बदायूँ HPCL दोहरे हत्याकांड में नया मोड़—नोएडा से पहुंचे DGM के परिजन, SSP से की अहम मुलाकात
बदायूँ। मूसाझाग थाना क्षेत्र के सैंजनी गांव स्थित हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) के कम्प्रेस्ड बायो-गैस (CBG) प्लांट में हुए सनसनीखेज दोहरे हत्याकांड के बाद अब जांच का दायरा और तेज हो गया है। इसी क्रम में गुरुवार को मृतक डिप्टी जनरल मैनेजर (DGM) सुधीर कुमार गुप्ता के परिजन नोएडा से बदायूँ पहुंचे और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) अंकिता शर्मा से उनके आवास पर मुलाकात की।
सूत्रों के मुताबिक, यह मुलाकात बेहद अहम मानी जा रही है, जिसमें परिजनों और पुलिस अधिकारियों के बीच करीब एक घंटे तक गहन वार्ता हुई। इस दौरान परिजनों ने घटना के हर पहलू पर चर्चा की और पुलिस को अपने स्तर से पूरी जानकारी दी। हालांकि, मुलाकात के बाद परिजन मीडिया से दूरी बनाते नजर आए और किसी भी प्रकार की औपचारिक प्रतिक्रिया देने से बचते रहे।
मृतक DGM सुधीर गुप्ता के भाई ने अनौपचारिक बातचीत में बताया कि वे पुलिस की कार्रवाई और जांच की प्रगति जानने के लिए आए थे। माना जा रहा है कि इस दौरान पुलिस ने परिजनों के बयान भी दर्ज किए होंगे और घटना से जुड़े अन्य पहलुओं पर उनकी राय ली गई होगी।पुलिस सूत्रों का कहना है कि इस मुलाकात के दौरान मुख्य आरोपी अजय प्रताप सिंह के अलावा अन्य संभावित सहयोगियों की भूमिका पर भी चर्चा हुई। यह भी जांच का विषय है कि क्या इस हत्याकांड में किसी और व्यक्ति की संलिप्तता थी या नहीं।
गौरतलब है कि इससे पहले दो दिन पूर्व इस हत्याकांड में मारे गए उप प्रबंधक हर्षित मिश्रा के परिजन भी SSP से मिले थे। उन्होंने इस घटना के लिए “खाकी और खादी” को जिम्मेदार ठहराते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की थी।12 मार्च को दोपहर करीब एक बजे HPCL प्लांट में मीटिंग के दौरान डिप्टी जनरल मैनेजर सुधीर कुमार गुप्ता (55) और डिप्टी/असिस्टेंट मैनेजर हर्षित मिश्रा (30) की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। आरोपी अजय प्रताप सिंह उर्फ रामू, जो प्लांट का पूर्व वेंडर था, ने बेहद करीब से दोनों अधिकारियों पर ताबड़तोड़ फायरिंग की थी।घटना के बाद आरोपी फरार हो गया था, लेकिन बाद में पुलिस ने मुठभेड़ के बाद उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आरोपी प्लांट को पराली सप्लाई करता था और ठेका निरस्त होने के बाद वह रंजिश रखने लगा था।
पुलिस ने इस साजिश में सहयोग के आरोप में प्लांट के ड्राइवर धर्मेंद्र यादव और मुनेंद्र विक्रम सिंह को भी गिरफ्तार किया है। SIT अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है।घटना के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी और उसके परिजनों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। 17 मार्च को दातागंज तहसील प्रशासन और PWD की संयुक्त टीम ने सैंजनी चौराहे–हजरतपुर रोड पर बनी अवैध दुकानों पर बुलडोजर चलाया।बताया गया कि ये दुकानें आरोपी अजय प्रताप सिंह और उसके ताऊ राकेश सिंह की थीं, जो सरकारी और ग्राम समाज की जमीन पर अवैध कब्जा कर बनाई गई थीं। कुल 11 दुकानों को ध्वस्त किया गया, साथ ही एक अवैध पंचायत घर को भी गिरा दिया गया।इसके अलावा प्रशासन ने आरोपी के परिवार द्वारा कब्जाई गई करीब 36 बीघा सरकारी जमीन पर खड़ी गेहूं की फसल को भी ट्रैक्टर चलाकर नष्ट करवा दिया। यह कार्रवाई जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है।इस पूरे मामले में लापरवाही सामने आने पर मूसाझाग थाना प्रभारी अजय कुमार और उप निरीक्षक धर्मेंद्र कुमार को निलंबित कर दिया गया। वहीं तत्कालीन SSP बृजेश कुमार सिंह का तबादला कर दिया गया।पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए SIT गठित की गई है, जो आरोपी के आपराधिक नेटवर्क, उसकी संपत्तियों और कथित राजनीतिक व पुलिस संबंधों की जांच कर रही है।जांच के दौरान आरोपी के परिवार से जुड़े कई अन्य पहलू भी सामने आए हैं। प्रारंभिक जांच में बिजली कनेक्शन अवैध पाया गया है, जिस पर अलग से FIR दर्ज करने की तैयारी चल रही है।इसके अलावा, आरोपी के पास मौजूद कुछ लाइसेंस और बाहरी क्षेत्रों से जुड़े कागजात भी जांच के दायरे में आ गए हैं। प्रशासन का कहना है कि जमीन, निर्माण, बिजली और लाइसेंस समेत हर पहलू की गहन जांच की जा रही है।
अब जांच की दिशा पर टिकी निगाहेंफिलहाल मुख्य आरोपी जेल में है, उसके सहयोगियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और अवैध कब्जों पर कार्रवाई जारी है। वहीं, SIT की जांच लगातार आगे बढ़ रही है।नोएडा से आए मृतक DGM के परिजनों की SSP से मुलाकात के बाद इस मामले में कई नए तथ्य सामने आने की संभावना जताई जा रही है। आने वाले दिनों में जांच की दिशा और भी स्पष्ट होगी और यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस बहुचर्चित हत्याकांड में और कौन-कौन से नाम सामने आते हैं।














































































