नेत्रदान कर दी नई जिंदगियांमरणोपरांत परिजनों ने कराया नेत्रदान
चित्रकूट। वैसे तो लोग रक्तदान कर दूसरों को जिंदगी देते है जो अब यह आम बात है।अगर कोई अंग दान कर किसी को नई जिंदगी दे तो शायद इससे बड़ा कोई परोपकार नही हो सकता है। ऐसा ही ही वाक्या देखने को को मिला श्री सदगुरू नेत्र चिकित्सालय में कार्यरत रहे अजय सिंह का आकस्मिक निधन हो गए, उनके निधन के पश्चात उनकी पत्नी श्री मती शकुंतला सिंह और उनके परिजनों ने मरणोपरांत नेत्रदान जैसा महादान करके एक पुनीत कार्य किया है उनकी पत्नी ने बताया कि मेरे स्व.पति के भाई सारे परिवार की इच्छा थी कि हम लोग उनको तो जिंदा नहीं कर सकते पर नेत्रदान करके उनकी आंखों को तो जिंदा रख सकते है और उनकी आंखों से दो परिवार इस दुनिया को देख सकते है इससे बड़ा क्या पुण्य होगा। इसलिए उनकी मृत्यु के पश्चात हमने अपने सदगुरू नेत्र चिकित्सालय चित्रकूट के आई बैंक की टीम को सूचना दी और उनका नेत्रदान कराया है जो महादान की श्रेणी में आता है।सूचना के मिलते ही तत्काल चिकित्सीय टीम पहुंच गई और नेत्रदान की प्रक्रिया को पूर्ण किया। वही सदगुरू नेत्र चिकित्सालय टीम ने बताया कि इस नेत्रदान से दो लोगों को नई रोशनी मिलेगी। चित्रकूट क्षेत्र वासियों सहित आम जनमानस के लिए यह एक सीख है कि किसी ने मरणोपरांत अपने परिवार के सदस्य का नेत्रदान कराया है। वही सदगुरू नेत्र चिकित्सालय के निदेशक एवं ट्रस्टी डॉ इलेश जैन ने पुण्य आत्मा के लिए प्रार्थना करते हुए नम आंखों से कहा कि हमारे सदगुरू परिवार के सदस्य रहे अजय सिंह का इस तरह आकस्मिक हम सबको छोड़कर जान पूरे सदगुरू परिवार के लिए बहुत ही दुखद और असहनीय है। डॉ जैन ने उनकी धर्म पत्नी और बच्चों को धैर्य और ढाहस बंधाते हुए कहा कि उनकी क्षति तो कोई भी पूर्ण नहीं कर सकता, मगर आप लोग कभी भी अपने आपको अकेला मत समझिएगा पूरा सदगुरू परिवार आपके साथ है। वही नेत्रदान को लेकर महिला समिति की अध्यक्षा श्री मती उषा जैन एवं निदेशक डॉ इलेश जैन ने उनके परिवार को प्रशस्ति पत्र प्रदान करते हुए उनके परिवारजनों की सराहना करते हुए कहा कि नेत्रदान बहुत ही पुनीत कार्य है इस पुनीत कार्य के लिए समाज के हर व्यक्ति को आगे आना चाहिए और इस पुनीत कार्य में भागेदारी निभाना चाहिए, साथ ही समाज में नेत्रदान को लेकर फैली कुरीतियों के बारे में लोगों को जागरूक करने का काम भी समाज के हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है,अगर इस उद्देश्य के साथ हर कोई काम करेगा तभी हम अपने समाज और देश से अंधत्व को कम करने का काम कर सकते हैं। वहीं इस पुनीत कार्य से पूरा सदगुरू परिवार भी अपने आपको गौरवान्वित महसूस कर रहा है।















































































