यमुना एक्सप्रेस-वे हादसा: मां के इंतजार में रोज पूछते हैं बच्चे, जांच में फिर मिले जले हुए मानव अवशेष

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मथुरा। यमुना एक्सप्रेस-वे पर हुए भीषण सड़क हादसे में आग की लपटों में घिरी पार्वती को देखने वाले उसके बेटे-बेटी आज भी मां के लौटने का इंतजार कर रहे हैं। मासूम बच्चे रोज अपने पिता से पूछते हैं कि मां कब आएगी। पिता गोविंद उन्हें झूठा दिलासा देते हैं कि मां को मथुरा से जल्दी लेकर आएंगे, लेकिन हर बार मथुरा से खाली हाथ लौटने पर बच्चों का दर्द और गहरा हो जाता है।

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हादसे में हमीरपुर के राठ निवासी गोविंद की पत्नी पार्वती डबल डेकर बस में सवार थीं। बस में आग लगने के दौरान पार्वती ने अपनी 12 वर्षीय बेटी प्राची और आठ वर्षीय बेटे सनी को किसी तरह बाहर धकेल दिया, लेकिन खुद आग की लपटों में घिर गईं। घटना के बाद से गोविंद लगातार मथुरा के चक्कर काट रहे हैं। उनका कहना है कि इलाज, जांच और भागदौड़ में हजारों रुपये का कर्ज हो चुका है। बच्चे रोज मां को याद कर रोते हैं। बेटा सनी अक्सर सोते से पिता को जगा देता है और कहता है कि मां को लेकर आओ। बेटी प्राची किसी तरह छोटे भाई को संभालती है।

हादसे की जांच कर रही पांच सदस्यीय कमेटी की निगरानी में फोरेंसिक टीम ने दोबारा घटनास्थल माइल स्टोन 127 पर पहुंचकर जली हुई दो बसों के मलबे से कुछ मानव अवशेष एकत्र किए हैं। इन अवशेषों को डीएनए जांच के लिए फोरेंसिक लैब, आगरा भेजा जाएगा। इससे पहले घटनास्थल से मिले अवशेषों का डीएनए पार्वती के परिवार से मैच नहीं हो सका था। इसी तरह बाड़ी, धौलपुर निवासी बस कंडक्टर गोलू का डीएनए भी अब तक मैच नहीं हुआ है।

दूसरी ओर, इस हादसे में मृत ऋतिक यादव के परिजन डीएनए रिपोर्ट से पुष्टि होने के बावजूद शव के अवशेष लेने नहीं पहुंचे हैं। परिजनों को अब भी यकीन नहीं हो रहा है कि उनका बेटा इस दुनिया में नहीं रहा। पुलिस द्वारा कई बार संपर्क किए जाने के बाद भी उन्होंने शव लेने से इनकार कर दिया है। अब पुलिस ने अंतिम नोटिस जारी कर शव का अंतिम संस्कार कराने की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी कर ली है।

एसएसपी श्लोक कुमार ने बताया कि यदि आगरा फोरेंसिक लैब की रिपोर्ट से भी शिनाख्त नहीं हो पाती है तो जरूरत पड़ने पर अवशेषों को हैदराबाद की फोरेंसिक लैब भेजा जाएगा, ताकि पार्वती और गोलू की पहचान किसी भी तरह से सुनिश्चित की जा सके।

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