श्रीरामकथा में कथा व्यास से जानकी के स्वयंवर का प्रसंग सुनकर श्रोता हुए मंत्रमुग्ध
शाहजहांपुर।।श्रीरामकथा के छठे दिन कथाव्यास श्री विजय कौशल जी ने पूर्व प्रसंग को आगे बढ़ाते हुए कहा कि भगवान राम गुरु विश्वामित्र के साथ पतित पावनी गंगा पर स्नान, ध्यान भजन और विश्राम के पश्चात जनकपुरी पहुंचे हैं। राजा जनक बड़ी खुशी और श्रद्धा भाव से उनका सत्कार करते हैं। जनक जी राम की शोभा व सुंदरता देख मंत्रमुग्ध से हो गए। विश्राम के बाद राम ने गुरु विश्वामित्र की आज्ञा मांग, नगर भ्रमण की इच्छा व्यक्त की। गुरु की आज्ञा पाकर दोनों भाई जनकपुरी का दर्शन करने चले ।नगर के नर नारियों ने जब दोनों सुंदर राजकुमारों को देखा तो वे भी उनकी सुंदरता देखकर मंत्रमुग्ध हो उठे। पूरे नगर में एक ही चर्चा हो रही है कि ये दोनों राजकुमार दुनिया में सबसे सुंदर हैं, जिसने भी देखा वह ठगा का ठगा रह गया।

भगवान जैसे ही पुष्प लेने जनकपुरी की पुष्प वाटिका के द्वार पर पहुंचते हैं, ठीक उसी समय जानकी जी भी अपनी मां से आज्ञा पाकर पुष्प वाटिका में गौरी पूजन के लिए आती हैं।
“पूजन की करके तैयारी सखिन संग आई जनक की लली।”
इस सुंदर भजन की संगीतमयी प्रस्तुति पर कथा पंडाल में मौजूद श्रोता झूम उठे।
राम और जानकी दोनों का जैसे ही मिलन होता है, ऐसा लगता है जैसे दुनिया का स्वर्ग जनकपुरी की पुष्प वाटिका में उतर आया हो। सीता जी के स्वयंवर की तैयारी पूर्ण हुई एवं अनेक देशों के राजा महाराजा स्वयंवर में पधारे। जानकी जी भी अपनी सखियों सहित स्वयंवर में पधारती हैं। स्वयंवर की घोषणा होती है कि जो कोई भी इस शिवधनुष को उठाएगा, जानकी जी उसी के गले में अपनी वरमाला डालेंगी। धनुष को उठा पाने में सारे राजा महाराजा असफल रहते हैं।
भूप सहस दस एकहि बारा। लगे उठावन टरइ न टारा॥
तब दस हजार राजा एक ही बार धनुष को उठाने लगे, इसके बावजूद भी वह उनके टाले नहीं टलता।अब जनक जी चिंतित हो उठे कि मेरी पुत्री सीता का विवाह कैसे होगा।
वे कहने लगे- लिखा न विधि वैदेहि विवाहू।
इस बात पर लक्ष्मण जी अत्यंत क्रोधित होते हैं किंतु राम मन ही मन मुस्कुरा रहे हैं।गुरु विश्वामित्र की आज्ञा पाकर राम उठते हैं।
उठहु राम भंजहु भव चापा, मेटहु तात जनक परितापा
राम ने अत्यंत उदास सीता जी को देखा एवं तुरंत ही धनुष की तीन परिक्रमा कर, धनुष को पकड़ प्रत्यंचा को खींचा और ऐसा करते ही धनुष टूट गया। सीता जी ने राम के गले में वरमाला पहना दी। चारों ओर राम और सीता की जय जयकार होने लगी।
ये उपस्थित रहे मंच पर
इस अवसर पर मंच की शोभा बढ़ाने वालों में महामंडलेश्वर स्वामी हरिहरानंद जी महाराज, स्वामी अभेदानंद जी महाराज, पीलीभीत से स्वामी हनुमाननाथ जी, स्वामी सर्वेश्वरानंद जी महाराज, फर्रुखाबाद से पूज्य व्यास श्री राममूर्ति जी मिश्र, ज्योतिषी श्री रामशंकर जी उपाध्याय, ज्योतिषी श्री शुभेश शरमन जी एवं स्वामी विवेकानंद सरस्वती जी प्रमुख थे।
इन अतिथियों ने बढ़ाई शोभा
पुवायां विधायक श्री चेतराम, जलालाबाद विधायक श्री हरिप्रकाश वर्मा, श्री डी.पी.एस. राठौर एवं श्रीमती सोनिया राठौर, श्री अरुण खंडेलवाल एवं श्रीमती अंजू खंडेलवाल, श्री सोबरन सिंह यादव, एडवोकेट ओम सिंह, एडवोकेट संतोष सिंह, श्री मचकेन्द्र सिंह, आरएसएस से एडवोकेट रवि मिश्रा, इंजीनियर आर के अग्रवाल, प्रो अवनीश मिश्र, प्रो आर के आजाद, प्रो अनुराग अग्रवाल सहित मुमुक्षु शिक्षा संकुल की समस्त शिक्षण संस्थाओं के सभी शिक्षक व शिक्षणेत्तर कर्मचारियों सहित भारी संख्या में भक्तगण उपस्थित रहे।
पूजन, आरती व प्रसाद वितरण
कथा आरंभ होने से पहले व्यासपीठ का पूजन डॉ देवेंद्र कुमार सिंह, श्रीमती प्रीति सिंह एवं प्रांजल रस्तोगी तथा श्रीमती झरना रस्तोगी के द्वारा किया गया। कथा के अंत में आरती विधायक श्री चेतराम, श्री सोवरन सिंह, श्री संतोष सिंह एवं श्रीमती ज्योति मिश्रा के द्वारा की गई। प्रसाद वितरण में श्री अशोक अग्रवाल एवं डॉ रामनिवास गुप्ता का योगदान रहा।













































































