जाति जनगणना के सवालों पर कांग्रेस का हमला, मोदी सरकार की नीयत पर उठाए गंभीर सवाल
नई दिल्ली। कांग्रेस ने जाति जनगणना को लेकर मोदी सरकार को घेरते हुए कहा है कि जनगणना 2027 के पहले चरण में मकानों की सूची तैयार करने के लिए बनाए गए सवाल सरकार की असली मंशा पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि जनगणना का काम पहले ही काफी देरी से चल रहा है और अब जो प्रक्रिया तय की जा रही है, वह निष्पक्ष जाति जनगणना के अनुरूप नहीं दिखती। उन्होंने मांग की कि जाति जनगणना की प्रक्रिया तय करने से पहले सरकार को सभी राजनीतिक दलों, राज्यों और सामाजिक संगठनों के साथ व्यापक बातचीत करनी चाहिए। जयराम रमेश ने कहा कि मोदी सरकार ने पहले जाति जनगणना का विरोध किया था और प्रधानमंत्री ने इसे शहरी नक्सली सोच तक बताया था, लेकिन कांग्रेस और राहुल गांधी के दबाव में सरकार को यू-टर्न लेना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि अब सरकार जनगणना के फॉर्म के जरिए इस प्रक्रिया को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। रमेश ने कहा कि मकानों की सूची के फॉर्म में घर के मुखिया की जाति के लिए केवल अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य का विकल्प दिया गया है, जबकि ओबीसी और सामान्य वर्ग का स्पष्ट उल्लेख नहीं है, जो सरकार की नीयत पर सवाल खड़े करता है। कांग्रेस नेता ने तेलंगाना सरकार के 2025 के सर्वे का हवाला देते हुए कहा कि वहां शिक्षा, रोजगार और आय से जुड़ी जाति-वार जानकारी जुटाई गई, जो सामाजिक न्याय के लिए जरूरी है, और केंद्र सरकार को भी इसी मॉडल से सीख लेनी चाहिए। कांग्रेस ने बताया कि जनगणना 2027 का पहला चरण अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच होगा और दूसरा चरण फरवरी 2027 में प्रस्तावित है, जबकि बर्फीले इलाकों में यह प्रक्रिया पहले पूरी की जाएगी। इस पूरी कवायद पर करीब 11,718 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है, लेकिन कांग्रेस का कहना है कि इतनी बड़ी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सबसे अहम है, जिस पर सरकार फिलहाल खरी नहीं उतर रही है।













































































