भगवानपुर में रास्ता (श्रेणी-6) की भूमि पर बारात घर का निर्माण, राजस्व संहिता की खुली अवहेलना
दातागंज। तहसील के ग्राम भगवानपुर में राजस्व अभिलेखों में श्रेणी-6 (रास्ता) दर्ज गाटा संख्या-153 (रकबा 0.6070 हेक्टेयर) पर बारात घर का निर्माण कार्य विवादों में घिर गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि सार्वजनिक उपयोग की इस भूमि पर पक्का निर्माण कराना उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता-2006 के प्रावधानों का सीधा उल्लंघन है, लेकिन स्थानीय प्रशासन ने बार-बार शिकायतों के बावजूद न तो निर्माण रोका और न ही दोषियों पर कार्रवाई की।प्राप्त दस्तावेज़ों के अनुसार, प्रार्थी ने पहले स्थानीय स्तर पर कई शिकायती पत्र दिए। जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो आईजीआरएस (जनसुनवाई) पोर्टल पर दो अलग-अलग संदर्भों—संख्या 9251490005879 (दिनांक 07.01.2026) तथा संख्या 50014926000004—के तहत शिकायत दर्ज कराई गई।शिकायतकर्ता का दावा है कि दोनों शिकायतों का निस्तारण “गलत तथा भ्रामक” तरीके से किया गया। निस्तारण आख्या में उप जिलाधिकारी (एसडीएम), दातागंज ने स्वयं स्वीकार किया कि श्रेणी-6 रास्ता की भूमि पर बारात घर का निर्माण ग्राम पंचायत के प्रस्ताव के आधार पर किया जा रहा है, लेकिन उसी आख्या में प्रार्थना पत्र को “झूठा तथा निराधार” बताकर खारिज कर दिया गया और किसी भी कार्रवाई से इनकार कर दिया गया।

वहीं, आईजीआरएस संदर्भ 9251490005879 की निस्तारण आख्या में तहसीलदार, दातागंज ने अलग ही रुख अपनाते हुए उल्लेख किया कि “ग्राम प्रधान ने ग्रामवासियों की सहमति और आग्रह पर निर्माण कार्य शुरू कराया है।” इस प्रकार एसडीएम द्वारा “ग्राम पंचायत के प्रस्ताव” और तहसीलदार द्वारा “ग्रामवासियों की सहमति” का हवाला—दोनों रिपोर्टें परस्पर विरोधी हैं। शिकायत में यह भी उल्लेख है कि ग्राम प्रधान ने अपने शपथ पत्र में स्पष्ट रूप से किसी भी प्रस्ताव की जानकारी से इनकार किया है। निस्तारण आख्या तथा शपथ पत्र की प्रतियाँ संलग्न कर प्रार्थी ने आरोप लगाया कि तहसील प्रशासन जानबूझकर भ्रामक रिपोर्टिंग कर रहा है। कानूनी स्थिति: राजस्व अभिलेखों में श्रेणी-6 के रूप में दर्ज भूमि (रास्ता/चकरोड/सड़क) सार्वजनिक उपयोग की श्रेणी में आती है। उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता-2006 की धारा-77 व संबंधित प्रावधानों के तहत ऐसी भूमि पर भूमिधरी अधिकार नहीं बनते और राज्य सरकार की निर्धारित प्रक्रिया के बिना वर्ग परिवर्तन या निर्माण की अनुमति नहीं है। प्रार्थी का तर्क है कि ग्राम पंचायत की सहमति या असहमति भी तभी मान्य है जब वह नियमों के अनुरूप हो; नियम-विरुद्ध सहमति के आधार पर रास्ता की भूमि पर निर्माण नहीं किया जा सकता। उच्चाधिकारियों से प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए निर्माण कार्य तत्काल रुकवाने, अतिक्रमण हटाने तथा भ्रामक निस्तारण व नियम-विरुद्ध निर्माण के लिए उत्तरदायी अधिकारियों व व्यक्तियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की माँग की है। स्थानीय ग्रामीणों ने भी सवाल उठाया है कि जब राजस्व रिकॉर्ड में भूमि का वर्ग स्पष्ट रूप से “रास्ता” दर्ज है, तो फिर ग्राम पंचायत के प्रस्ताव या ग्रामीणों की सहमति का हवाला देकर निर्माण कैसे उचित ठहराया जा सकता है। मामले में प्रशासन की चुप्पी और विरोधाभासी रिपोर्टों ने पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।














































































