टेस्ट क्रिकेट में गौतम गंभीर की भूमिका पर उठे सवाल, बीसीसीआई में मंथन तेज
नई दिल्ली । भारतीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर का सीमित ओवरों के क्रिकेट में रिकॉर्ड अच्छा रहा है और उनके नेतृत्व में टीम ने एक आईसीसी और एक एसीसी ट्रॉफी जीती है। हालांकि, सेना देशों के खिलाफ 10 टेस्ट मैच गंवाने के बाद लाल गेंद के क्रिकेट में कोच के तौर पर उनकी कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। न्यूज एजेंसी पीटीआई के अनुसार, दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ दो मैचों की टेस्ट सीरीज में हार के बाद बीसीसीआई के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने अनौपचारिक तौर पर वीवीएस लक्ष्मण से बातचीत कर यह जानने की कोशिश की थी कि क्या वह लाल गेंद की टीम का कोच बनने में रुचि रखते हैं।
माना जा रहा है कि पूर्व भारतीय बल्लेबाज वीवीएस लक्ष्मण बेंगलुरू स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में हेड ऑफ क्रिकेट की अपनी मौजूदा भूमिका से संतुष्ट हैं। वहीं, गंभीर का बीसीसीआई के साथ अनुबंध 2027 वनडे विश्व कप तक है, लेकिन टी20 विश्व कप में टीम के प्रदर्शन के आधार पर इस पर पुनर्विचार की संभावना जताई जा रही है। टी20 विश्व कप की शुरुआत करीब पांच सप्ताह बाद होनी है।
बीसीसीआई के भीतर इस बात को लेकर चर्चा जारी है कि क्या गंभीर विश्व टेस्ट चैंपियनशिप 2025-27 चक्र के शेष नौ टेस्ट मैचों के लिए लाल गेंद की टीम का नेतृत्व करने के लिए उपयुक्त हैं। भारत ने हाल ही में इंग्लैंड के खिलाफ पांच मैचों की टेस्ट सीरीज 2-2 से ड्रॉ खेली थी। इसके बाद 2026 में श्रीलंका के खिलाफ दो टेस्ट और अक्तूबर में न्यूजीलैंड का दौरा प्रस्तावित है, जबकि जनवरी-फरवरी 2027 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ घरेलू मैदान पर पांच मैचों की टेस्ट सीरीज खेली जानी है।
पीटीआई के हवाले से बीसीसीआई के एक सूत्र ने बताया कि गंभीर को बोर्ड के भीतर मजबूत समर्थन प्राप्त है। अगर भारत टी20 विश्व कप का खिताब बरकरार रखता है या कम से कम फाइनल तक पहुंचता है तो गंभीर बिना किसी रुकावट के अपने पद पर बने रह सकते हैं। हालांकि, यह देखना दिलचस्प होगा कि टेस्ट क्रिकेट में उनकी भूमिका को लेकर क्या फैसला लिया जाता है। लाल गेंद के प्रारूप में विकल्प सीमित हैं, क्योंकि वीवीएस लक्ष्मण सीनियर टेस्ट टीम को कोचिंग देने के इच्छुक नहीं माने जा रहे हैं।
इधर, भारतीय ड्रेसिंग रूम में भी हालात पूरी तरह सहज नहीं बताए जा रहे हैं। कुछ खिलाड़ी गंभीर के कार्यकाल में खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। राहुल द्रविड़ के दौर में खिलाड़ियों को खुद को साबित करने के लिए अधिक समय मिलता था, जबकि शुभमन गिल को टी20 विश्व कप टीम से बाहर किए जाने में गंभीर की भूमिका को अहम माना जा रहा है। इससे कई खिलाड़ियों में यह भावना पैदा हुई है कि अगर एक स्थापित खिलाड़ी को बाहर किया जा सकता है तो अगला नंबर किसी का भी हो सकता है।
बीसीसीआई आमतौर पर नीतिगत फैसले लेने में समय लेता है। कैलेंडर पर नजर डालें तो टी20 विश्व कप के बाद दो महीने तक आईपीएल भी होना है, ऐसे में किसी बड़े फैसले को लेकर फिलहाल इंतजार किया जा सकता है।













































































