कादरचौक में बिना मान्यता के चल रहा स्कूल, विभागीय अधिकारियों पर मिलीभगत का आरोप

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कादरचौक। क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। कादरचौक कस्बे और आसपास के ग्रामीण इलाकों में बिना मान्यता के स्कूलों के संचालन का खुलासा होने के बाद हड़कंप मच गया है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि इन स्कूलों को विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से लंबे समय से चलाया जा रहा है, जबकि नियमों के तहत बिना मान्यता के किसी भी शैक्षणिक संस्थान का संचालन पूरी तरह अवैध है।प्राप्त जानकारी के अनुसार, कादरचौक क्षेत्र में कई ऐसे निजी विद्यालय संचालित हो रहे हैं, जिन्हें न तो बेसिक शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त है और न ही वे निर्धारित मानकों पर खरे उतरते हैं। इसके बावजूद इन स्कूलों में सैकड़ों छात्र-छात्राएं अध्ययन कर रहे हैं और अभिभावकों से मोटी फीस वसूली जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें इस बात की जानकारी ही नहीं थी कि ये विद्यालय मान्यता प्राप्त नहीं हैं।स्थानीय निवासी रामपाल सिंह ने बताया कि “हम लोग अपने बच्चों का बेहतर भविष्य बनाने के लिए उन्हें अच्छे स्कूल में पढ़ाना चाहते हैं, लेकिन हमें यह नहीं बताया गया कि यह स्कूल अवैध है। अब जब मामला सामने आया है, तो बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।”

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सूत्रों के अनुसार, इन स्कूलों में न तो प्रशिक्षित शिक्षक हैं और न ही आधारभूत सुविधाएं पूरी हैं। कई जगहों पर कक्षाएं अस्थायी कमरों में चलाई जा रही हैं, जहां सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम भी नहीं हैं। शिक्षा विभाग के नियमों के अनुसार, किसी भी विद्यालय को मान्यता प्राप्त करने के लिए भवन, शौचालय, खेल का मैदान, योग्य शिक्षक और अन्य आवश्यक सुविधाएं होना अनिवार्य है, लेकिन कादरचौक के कई विद्यालय इन मानकों की अनदेखी कर रहे हैं।इस पूरे मामले में सबसे गंभीर आरोप विभागीय अधिकारियों पर लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि संबंधित अधिकारी इन स्कूलों की जानकारी होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। कुछ लोगों ने तो यहां तक आरोप लगाया कि अधिकारियों की मिलीभगत के कारण ही ये स्कूल खुलेआम संचालित हो रहे हैं।एक अभिभावक, सुनीता देवी ने बताया कि “अगर अधिकारी समय-समय पर जांच करते, तो ये स्कूल इतने लंबे समय तक नहीं चल पाते। हमें लगता है कि इसमें कहीं न कहीं अधिकारियों की भी जिम्मेदारी है।”

वहीं, इस मामले के उजागर होने के बाद शिक्षा विभाग में खलबली मच गई है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि जल्द ही जांच टीम गठित कर पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी। बेसिक शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि “अगर कोई विद्यालय बिना मान्यता के संचालित पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जाएगी।”विशेषज्ञों का मानना है कि बिना मान्यता के स्कूलों का संचालन शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती है। इससे न केवल छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होती है, बल्कि उन्हें भविष्य में मान्यता प्राप्त प्रमाणपत्र भी नहीं मिल पाते, जिससे उच्च शिक्षा और रोजगार के अवसरों पर असर पड़ता है।इस मामले में प्रशासन की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इससे यह संदेह और गहरा हो जाता है कि कहीं न कहीं व्यवस्था में खामियां हैं, जिनका फायदा उठाकर ऐसे स्कूल संचालित किए जा रहे हैं।

उधर, जैसे ही यह मामला सार्वजनिक हुआ, कई अभिभावकों ने अपने बच्चों का नाम इन स्कूलों से कटवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। हालांकि, उनके सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि नए सत्र के बीच में बच्चों का दाखिला किसी मान्यता प्राप्त विद्यालय में कराना आसान नहीं है।शिक्षा अधिकार कार्यकर्ताओं ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी बिना मान्यता के स्कूल खोलने की हिम्मत न कर सके।इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिरकार शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है। अगर समय रहते ऐसे मामलों पर ध्यान दिया जाए, तो न केवल छात्रों का भविष्य सुरक्षित किया जा सकता है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता भी सुनिश्चित की जा सकती है।फिलहाल, सभी की निगाहें प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या वास्तव में दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाते हैं या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाता है।क्या हो सकती है कार्रवाई ?शिक्षा विभाग द्वारा जांच बैठाई जा सकती है स्कूल को नोटिस या सील किया जा सकता है जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो सकती हैछात्रों को मान्यता प्राप्त स्कूलों में शिफ्ट करने की व्यवस्था की जा सकती है। वर्जनअगर स्कूल बिना मान्यता के ही संचालित हो रहा जा तो बहुत ही गलत है। इसकी जांच कराई जाएगी। मामला सही पाया जाता है तो जांच के बाद कठोर कार्रवाई की जाएगी। वीरेंद्र सिंह, बीएसए बदायूं

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