आंवला संसदीय क्षेत्र में सिर्फ कागजों पर ही चल रहा प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम
बरेली। आंवला लोकसभा से समाजवादी पार्टी के सांसद नीरज मौर्य द्वारा लोकसभा में पूछे गए प्रश्न से जमीनी हकीकत सामने आई है। सांसद ने आंवला संसदीय क्षेत्र में प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) में सूक्ष्म उद्यमों को दिए गए ऋण, सब्सिडी और लाभार्थियों की स्थिति पर सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी थी।सरकार की ओर से दिए गए लिखित उत्तर में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विभाग के राज्य मंत्री शोभा करांदलाजे ने स्वीकार किया गया कि बीते दो वर्षों में आंवला क्षेत्र में पीएमईजीपी के तहत न तो कोई सब्सिडी जारी की गई और न ही कोई ऋण स्वीकृत हुआ। वर्ष 2022-23 में मात्र 6.04 लाख रुपये की सब्सिडी और 17.76 लाख रुपये का ऋण दिखाया गया, जबकि 2023-24 और 2024-25 में आंवला के खाते पूरी तरह शून्य रहे। यह खुलासा उस क्षेत्र में बेरोजगारी और छोटे कारोबारियों की बदहाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। इतना ही नहीं, आवेदन और स्वीकृति के बीच भारी अंतर भी सामने आया है। आंवला संसदीय क्षेत्र में 26 आवेदनों में से सिर्फ 2 को स्वीकृति दी गई।सांसद नीरज मौर्य ने यह भी पूछा था कि क्या युवाओं, महिलाओं और पिछड़े वर्गों को योजना का लाभ पाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। सरकार ने माना कि बैंक स्तर पर ऋण स्वीकृति, दस्तावेजी जटिलता और प्रक्रिया की धीमी गति बड़ी बाधा बनी हुई है। आंवला जैसे क्षेत्रों में शून्य प्रगति पर सरकार ने कोई ठोस स्पष्टीकरण नहीं दिया गया।आंवला सांसद नीरज मौर्य का कहना है कि क्षेत्र के युवाओं और छोटे उद्यमियों को योजना से वंचित रखा जाना सरकार की नीतिगत विफलता को उजागर करता है।मैं जनता से जुड़े हर सवाल पर सरकार को जवाबदेह बनाने के लिए प्रतिबद्ध हूं। जरूरत है कि सरकार आंकड़ों से आगे बढ़कर प्रभावित क्षेत्रों में ठोस हस्तक्षेप करे, ताकि रोजगार सृजन की योजनाएं वास्तव में जरूरतमंदों तक पहुंच सकें।













































































