श्री रामकथा के पांचवें दिन कथाव्यास ने भगवान राम की बाल लीलाओं का मनोहारी वर्णन किया

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शाहजहांपुर।मुमुक्षु आश्रम में चल रही श्री रामकथा के पांचवें दिवस कथाव्यास विजय कौशल महाराज ने राम जन्म की कथा को आगे बढ़ाते हुए भगवान की बाल लीलाओं का मनोहारी वर्णन किया। कथा व्यास ने कहा कि जब कैलाश पर बैठे भगवान शिव माता पार्वती से प्रभु की लीला का वर्णन करते हैं, तब पार्वती जी ने शिवजी से प्रभु की लीला के दर्शन की अभिलाषा व्यक्त की। शिवजी मां पार्वती के साथ बृजधाम आए और वहां अपना वेश बदलकर भगवान कृष्ण की रासलीला में शामिल हुए। जैसे ही कृष्ण ने बंसी बजाई, शिवजी भाव विभोर हो नाचने लगे और उनका भेद खुलते ही भगवान कृष्ण मन ही मन मुस्कुराने लगे। शिव व पार्वती ने भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं और रासलीलाओं के साथ उनके मनोहरी रूप के दर्शन किए और कैलाश पर्वत की ओर पधारे।

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कथा व्यास ने कहा कि कथा मात्र मनोरंजन के लिए नहीं होती। कथा तो मन और चरित्र को पवित्र करती है। हम सबको पूरी श्रद्धा भाव से भगवान श्रीराम की कथा का श्रवण करना चाहिए। भगवान के नाम की महिमा अपरंपार है। उनके नाम स्मरण से बड़े बड़े पापियों का उद्धार हो जाता है।
“कलयुग केवल नाम अधारा ।
सुमिरि सुमिरि नर उतरहिं पारा ।”
कथा व्यास ने आगे कहा कि राम के जन्म के उपरांत राजा दशरथ ने पूरे अवध में मिठाइयां और उपहार बंटवाए। शिवजी कैलाश पर्वत से अवधपुरी में आए और भगवान के बाल रूप के दर्शन किए। कुछ दिन बाद राजा दशरथ ने संत, मुनि, ऋषियों और ब्राह्मणों से विधि विधानपूर्वक चारों पुत्रों का नामकरण कराया। राम की लीलाओं से पूरे अवध में खुशियां छा गईं। उधर राक्षसों का अत्याचार दिन प्रतिदिन बढ़ रहा था। वे तपोस्थलों को लगातार नष्ट-भ्रष्ट कर रहे थे। गुरु विश्वामित्र अवध में राम जी के दर्शन के लिए आए एवं उन्हें अपने साथ गुरु आश्रम ले गए। गंगा तट पर पहुंचकर गुरु विश्वामित्र ने राम से गंगा मैया की महिमा का बखान किया। कथाव्यास ने गुरु की महिमा का बखान करते हुए कहा कि गुरु की कृपा से ही भगवान के दर्शन होते हैं। उन्होंने कहा कि गुरु बड़ी प्रतीक्षा से प्राप्त होते हैं और गुरु की कृपा प्राप्त होते ही ईश्वर का दर्शन हो जाता है।

कथा के मंच पर मुमुक्षु शिक्षा संकुल के मुख्य अधिष्ठाता स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती, महामंडलेश्वर स्वामी हरिहरानंद जी महाराज, अनंत श्री स्वामी अभेदानंद सरस्वती, अनंत श्री स्वामी सर्वेश्वरानंद सरस्वती, स्वामी गंगेश्वरानंद, स्वामी विवेकानंद सरस्वती एवं पंडित रमाशंकर उपाध्याय भक्तों को आशीर्वाद प्रदान करने के लिए उपस्थित रहे।

कथा का श्रवण करने के लिए राज्यसभा सांसद मिथलेश कुमार, लोकसभा सांसद अरुण सागर, कटरा विधायक वीर विक्रम सिंह प्रिंस, रमेश भइया, श्री राम सागर यादव एवं दुर्गावती यादव, बाबूराम गुप्ता, अनूप गुप्ता, जीएस वर्मा सुरेश सिंघल, प्राचार्य प्रो आर के आजाद, उपप्राचार्य प्रो अनुराग अग्रवाल सहित मुमुक्षु शिक्षा संकुल की समस्त शिक्षण संस्थाओं के सभी प्रधानाचार्य, शिक्षक, शिक्षणेत्तर कर्मचारी एवं भक्तों की भारी भीड़ उपस्थित रही।

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