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मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के ध्वस्तीकरण आदेश पर पुनर्विचार आवश्यक: कलीमुल हफीज

July 28, 2026By admin0 comments
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सहसवान। अल-हफीज़ एजुकेशनल एकेडमी के चेयरमैन एवं वरिष्ठ शिक्षाविद कलीमुल हफीज ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा रामपुर स्थित मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के 40 में से 38 भवनों के ध्वस्तीकरण आदेश पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षा संस्थान किसी भी समाज और राष्ट्र की सबसे मूल्यवान धरोहर होते हैं। यदि किसी संस्थान में प्रशासनिक, तकनीकी या मानचित्र संबंधी कोई कमी है, तो उसका समाधान कानून और संवाद के माध्यम से किया जाना चाहिए। ऐसे मामलों में शिक्षा व्यवस्था और विद्यार्थियों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए।उन्होंने कहा कि एक विश्वविद्यालय केवल ईंट-पत्थरों से बनी इमारत नहीं होता, बल्कि वह हजारों विद्यार्थियों के सपनों, उनके भविष्य, शिक्षकों की वर्षों की मेहनत और समाज के बौद्धिक विकास का केंद्र होता है। किसी भी शैक्षणिक संस्थान पर लिया गया निर्णय प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से विद्यार्थियों, शोध कार्यों और समाज के भविष्य को प्रभावित करता है। इसलिए ऐसे मामलों में संतुलित और दूरदर्शी दृष्टिकोण अपनाना समय की आवश्यकता है।कलीमुल हफीज ने कहा कि भारत जैसे विशाल लोकतांत्रिक देश में शिक्षा का विस्तार ही सामाजिक और आर्थिक प्रगति का सबसे प्रभावी माध्यम है। देश को अधिक से अधिक विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों की आवश्यकता है, ताकि हर वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो सके। शिक्षा संस्थानों का संरक्षण और विकास राष्ट्र निर्माण की दिशा में सबसे बड़ा निवेश है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी भवन के निर्माण में नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो संबंधित प्रावधानों के अंतर्गत उसका समाधान निकाला जाना चाहिए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि विद्यार्थियों की पढ़ाई, परीक्षाएं और उनका भविष्य किसी प्रकार से प्रभावित न हो। शिक्षा से जुड़े मामलों में ऐसा समाधान खोजा जाना चाहिए जो कानून का सम्मान भी करे और विद्यार्थियों के हितों की रक्षा भी करे।
अंत में कलीमुल हफीज ने राज्य सरकार से अपील की कि इस विषय पर सभी संबंधित पक्षों के साथ संवाद स्थापित कर ऐसा निर्णय लिया जाए, जिससे कानून का पालन भी सुनिश्चित हो और शिक्षा व्यवस्था को किसी प्रकार की क्षति भी न पहुंचे। उन्होंने कहा कि मजबूत शैक्षणिक संस्थान ही एक शिक्षित, जागरूक और विकसित भारत की आधारशिला हैं।

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