बदायूं। भगवान परशुराम विद्या मंदिर इंटर कालेज नेकपुर में चल रही श्री राम कथा महोत्सव के दूसरे दिन श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। कथा व्यास सामाजिक संत रवि जी समदर्शी महाराज ने अपने ओजस्वी और मार्मिक प्रवचनों से श्रद्धालुओं को रामकथा का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि श्री रामकथा जीवन को मर्यादित और पवित्र बनाती है। वातावरण सुगंधित हो जाता है। उन्होंने कहा कि श्रीरामायण हमें अपने निज धर्म पर चलना सिखाती है, मन में उठने वाले संशयों को दूर करती है और जीवन के दुख-संताप को समाप्त करने का मार्ग दिखाती है। प्राचीन काल में यह कथा विभिन्न स्थानों पर महापुरुषों द्वारा सुनाई गई। प्रयागराज में महर्षि भरद्वाज को, नीलांचल में कागभुशुंडी ने पक्षियों के राजा गरुड़ को तथा कैलाश पर्वत पर भगवान शिव ने माता पार्वती को रामकथा का उपदेश दिया। गोस्वामी तुलसीदास ने अपने मन को रामकथा सुनाकर आत्मकल्याण का मार्ग बताया। कथा के दौरान महाराज ने राजा दक्ष के प्रजापति बनने, उनके द्वारा भगवान शिव का अपमान करने, माता सती के मन में उत्पन्न संशय, पिता दक्ष के यज्ञ में जाने की जिद, यज्ञ का विध्वंस और माता सती के शरीर त्यागने जैसे प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने सप्तऋषियों द्वारा माता पार्वती की परीक्षा का प्रसंग भी विस्तार से सुनाया। इन मार्मिक प्रसंगों को सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। भगवान श्रीराम के जयघोष से वातावरण भक्तिमय बन गया। यजमान के रूप में प्रधानाचार्य एससी मिश्रा, रामबहादुर पांडे, वाचस्पति मिश्र, केके उपाध्याय, केएल गुप्ता, लीला पांडे, राहुल पांडे, कुसुम सक्सेना, अमित पांडे, उत्पल विजय, आयुष भारद्वाज, आदित्य गुप्ता, अंकुश सहित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर प्रसाद ग्रहण किया।