पेंशन अधिनियम वापस लेने की मांग तेज, काली पट्टी बंधकर मनाया विरोध दिवस

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बरेली। संयुक्त पेंशनर्स कल्याण समिति उत्तर प्रदेश के बैनर तले पेंशनर्स ने केंद्र सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) वैधता अधिनियम, 2025 को वापस लेने की मांग उठाई। मंडल/जनपद संयोजक जयवीर सिंह के नेतृत्व में पेंशनर्स ने सिटी मजिस्ट्रेट के माध्यम से प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में कहा गया कि 25 मार्च 2025 से लागू किए गए इस अधिनियम के जरिए केंद्र सरकार को पेंशनर्स का वर्गीकरण करने का अधिकार मिल गया है, जिससे उनके बीच असमानता पैदा हो रही है। पेंशनर्स का आरोप है कि इस अधिनियम को बिना पूर्व सूचना के वित्त विधेयक के हिस्से के रूप में पेश कर उसी दिन लोकसभा से पारित करा लिया गया, जो लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के अनुरूप नहीं है।
पेंशनर्स ने बताया कि यदि यह अधिनियम लागू रहता है तो सेवानिवृत्ति की तिथि को पेंशन निर्धारण का आधार बनाया जाएगा, जिससे पुराने पेंशनर्स को नए वेतन आयोग की सिफारिशों का लाभ नहीं मिल सकेगा। इससे विशेष रूप से वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों में उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।

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ज्ञापन में सर्वोच्च न्यायालय के 1983 के ऐतिहासिक निर्णय डी.एस. नकारा बनाम भारत संघ का हवाला देते हुए कहा गया कि पेंशन सामाजिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम है और इसका उद्देश्य सेवानिवृत्त कर्मचारियों को सम्मानजनक जीवन प्रदान करना है। ऐसे में पेंशनर्स के बीच भेदभाव करना न्यायसंगत नहीं है।

पेंशनर्स ने यह भी उल्लेख किया कि सातवें वेतन आयोग ने 1 जनवरी 2016 से पहले और बाद में सेवानिवृत्त कर्मचारियों के बीच समानता की सिफारिश की थी, जिसे केंद्र सरकार ने स्वीकार भी किया था। इसके बावजूद नए अधिनियम के प्रावधान पुराने पेंशनर्स के हितों के खिलाफ बताए गए।

इस मुद्दे को लेकर ऑल इंडिया स्टेट पेंशनर्स फेडरेशन ने 25 मार्च को ‘विरोध दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया है, ताकि अधिनियम के लागू होने के एक वर्ष पूरे होने पर अपनी नाराजगी शांतिपूर्ण ढंग से दर्ज कराई जा सके।

पेंशनर्स ने प्रधानमंत्री से मांग की है कि इस अधिनियम को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए, जिससे लाखों पेंशनर्स को होने वाली संभावित आर्थिक क्षति से बचाया जा सके। प्रदर्शन में एन पी त्रिपाठी , क्षमा नाथ दुबे , ओंकार नाथ तिवारी ,भगवान सिंह वर्मा आदि मौजूद थे।

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