दिल्ली–‘फांसी घर’ विवाद पर आमने-सामने केजरीवाल और भाजपा, सार्वजनिक सुनवाई की मांग पर सियासी तकरार
दिल्ली। Arvind Kejriwal और Bharatiya Janata Party के बीच पुराने सचिवालय के कथित ‘फांसी घर’ को लेकर सियासी विवाद गहराता जा रहा है। दिल्ली विधानसभा की विशेष समिति के सामने पेशी को लेकर केजरीवाल ने सुनवाई को सार्वजनिक करने की मांग की है, जबकि भाजपा ने इसे अव्यावहारिक बताते हुए खारिज कर दिया है।
दरअसल, मुख्यमंत्री रहते हुए अरविंद केजरीवाल ने दावा किया था कि पुराने सचिवालय का एक कक्ष अंग्रेजों के शासनकाल में फांसी घर हुआ करता था। आम आदमी पार्टी की सरकार के दौरान इस विषय को लेकर कई कार्यक्रम भी आयोजित किए गए थे। उस समय भाजपा ने इस दावे को ‘राजनीतिक नाटक’ बताया था। अब सत्ता में आने के बाद भाजपा का कहना है कि जांच में पिछली सरकार का दावा तथ्यों से परे पाया गया है। इसी मामले में केजरीवाल को दिल्ली विधानसभा की विशेष समिति के सामने पेश होने के लिए कहा गया है।
केजरीवाल ने एक बार फिर कहा है कि संबंधित कक्ष फांसी घर ही था और भाजपा राजनीतिक कारणों से इस तथ्य से इनकार कर रही है। उन्होंने समिति के सामने अपनी पेशी की कार्यवाही को सार्वजनिक करने की मांग करते हुए आरोप लगाया कि सरकार दिल्ली में कोई ठोस काम नहीं कर रही है।
उधर Virendra Sachdeva ने केजरीवाल पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने अपनी राजनीति की शुरुआत से ही झूठ और बयानबाजी की राजनीति की है और आज भी वही कर रहे हैं। सचदेवा ने कहा कि विशेषाधिकार समिति की सुनवाई को सार्वजनिक रूप से प्रसारित नहीं किया जा सकता और इस तरह की मांग करना अराजक राजनीति का उदाहरण है।
उन्होंने आरोप लगाया कि केजरीवाल लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने के लिए तर्कहीन बयान दे रहे हैं और अब तक समिति के सामने ऐसा कोई तथ्य प्रस्तुत नहीं कर पाए हैं जिससे यह साबित हो सके कि संबंधित कक्ष वास्तव में फांसी घर था। भाजपा का कहना है कि सत्ता में रहते हुए भी केजरीवाल का रवैया अराजक था और विपक्ष में आने के बाद भी वही जारी है।













































































