प्रोफेशनल मीडिया और राजनीतिक मीडिया को अलग करना जरूरी: चंद्रबाबू नायडू

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विजयवाड़ा/बदायूं। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री नारा चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि समय के साथ पत्रकारिता में बदलाव आया है और मीडिया का एक हिस्सा पक्षपाती हो गया है। उन्होंने कहा, “यह समाज के लिए एक खतरनाक प्रवृत्ति है,” साथ ही यह भी आश्वासन दिया कि वे मीडिया जगत के प्रति मित्रवत बने रहेंगे।वे विजयवाड़ा के थुम्मलापल्ली वारी कला क्षेत्रम में इण्डियन जर्नलिस्ट्स यूनियन (IJU) के 11वें पूर्ण अधिवेशन में मुख्य अतिथि के रूप में पत्रकारों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रोफेशनल मीडिया और राजनीतिक मीडिया को अलग करना जरूरी है और उन्होंने राजनेताओं द्वारा मीडिया संस्थानों के मालिक होने का विरोध किया।
उन्होंने इतिहास के महत्वपूर्ण क्षणों को याद किया, जब मीडिया ने अहम भूमिका निभाई थी, जैसे आपातकाल और वोफोर्स स्कैण्डल की कवरेज।उन्होंने यह भी कहा कि अतीत में मीडिया द्वारा उठाए गए मुद्दों पर उन्होंने कार्रवाई की थी। उन्होंने पत्रकारों की समस्याओं पर ध्यान देने का वादा किया, जिसमें अमरावती में आंध्र प्रदेश यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (APUWJ) के कार्यालय के लिए जगह आवंटित करना शामिल है।जिस दिन आंध्र प्रदेश विधानसभा में अमरावती को राजधानी बनाने का प्रस्ताव कानून के रूप में पारित किया गया, उसी दिन नायडू ने अमरावती को “हैदराबाद प्लस” बताया और कहा कि इसे एक ग्रीनफील्ड सिटी के रूप में तकनीक के साथ विकसित किया जाएगा।आंध्र प्रदेश के सूचना मंत्री के. पार्थसारथी ने मीडिया की सराहना की कि उन्होंने उनकी पार्टी के सत्ता से बाहर रहने के दौरान भी उनके आंदोलनों का समर्थन किया। इससे पहले, IJU के अध्यक्ष के श्री निवास रेड़ड़ी ने वर्किंग जर्नलिस्ट्स एक्ट को बहाल करने, नया वेज बोर्ड गठित करने और मीडिया की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए नए कानून बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि लगभग दो दशकों से पत्रकारों के वेतन में कोई संशोधन नहीं हुआ है, जिससे उनकी स्थिति असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों से भी खराब हो गई है।उन्होंने कहा, “मजबूत और स्वतंत्र प्रेस के बिना लोकतंत्र काम नहीं कर सकता। दुर्भाग्य से, मीडिया की उपेक्षा ही नहीं हो रही, बल्कि उसे व्यवस्थित रूप से नियंत्रित भी किया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि कार्य के घंटे और नाइट ड्यूटी जैसे बुनियादी मुद्दों को अक्सर नजरअंदाज किया जाता है। साथ ही, पारंपरिक मीडिया डिजिटल (सोशल) मीडिया के दबाव में कमजोर पड़ रहा है और अखबार व टीवी चैनल दर्शकों के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहे हैं। उन्होंने हाल ही में नई दिल्ली में यूएनआई कार्यालय पर अधिकारियों द्वारा कब्जे का उदाहरण देते हुए बढ़ती असहिष्णुता पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पूर्ण अधिवेशन ने प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया को अधिक शक्तियों वाले मीडिया काउंसिल ऑफ इंडिया में बदलने का प्रस्ताव पारित किया है।IJU के महासचिव बलविन्दर सिंह जम्मू ने कहा कि देशभर में पत्रकारों की स्थिति बिगड़ रही है और उन पर हमले व हत्याएं हो रही हैं। उन्होंने कहा, “आज पत्रकार अपने कर्तव्यों का पालन करते समय देश और विदेश दोनों जगह गंभीर खतरे का सामना कर रहे हैं। अधिकारी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और स्वतंत्र प्रेस के प्रति असहिष्णु होते जा रहे हैं।विजयवाड़ा पश्चिम के विधायक वाई सत्य नारायना ने सोशल मीडिया के अनियंत्रित बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताई।वरिष्ठ पत्रकार आर.वी. रामाराव ने कहा कि मीडिया पर मालिकों का नियंत्रण बढ़ता जा रहा है और स्वतंत्र पत्रकारिता को बढ़ावा देने की जरूरत है।टीडीपी संसदीय दल के फ्लोर लीडर एल. कृष्णा देवरायालु ने कहा कि तेजी से बदलते मीडिया परिदृश्य में, जहां दर्शकों का ध्यान कम हो रहा है और डिजिटल क्रांति के कारण विज्ञापन घट रहे हैं, वहां विश्वसनीयता और तथ्यात्मक खबरें सबसे महत्वपूर्ण होनी चाहिए।एपी प्रेस अकादमी आंध्रा प्रदेश के अध्यक्ष अलापत्ती सुरेश कुमार ने बताया कि अकादमी तेलुगु मूल के 25 संपादकों के कार्यों का दस्तावेजीकरण कर रही है और ग्रामीण पत्रकारों को पेशेवर रूप से मजबूत बनाने पर काम कर रही है।
इससे पहले, देशभर से आए IJU नेताओं ने दिवंगत वरिष्ठ पत्रकारों—अंबाती अंजनेयलु, के. अमरनाथ, प्रेमनाथ भार्गव और मणिकोंडा चलपति राव—को श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम की शुरुआत के श्री निवास रेड्डी द्वारा IJU का ध्वज फहराने के साथ हुई।इस अधिवेशन में देशभर के 27 राज्यों से लगभग 300 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। 27 मार्च से शुरू हुए तीन दिवसीय इस कार्यक्रम के दूसरे दिन कई प्रस्ताव पारित किए गए। लगभग तीन दशकों बाद विजयवाड़ा में यह अधिवेशन आयोजित किया गया। कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी हुईं, जिसमें इण्डियन प्यूपिल थियेटर एसोशियेशन (IPTA) के कलाकारों ने देशभक्ति और विचारोत्तेजक गीत प्रस्तुत किए। वरिष्ठ मिमिक्री कलाकार सिल्वेस्टर ने दर्शकों का मनोरंजन किया, जबकि शहर के युवा नर्तकों ने कुचिपुड़ी नृत्य प्रस्तुत किया।

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