मौलाना शहाबुद्दीन ने यूसीसी का किया विरोध, गुजरात में यूसीसी लागू हुआ तो मुसलमानों को मंजूर नहीं।
बरेली गुजरात सरकार सामान्य नागरिक संहिता लागू करने के लिए कोशिश कर रही है। इस संदर्भ में आल इंडिया मुस्लिम जमात ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करके मुसलमानों का पक्ष रखा, जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने कहा कि सामान्य नागरिक संहिता एक तरह से सीधे तौर पर शरीयत में मुदाखिलत है, ये मुसलमानो को मंजूर नहीं।
मौलाना ने कहा कि गुजरात सरकार ने विधानसभा मे मुसव्वदा पेश करके यूसीसी लागू करने का ऐलान कर दिया है, सूत्रों के जरिए जो बातें निकलकर सामने आई है उसके मुताबिक उसमें तालाक देने का अधिकार मर्दों के साथ महिलाओं को भी दिया जायेगा, हलाला और इद्दत पर प्रतिबंध लगाया जायेगा, मर्द एक ही शादी कर सकता है और उसको सिर्फ दो बच्चा पैदा करने का अधिकार होगा, शादी का रजिस्ट्रेशन जरूरी होगा आदि। अगर इन कानूनों पर किसी व्यक्ति ने अमल नहीं किया तो सरकारी जनकल्याण और आदि लाभकारी सरकारी योजनाओं से वंचित कर दिया जायेगा। यूसीसी में दी गयी उक्त बातें सीधे तौर पर कुरान व हदीस के खिलाफ है, इसलिए मुसलमान इस कानून को मानने के लिए तैयार नहीं है।
मौलाना ने आगे कहा कि ये समस्या मुसलमानो के अलावा भारत में रहने वाले दुसरे सम्प्रदाय के सामने भी खड़ी होगी, इसलिए यूसीसी लागू किये जाने की जरूरत नहीं है, संविधान, आई पी सी, फौजदारी – जमींदारी एक्ट और शादी विवाह से सम्बन्ध रखने वाले अलग-अलग सम्प्रदाय के कानून पहले से ही बने हुए हैं और देश की आजादी के बाद 79 सालों से इस पर अमल किया जा रहा है।
मौलाना ने कहा कि देश में 21 वी ला कमिशन की रिपोर्ट में सामान्य नागरिक संहिता को गैर जरूरी क़रार दिये जाने के बावजूद 22 वी ला कमिशन की रिपोर्ट के जरिए देश में यूसीसी के लिए विचार विमर्श किया जा रहा है, जो कि सभी के लिए हैरान करने वाली बात है। चूंकि एक साल पहले ला कमिशन यूसीसी को गैर जरूरी बताता है फिर एक साल बाद उसकी पैरवी करने लगता है, ये बात देश के नागरिकों के लिए हैरान करने और अचंभे में डालने वाली बात है।
मौलाना बरेलवी ने आगे कहा कि यूसीसी का पूरे देश भर में मुसलमान विरोध करेगा, धार्मिक उलमा और बुद्धिजीवी अहमदाबाद (गुजरात) में बहुत जल्द बैठक करके देश व्यापी आंदोलन की रणनीति बनाने जा रहे हैं, हम लोकतांत्रिक ढांचे में यकीन रखते हुए कानून के दायरे में विरोध प्रदर्शन करेंगे।














































































