अमेरिका: एपस्टीन फाइल्स की नई खेप जारी, सनसनीखेज दावों के बीच सबूतों की कमी भी उजागर
अमेरिकी न्याय विभाग ने 30 जनवरी 2026 को यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़े नए दस्तावेज जारी किए हैं। करीब 30 लाख पन्नों, 1.8 लाख तस्वीरों और लगभग 2000 वीडियो वाले इन दस्तावेजों में कई प्रभावशाली लोगों के नाम, निजी जानकारियां और जांच से जुड़े रिकॉर्ड सामने आए हैं। हालांकि दस्तावेजों में किसी भी व्यक्ति को सीधे अपराध से जुड़ा साबित नहीं किया गया है, लेकिन कुछ उल्लेखों ने दुनियाभर में चर्चा और विवाद पैदा कर दिया है।

कैनिबलिज्म शब्द के जिक्र से बढ़ी चर्चा
दस्तावेजों में कैनिबल और कैनिबलिज्म जैसे शब्दों का उल्लेख मिलने के बाद सोशल मीडिया पर कई सनसनीखेज दावे सामने आने लगे। हालांकि रिकॉर्ड बताते हैं कि इन शब्दों का इस्तेमाल अलग-अलग संदर्भों में हुआ है और इनमें से किसी का भी सीधा संबंध एपस्टीन या उसके सहयोगियों द्वारा किए गए अपराध से स्थापित नहीं हुआ है। कुछ उल्लेख ईमेल बातचीत, मीडिया सामग्री और एक रेस्तरां के संदर्भ से जुड़े पाए गए।

प्रमुख हस्तियों के नामों का जिक्र
जारी दस्तावेजों में कई हाई-प्रोफाइल व्यक्तियों के नाम सामने आए हैं।
एलन मस्क से जुड़े ईमेल संवाद का उल्लेख मिला, हालांकि उन्होंने कहा है कि उन्होंने कभी एपस्टीन के द्वीप का दौरा नहीं किया।
बिल गेट्स के बारे में कुछ ईमेल ड्राफ्ट का जिक्र है, जिन्हें उनके प्रवक्ता ने पूरी तरह गलत और निराधार बताया।
प्रिंस एंड्रयू से जुड़ी एक कथित तस्वीर का भी उल्लेख किया गया है।
डोनाल्ड ट्रंप का नाम एफबीआई टिप लाइन पर मिली कुछ अपुष्ट शिकायतों के संदर्भ में कई बार आया है।
इसके अलावा स्टीव बैनन और सारा फर्ग्यूसन से जुड़े ईमेल संवाद का भी उल्लेख दस्तावेजों में मौजूद है।
वसीयत और आर्थिक जानकारी भी सामने आई
दस्तावेजों के अनुसार एपस्टीन ने अपनी मौत से दो दिन पहले वसीयत और ट्रस्ट अपडेट किया था। रिपोर्ट के मुताबिक उसने अपनी संपत्ति का बड़ा हिस्सा अपनी अंतिम साथी करीना शुलियाक को देने की योजना बनाई थी। एक मनोवैज्ञानिक रिपोर्ट में उसे शक्ति, संपत्ति और प्रभावशाली लोगों से जुड़ाव पर आधारित व्यक्तित्व वाला बताया गया है।
गोपनीयता और संपादन पर विवाद
दस्तावेजों के जारी होने के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया क्योंकि कई पीड़ितों और गवाहों के नाम और निजी तस्वीरें सार्वजनिक हो गईं। इसे गोपनीयता का गंभीर उल्लंघन बताया गया, जिसके बाद न्याय विभाग को हजारों दस्तावेज अस्थायी रूप से वेबसाइट से हटाने पड़े। वहीं कुछ मीडिया संस्थानों ने आरोप लगाया कि जरूरी जानकारियां संपादित कर छिपाई गई हैं।
नरभक्षण से जुड़े दावों की सच्चाई
नरभक्षण और अनुष्ठानिक बलि से जुड़े सनसनीखेज दावे एक अज्ञात व्यक्ति की एफबीआई पूछताछ पर आधारित पाए गए। जांच एजेंसी के रिकॉर्ड के अनुसार इन आरोपों के समर्थन में कोई विश्वसनीय सबूत प्रस्तुत नहीं किया गया और आगे जांच की आवश्यकता नहीं समझी गई।
इन दस्तावेजों के सामने आने के बाद एक बार फिर एपस्टीन मामले को लेकर वैश्विक स्तर पर बहस तेज हो गई है, जिसमें तथ्यों, अफवाहों और अपुष्ट दावों के बीच फर्क को लेकर भी चर्चा जारी है।













































































