अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम का दावा, भारत रूसी तेल की खरीद घटा रहा, टैरिफ कम कराने की अपील की गई

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वॉशिंगटन। अमेरिका के रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने टैरिफ प्रकरण को लेकर भारत के बारे में बड़ा दावा किया है। ग्राहम के अनुसार, भारत के अमेरिकी राजदूत विनय कुमार क्वात्रा ने उनसे कहा है कि भारत रूस से कच्चे तेल की खरीद कम कर रहा है और इसी के मद्देनजर वे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से टैरिफ घटाने के लिए बात करें। ग्राहम रविवार को एयर फोर्स वन में राष्ट्रपति ट्रंप के साथ मौजूद थे।

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ग्राहम ने कहा कि अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया है। इसी दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी कहा कि जो देश रूस से कच्चा तेल खरीद रहे हैं, उन पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जा सकता है। ट्रंप का कहना था कि रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के तेल खरीदारों पर दबाव बनाना जरूरी हो गया है। उन्होंने कहा कि रूस पर लगाए गए प्रतिबंध उसे गंभीर आर्थिक नुकसान पहुंचा रहे हैं।

लिंडसे ग्राहम ने दावा किया कि करीब एक महीने पहले वह भारतीय राजदूत के आवास पर गए थे, जहां उन्होंने यह जानने की कोशिश की कि भारत रूस से तेल कैसे और कितनी मात्रा में खरीद रहा है। ग्राहम के अनुसार, इस दौरान भारतीय राजदूत ने उनसे कहा था कि क्या वे राष्ट्रपति ट्रंप से टैरिफ में ढील देने की बात कर सकते हैं। ग्राहम ने यह भी कहा कि ट्रंप प्रशासन द्वारा भारत पर की गई सख्ती ही मुख्य कारण है, जिसकी वजह से भारत ने रूसी तेल की खरीद में कमी की है। उल्लेखनीय है कि पिछले महीने विनय कुमार क्वात्रा ने ‘इंडिया हाउस’ में ग्राहम और अन्य अमेरिकी सीनेटरों की मेजबानी की थी, जहां ऊर्जा और रक्षा सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई थी। हालांकि ग्राहम के इन दावों पर भारतीय अधिकारियों की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

इस बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ किया है कि रूस-यूक्रेन संघर्ष को खत्म करने के लिए पुतिन के ग्राहकों पर दबाव डालना जरूरी है। ट्रंप ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह पता था कि वह भारत द्वारा रूसी तेल खरीदने से खुश नहीं थे। उन्होंने चेतावनी दी कि वाशिंगटन टैरिफ को बहुत तेजी से बढ़ा सकता है, जो भारत के लिए नुकसानदेह होगा। ट्रंप ने यह भी कहा कि भारत पर कुल 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया है, जो दुनिया में सबसे अधिक है, इसमें रूसी तेल की खरीद पर लगाया गया 25 प्रतिशत शुल्क भी शामिल है। हालांकि ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी को ‘बहुत अच्छा इंसान’ बताते हुए कहा कि भारत ने उन्हें संतुष्ट करने के लिए कुछ कदम उठाए हैं।

रूसी तेल खरीद के आंकड़े भी यह संकेत देते हैं कि भारत का आयात घट रहा है। रियल-टाइम डेटा एनालिटिक्स कंपनी केपलर के अनुसार दिसंबर में भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात घटकर करीब 1.2 मिलियन बैरल प्रतिदिन रहने की संभावना है, जबकि नवंबर में यह 1.84 मिलियन बैरल प्रतिदिन था। यह दिसंबर 2022 के बाद का सबसे निचला स्तर बताया जा रहा है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है और अपनी जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। यूक्रेन युद्ध से पहले 2021 तक भारत के कुल आयात में रूसी तेल की हिस्सेदारी महज 0.2 प्रतिशत थी, जो पश्चिमी प्रतिबंधों और भारी छूट के चलते करीब 40 प्रतिशत तक पहुंच गई थी। ताजा आंकड़ों के मुताबिक अब यह हिस्सेदारी एक तिहाई से घटकर एक चौथाई से भी कम रह गई है।

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