आशा कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल, उपमुख्यमंत्री के बयान से भड़की, आक्रोश
बरेली। विगत 15 दिसंबर से उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन के आह्वान पर प्रदेश की आशा एवं आशा संगिनी कर्मी अपनी वर्षों से लंबित मांगों को लेकर जिला अध्यक्ष शिववती साहू के नेतृत्व में आशाओं ने सेठ दामोदर स्वरूप पार्क में इक्ट्ठी होकर धरना प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन मंडल आयुक्त को दिया । अध्यक्ष शिववती साहू ने कहा अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। आशा कर्मियों का कहना है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, उसकी नौकरशाही और सरकार द्वारा लगातार अनदेखी किए जाने के कारण उन्हें यह कदम उठाना पड़ा है। 23 दिसंबर को शासन द्वारा मांगों पर विचार करने और शीघ्र वार्ता बुलाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। उल्टे आशा कर्मियों को डराने, धमकाने, वेतन रोकने, अपमानित करने और उत्पीड़ित करने की शिकायतें सामने आ रही हैं। कई स्थानों पर पुरुष अधिकारियों द्वारा महिला आशा कर्मियों के साथ अमर्यादित व्यवहार किए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं।
इसी बीच प्रदेश के उपमुख्यमंत्री द्वारा की गई एक आपत्तिजनक टिप्पणी से आशा कर्मियों में भारी आक्रोश है। उनके बयान को लेकर प्रदेश की कामकाजी महिलाओं में भी नाराजगी व्याप्त है। आशा कर्मियों ने सरकार पर नकारात्मक रवैया अपनाने का आरोप लगाया है।
हड़ताली आशा कर्मियों ने अपनी प्रमुख मांगों में उन्हें मानद स्वयंसेवक की बजाय सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने, न्यूनतम वेतन लागू करने, ईपीएफ-ईएसआई, ग्रेच्युटी, स्वास्थ्य व जीवन बीमा, लंबित प्रोत्साहन राशि के भुगतान, बेहतर कार्य दशा, यात्रा भत्ता, मोबाइल व इंटरनेट सुविधा, आयुष्मान व आभा कार्ड निर्माण की बकाया राशि का भुगतान, मृतक आशा कर्मियों के परिजनों को मुआवजा, झूठे मुकदमों की वापसी, अवैध वसूली पर रोक और लैंगिक उत्पीड़न से सुरक्षा की मांग शामिल हैं।
आशा कर्मियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने शीघ्र वार्ता कर उनकी मांगों का समाधान नहीं किया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। धरना के दौरान चम्पा गंगवार , जयश्री गंगवार , कमलेश , मंजू , सावित्री आदि मौजूद रही।













































































