियाल मंचासीन रहे। संचालन प्रो. मनुप्रताप ने किया।प्रथम तकनीकी सत्र में प्रो. ए.सी. त्रिपाठी ने नालंदा और आयुर्वेद की समृद्ध परंपरा पर प्रकाश डाला। वहीं अन्य वक्ताओं ने भारतीय ज्ञान प्रणाली के विविध आयामों पर विचार व्यक्त किए। द्वितीय सत्र में डॉ. राजकुमार शर्मा, डॉ. गजेंद्र प्रताप व प्रो. डी.एस. तोमर ने अपने विचार रखे, जबकि तृतीय सत्र में प्रो. हितेन्द्र त्यागी सहित अन्य विद्वानों ने भारतीय भाषाओं के महत्व पर चर्चा की। संगोष्ठी के अंतर्गत आयोजित कवि सम्मेलन में कवि प्रदीप वैरागी, उपमेंद्र सक्सेना, राजबाला धैर्य, डॉ. शालिनी शर्मा, निर्दोष कुमार “विन”, अभिषेक अग्निहोत्री व संतोष कुमार “श्रद्धा” ने काव्य पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। कार्यक्रम में लगभग 200 प्रतिभागियों ने भाग लिया। आयोजन सचिव प्रो. मनुप्रताप एवं संयोजक प्रो. परमजीत कौर के निर्देशन में संगोष्ठी का सफल संचालन हुआ।