कक्षा 9 के श्रेयश सौरभ को कैंब्रिज स्थित अनुसंधान संस्थान से मिली प्रशंसा क्वांटम फ्लूडिक एटॉमिक मॉडल पर भेजा था नवीन दृष्टिकोण
बरेली । श्री गुलाबराय मॉन्टेसरी सीनियर सेकेंडरी स्कूल नैनीताल रोड ब्रांच की कक्षा 9 के विद्यार्थी श्रेयश सौरभ ने अमेरिका के कैम्ब्रिज में स्थित एक विश्व प्रसिद्ध, निजी अनुसंधान विश्वविद्यालय मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) को परमाणु संरचना को नए सिरे से समझने के लिए क्वांटम फ्लूडिक एटॉमिक मॉडल का एक नया विचार भेजा था।
यह शोध क्वांटम फ्लूडिक एटॉमिक मॉडल प्रस्तुत करता है, जो वर्तमान क्वांटम यांत्रिकी की प्रयोगात्मक रूप से सिद्ध संरचना को स्वीकार करते हुए, परमाणु की भौतिक व्याख्या को एक अतिरिक्त दृष्टिकोण प्रदान करता है। इस मॉडल में यह प्रस्तावित किया गया है कि क्वांटम यांत्रिकी द्वारा वर्णित परमाणु व्यवहार को एक उच्च-आयामी क्वांटम द्रव क्षेत्र में उत्पन्न स्थिर द्रवात्मक संरचनाओं के रूप में भी समझा जा सकता है।
क्वांटम फ्लूडिक एटॉमिक मॉडल परमाणु के घटकों को बिंदु कणों तक सीमित न रखकर, उन्हें क्वांटम द्रव में बनने वाली संरचित और परिसंचरण-युक्त अवस्थाओं के रूप में निरूपित करता है। इससे ऊर्जा स्तरों, स्थिरता और आंतरिक गुणों की व्याख्या एक अधिक भौतिक और दृश्य ढाँचे में संभव होती है, जबकि क्वांटम यांत्रिकी की गणितीय भविष्यवाणियाँ पूर्णतः संरक्षित रहती हैं।
इस प्रकार क्वांटम फ्लूडिक एटॉमिक मॉडल को क्वांटम यांत्रिकी के विकल्प के रूप में नहीं, बल्कि उसकी व्याख्यात्मक परत का विस्तार करने वाले मॉडल के रूप में देखा जा सकता है, जो परमाणु संरचना की समझ को एक नई दिशा प्रदान करता है।
श्रेयश को मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) की ओर से भेजे गए ईमेल में उनके विचारों की सराहना की गई और इस क्षेत्र में और अधिक कार्य करने के लिए प्रेरित किया गया।
विद्यालय प्रबंधक राजेश जौली, निदेशक त्रिजित अग्रवाल और प्रधानाचार्य रणवीर सिंह रावत ने श्रेयश की इस अनुपम एवं अद्वितीय उपलब्धि के लिए प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं प्रदान कीं।
श्रेयश सौरभ जीआरएम स्कूल में कक्षा 9 का छात्र है। उसे भौतिकी विषय में विशेष रुचि है और वह इसके विभिन्न सिद्धांतों और अवधारणाओं को समझना पसंद करता है। खाली समय में वह भौतिकी से संबंधित विषयों की पढ़ता है और नए प्रयोगों व खोजों के बारे में जानने की कोशिश करता है। उसे शोध करना अच्छा लगता है, खासकर किसी समस्या के पीछे के कारणों को समझना। वह प्रश्न पूछकर और स्वयं अध्ययन करके चीज़ों को बेहतर ढंग से सीखने का प्रयास करता है। भौतिकी के माध्यम से वह प्रकृति को समझना चाहता है और इस क्षेत्र में आगे और अधिक सीखने की इच्छा रखता है।













































































