आईसीएआर भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान ने क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में रचा इतिहास
बरेली । आई सी ए आर– भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, इज्जतनगर ने वैश्विक स्तर पर एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग (विषयवार – वेटरिनरी साइंस) में विश्व के शीर्ष 100 संस्थानों में स्थान प्राप्त किया है। इस उपलब्धि के साथ आई वी आर आई भारत का पहला संस्थान बन गया है, जिसने वेटरिनरी साइंस विषय में इस प्रतिष्ठित वैश्विक रैंकिंग में देश का प्रतिनिधित्व किया है।
क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग के अनुसार आई वी आर आई को 51– 100 के रैंक बैंड में स्थान मिला है, जो पशु चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में संस्थान की उत्कृष्टता और वैश्विक पहचान को दर्शाता है।
भारतीय कृषि अनुसन्धान परिषद् के उपमहानिदेशक एवं संस्थान के निदेशक डॉ राघवेन्द्र भट्टा ने संस्थान की इस उपलब्धि को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि आई सी ए आर के अंतर्गत स्थापित आई वी आर आई देश का अग्रणी पशु चिकित्सा अनुसंधान एवं शिक्षा संस्थान है, जिसने वर्षों से पशु स्वास्थ्य, रोग नियंत्रण, टीका विकास तथा पशुधन उत्पादन से जुड़े क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। संस्थान की यह उपलब्धि इसके वैज्ञानिकों, शिक्षकों, शोधार्थियों तथा विद्यार्थियों के सतत प्रयासों और उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान का परिणाम है।
आई सी ए आर के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि आई सी ए आर देश में उच्च कृषि शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र को विश्वस्तरीय बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
क्यूएस रैंकिंग में संस्थानों का मूल्यांकन शैक्षणिक प्रतिष्ठा, नियोक्ता प्रतिष्ठा, शोध उद्धरण तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे विभिन्न मानकों के आधार पर किया जाता है। आई वी आर आई का इस सूची में शामिल होना संस्थान के अनुसंधान, शिक्षा तथा कृषि- खाद्य प्रणालियों में वैज्ञानिक योगदान को दर्शाता है।
इस वैश्विक मान्यता से न केवल संस्थान की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को बल मिलेगा, बल्कि भारत में पशु चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान के क्षेत्र को भी नई दिशा और प्रेरणा प्राप्त होगी। यह उपलब्धि देश में पशुधन विकास, खाद्य सुरक्षा और सतत कृषि प्रणाली को मजबूत बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। संस्थान ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे भारत के पशु चिकित्सा विज्ञान क्षेत्र के लिए गर्व का क्षण बताया है। निर्भय सक्सेना














































































