गायत्री शक्तिपीठ पर पंचकुंडीय गायत्री महायज्ञ औऱ दंपति एवं नारी सशक्तिकरण कार्यक्रम हुआ
बदायूं। गायत्री शक्तिपीठ एवं आध्यात्मिक चेतना केंद्र पर बुद्ध पूर्णिमा के पावन पर्व पर पंचकुंडीय गायत्री महायज्ञ, दंपति एवं नारी सशक्तिकरण कार्यक्रम का भव्य आयोजन हुआ। जिले सहित अन्य जनपदों से आए दंपतियों, गायत्री परिजनों और श्रद्धालुओं ने भाग लेकर श्रेष्ठ संस्कारों के साथ परिवार, समाज और राष्ट्र निर्माण का संकल्प लिया।
मुख्य अतिथि गायत्री शक्तिपीठ बिसौली के मुख्य प्रबंधक ट्रस्टी सुखबीर सिंह, राधा रमन गुप्ता एवं जिला समन्वयक नरेंद्र पाल शर्मा ने मां गायत्री के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ कराया।परिव्राजक सुमित कुकरेती, शिवंवदा सिंह, पूनम अरोड़ा एवं कंचन गुप्ता ने वेदमंत्रोच्चारण के साथ पंचकुंडीय गायत्री महायज्ञ संपन्न कराया। हजारों श्रद्धालुओं और साधु-संतों ने लोककल्याण, विश्वशांति और परिवारों में सुख-समृद्धि की कामना से विशेष आहुतियां समर्पित कीं।
नारी सशक्तिकरण विषय पर संबोधित करते हुए शिवंवदा सिंह ने कहा कि जहां नारी का सम्मान होता है, वहीं देवताओं का वास होता है। उन्होंने कहा कि नारी केवल परिवार की आधारशिला ही नहीं बल्कि संस्कार, प्रेम और त्याग की जीवंत प्रतिमूर्ति है। यदि परिवार में महिलाओं को सम्मान, सुरक्षा और निर्णयों में भागीदारी मिले तो घर स्वर्ग के समान बन जाता है। उन्होंने महिलाओं से आत्मविश्वास के साथ परिवार और समाज को नई दिशा देने का आह्वान किया।
बरेली से आईं दीपमाला शर्मा ने परिवार व्यवस्था विषय पर कहा कि बच्चों की प्रथम गुरु मां होती है और परिवार उसकी पहली पाठशाला। उन्होंने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में माता-पिता को बच्चों के साथ समय बिताकर उनमें नैतिकता, अनुशासन और भारतीय संस्कृति के संस्कार विकसित करने होंगे। परिवारों में प्रेम, संवाद और सहयोग की भावना से ही समाज मजबूत बन सकता है।
संस्कारवान पीढ़ी विषय पर विचार रखते हुए विमलेश गौड़ ने कहा कि वर्तमान समय में युवा पीढ़ी संस्कारों से दूर होती जा रही है, जिसके कारण समाज और विश्व में अनेक समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। उन्होंने कहा कि हिंसा, तनाव, युद्ध और अपराध जैसी परिस्थितियों का मूल कारण मानवीय मूल्यों का अभाव है। बच्चों को भारतीय संस्कृति, नैतिक शिक्षा और आध्यात्मिक चिंतन से जोड़कर ही उज्ज्वल भविष्य का निर्माण किया जा सकता है।
जिला समन्वयक नरेंद्र पाल शर्मा ने बताया कि शांतिकुंज हरिद्वार से प्रेषित ज्योति कलश यात्रा का 23 जून को उसावा कस्बे में भव्य स्वागत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिलेभर के गायत्री परिजन एवं श्रद्धालु इस दिव्य ज्योति कलश के स्वागत में बढ़-चढ़कर भाग लेंगे। उन्होंने शांतिकुंज हरिद्वार के लिए अन्नदान संग्रह का आह्वान करते हुए सभी से सहयोग का संकल्प भी दिलाया।
गायत्री शक्तिपीठ के मुख्य प्रबंध ट्रस्टी सुरेंद्रनाथ शर्मा ने बताया कि दो अगस्त को शक्तिपीठ पर ज्योति कलश रथ यात्रा का भव्य समापन समारोह आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम में यज्ञ, दीपयज्ञ, संस्कार, भजन-कीर्तन एवं भारतीय संस्कृति पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होंगी। उन्होंने बताया कि ज्योति कलश यात्रा एक माह तक जिले के गांवों और नगरों में भ्रमण करेगी, जिसके लिए विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं ताकि अधिक से अधिक श्रद्धालु दर्शन एवं लाभ प्राप्त कर सकें।
कार्यक्रम के उपरांत डा. सोनपाल के नेतृत्व में माता भगवती भोजनालय में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
इस मौके पर नजीबाबाद जोन प्रभारी डीपी सिंह, रघुनाथ सिंह, सुखपाल शर्मा, रामचंद्र प्रजापति, ममता पाल, राधा रानी, कामिनी, श्याम निवास, माया सक्सेना, कालीचरण पटेल, सुमन, सत्यवती शर्मा, सीमा गुप्ता, रजनी मिश्रा आदि मौजूद रहीं।















































































