प्रदेश में सुदृढ़ हुईं कृषि योजनाओं से किसानों का बढ़ा आर्थिक आधार

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बदायूँ । प्रदेश में किसानों को सभी प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध कराने हेतु प्रदेश सरकार कृत संकल्पित है। प्रदेश सरकार का मानना है कि हमारा अन्नदाता किसान समृद्ध होगा, तो प्रदेश समृद्ध बनेगा। प्रदेश समृद्ध होगा तो देश भी समृद्ध होगा। यहां के किसानों को विगत 08 वर्षा से एम0एस0पी0 का लाभ लगातार प्राप्त हो रहा है। आज किसान या खेती करने वाला व्यक्ति ही अपनी उपज को क्रय केन्द्र में बेच सकता है। कोई भी बिचौलिया किसानों की मेहनत का लाभ नहीं उठा सकता। प्रदेश में किसानों को स्वॉयल हेल्थ कार्ड और फसल बीमा की सुविधा भी प्रदान की जा रही है। गन्ना मूल्य का भुगतान ऐतिहासिक उपलब्धि प्राप्त कर चुका है। कृषि मण्डियों और गांवों तक सड़क नेटवर्क का विस्तार, वैल्यू चेन स्टोरेज प्रोसेसिंग के क्षेत्र में निवेश को आगे बढ़ाने, किसानों को बाजार और निर्यात से जोड़ने का प्रयास, प्रत्येक खेत को सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराते हुए नहरों, पाइप लाइन, माइक्रो इरीगेशन और सोलर पम्प का विस्तार, जल संरक्षण अभियान, ड्रोन डोजिंग, सौर ऊर्जा, एफ0पी0ओ0, स्टार्टअप्स आधारित फसल और मूल्य संवर्धन आदि से सम्बन्धित योजनाएं प्रदेश में दिखाई दे रही हैं। जिसका भरपूर लाभ सीधे किसानों को मिल रहा है।
कृषि हित में प्रदेश में खरपतवार नियंत्रण, स्वॉयल टेस्टिंग तथा प्राकृतिक खेती पर विशेष फोकस किया गया है। किसानों को कृषि क्षेत्र में उद्यमिता के लिए प्रेरित किया जा रहा है। प्रदेश में फ़ूड प्रोसेसिंग, कोल्ड स्टोरेज, लॉजिस्टिक्स, डिजिटल मण्डी आदि में युवाओं को रोजगार के अनेक अवसर उपलब्ध कराये गये हैं। एक्सप्रेस-वे और लॉजिस्टिक्स पार्क से किसानों की उपज को राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में पहुंचाने की सुविधा प्राप्त हुई है।
प्रदेश में विश्व बैंक के सहयोग से ‘यू0पी0 एग्रीकल्चर ग्रोथ एण्ड रूलर इंटरप्राइजेज इकोसिस्टम स्ट्रेंथनिंग प्रोजेक्ट’ अर्थात यू0पी0 एग्रीज परियोजना प्रारम्भ हो चुकी है। प्रदेश के कम कृषि ग्रोथ वाले 28 जनपदों को 4,000 करोड़ रुपये की लागत से 06 वर्षों की अवधि के लिए परियोजना के अन्तर्गत जोड़ा गया है। इनमें पूर्वी उत्तर प्रदेश और बुन्देलखण्ड के जनपद सम्मिलित हैं। बुन्देलखण्ड के जनपद पहले जल के अभाव से ग्रसित थे, आज वहां पर पर्याप्त मात्रा में जल संसाधन उपलब्ध कराये जा चुके हैं।
प्रदेश में किसानों को तकनीक से जोड़ने का कार्य भी प्रगति पर है। ओ0डी0ओ0पी0 योजना, एस0एच0जी0, बी0सी0 सखी, ड्रोन दीदियां गांव-गांव तक रोजगार और स्थानीय उद्यम के सशक्त माध्यम बने हैं। प्रदेश के 09 क्लाइमेटिक जोन के अनुरूप तकनीक तथा बीज आदि किसानों को उपलब्ध कराने के लिए कार्य लगातार आगे बढ़ रहा है। आज किसानों को विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ डी0बी0टी0 के माध्यम से पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराया जा रहा है। बिचौलिया मुक्त खाद्यान्न खरीद की व्यवस्था की गयी है।
प्रदेश में 122 चीनी मिलों का संचालन हो रहा है। एथेनॉल उत्पादन 41 करोड़ लीटर से बढ़कर 182 करोड़ लीटर हो गया है, जो देश में प्रथम स्थान पर है। राज्य में आलू, केला, औद्यानिक तथा अन्य ऑर्गेनिक फसलों के उत्पादन में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। फल और सब्जियों के उत्पादन में भी प्रदेश अब देश में नम्बर एक पर है। प्रदेश में गन्ना किसानों के लिए गन्ने का एस0ए0पी0 400 रुपये प्रति कुन्तल तय किया गया है। किसान इसका लाभ प्राप्त कर रहा है। प्रदेश के किसान प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का सर्वाधिक लाभ प्राप्त कर रहे हैं। 02 करोड़ 86 लाख किसान इस योजना से जुड़े हैं। किसान को समय पर उन्नत नस्ल के बीज उपलब्ध कराने के लिए भारत रत्न चौधरी चरण सिंह जी के नाम पर लखनऊ में एक सीड पार्क का निर्माण कार्य आगे बढ़ाया जा रहा है। प्रदेश में 79 कृषि विज्ञान केन्द्र सक्रिय हैं। शेष 10 कृषि विज्ञान केन्द्रों पर तेजी से कार्य किया जा रहा है। इन केंद्रों में किसानों को आधुनिक तकनीक और फसल को देखने के लिए डेमोंस्ट्रेशन की सुविधा प्राप्त हो रही है। इनमें कई कृषि विज्ञान केन्द्र ‘सेन्टर ऑफ एक्सीलेंस’ के रूप में कार्य कर रहे हैं।

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