शाहजहांपुर। स्वामी शुकदेवानंद कालेज के संगीत विभाग की ओर से “भारतीय संगीत के विविध रूप” विषय पर एक भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन व पुष्पांजलि से हुआ। प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने भारतीय संगीत को केवल मनोरंजन का साधन नहीं माना, बल्कि संगीत को संस्कृति, परंपरा और आध्यात्मिक चेतना की सजीव अभिव्यक्ति बताया। प्रतियोगिता में प्रथम स्थान हासिल करने वाली छात्रा मान्या पाण्डेय ने कहा कि भारतीय संगीत हमारी संस्कृति, परंपरा और आध्यात्मिक चेतना की सजीव अभिव्यक्ति है। सामवेद को भारतीय संगीत का आधार माना गया है , जहाँ स्वर और लय के माध्यम से भावों की अभिव्यक्ति की गई। द्वितीय स्थान पर रही छात्रा काजल मिश्रा का मानना था कि भारतीय शास्त्रीय संगीत दो प्रमुख धाराओं में विभाजित है हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत, जो उत्तर भारत में विकसित हुआ और कर्नाटक शास्त्रीय संगीत, जो दक्षिण भारत की समृद्ध परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है। तृतीय स्थान हासिल करने वाली छात्रा काजल मिश्रा द्वितीय ने कहा कि उप-शास्त्रीय संगीत भी भारतीय संगीत का एक महत्वपूर्ण रूप है। ठुमरी, दादरा, कजरी, चैती जैसी शैलियाँ इसमें शामिल हैं। प्रतियोगिता में निर्णायक की भूमिका वरिष्ठ पत्रकार सुयश सिन्हा, कालेज की राजनीति विज्ञान की असिस्टेंट प्रोफेसर व्याख्या सक्सेना, जवाहर नवोदय विद्यालय कासगंज की संगीत शिक्षिका सुकन्या तिवारी ने निभाई।विषय स्थापना और संचालन संगीत विभाग की विभागाध्यक्ष डा. कविता भटनागर ने किया। धर्मवीर सिंह के नेतृत्व में छात्राओं ने सरस्वती वंदना और राष्ट्रगान प्रस्तुत किया। प्रतियोगिता में तनिष्का गुप्ता, कपिल सिंह, पूजा वर्मा, उर्मिला देवी, नैन्सी पाल ने भी संबंधित विषय पर अपने विचार व्यक्त किये।