बरेली। भारतीय सद्भावना मंच की संयोजिका माँ साध्वी कल्पना ने कश्मीर में वर्षों से बंद पड़े प्राचीन मंदिरों के ताले खुलवाकर उनके पुनर्जीवन का ऐतिहासिक कार्य किया है। इस अभियान के अंतर्गत मंदिरों की साफ-सफाई, रंगाई-पुताई और सौंदर्यीकरण कराया गया। माँ साध्वी कल्पना ने बताया कि कश्मीर दौरे के दौरान स्थानीय मुस्लिम समाज ने उन्हें कई ऐसे प्राचीन मंदिर दिखाए, जो लंबे समय से बंद थे। मंच के प्रयासों से इन मंदिरों को पुनः खोला गया। उन्होंने बताया कि इस पूरे अभियान में स्थानीय मुस्लिम समुदाय का सहयोग सराहनीय रहा, जिससे आपसी भाईचारे और सद्भाव का संदेश मजबूत हुआ। इस अवसर पर समाजसेवी नदीम शम्सी ने कहा कि पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के कारण कश्मीरी पंडितों को अतीत में भारी जान-माल की क्षति उठानी पड़ी, लेकिन वर्तमान में कश्मीर के हालात में सकारात्मक बदलाव आया है। उन्होंने सरकार से मांग की कि कश्मीरी पंडितों को सम्मान के साथ उनके परिवारों सहित पुनः बसाया जाए तथा जिन ब्राह्मण परिवारों को आर्थिक नुकसान हुआ है, उन्हें उचित मुआवज़ा और अधिकतम सहायता दी जाए। कश्मीर से साहसिक सद्भावना अभियान पूर्ण कर बरेली पहुंचने पर माँ साध्वी कल्पना का राधा कृष्ण शक्तिपीठ मंदिर में पगड़ी, शॉल और फूलों से भव्य स्वागत किया गया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सनातन संस्कृति और राष्ट्रीय एकता को लेकर किए जा रहे प्रयासों का सकारात्मक प्रभाव कश्मीर में भी स्पष्ट दिखाई दे रहा है। स्वागत करने वालों में समाजसेवी नदीम शम्सी, पुजारी पंडित कपिल बिहारी महाराज, रुचि पंडित, महेश पंडित, ममता वर्मा, सारिका, नावेद खान, रजत अग्रवाल, जुबैर शम्सी, मयंक पंडित, ममता पंडित सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।