अलापुर नगर पंचायत की अध्यक्ष, उनके पति और लिपिक पर रिपोर्ट दर्ज, ई-निविदा में किया फर्जीवाड़ा

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बदायूं। नगर पंचायत अलापुर में विकास कार्यों से जुड़ी ई-निविदा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का गंभीर मामला सामने आया है। फर्जी दस्तावेजों और कूटरचित हस्ताक्षरों के जरिए ई-टेंडर आमंत्रित किए जाने के आरोप में नगर पंचायत की अध्यक्ष हुमा बी, उनके पति फहीमउद्दीन तथा लिपिक गार्गी गुप्ता के खिलाफ धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की गई है। यह रिपोर्ट नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी (ईओ) त्रिवेंद्र कुमार की ओर से दर्ज कराई गई है, जिसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
ईओ त्रिवेंद्र कुमार के अनुसार नगर पंचायत अलापुर में 14वें और 15वें वित्त आयोग की धनराशि से कराए जाने वाले विकास कार्यों के लिए शासनादेशों के अनुरूप ई-निविदा आमंत्रित की जानी थी। आरोप है कि चार दिसंबर को अध्यक्ष, उनके पति और लिपिक ने आपसी मिलीभगत से नियमों और वैधानिक प्रक्रियाओं को दरकिनार करते हुए निविदाओं की तिथियां तय कर दीं। इन निविदाओं को 15 दिसंबर से 20 दिसंबर के बीच ऑनलाइन आमंत्रित दिखाया गया, जबकि इसके लिए न तो सक्षम अधिकारी की अनुमति ली गई और न ही निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन किया गया। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि कंप्यूटर के माध्यम से दस्तावेजों को स्कैन कर फर्जी हस्ताक्षर किए गए तथा कूटरचित कागजात तैयार कर ई-निविदा प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया गया। इस कथित कार्रवाई से न केवल वित्तीय नियमों का उल्लंघन हुआ, बल्कि नगर पंचायत की प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं। बताया जा रहा है कि इस पूरे घटनाक्रम के कारण विकास कार्यों की समय-सीमा और पारदर्शिता दोनों प्रभावित हुई हैं। मामले की जानकारी मिलते ही अधिशासी अधिकारी ने इसे गंभीर वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितता मानते हुए संबंधित थाने में तहरीर दी। पुलिस ने तहरीर के आधार पर धोखाधड़ी, कूटरचना और अन्य सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले की विवेचना निष्पक्ष ढंग से की जाएगी और किसी भी स्तर पर दोष पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जांच के दौरान ई-निविदा से जुड़े सभी दस्तावेज, कंप्यूटर रिकॉर्ड, लॉग फाइलें और संबंधित कार्यालयी फाइलों की गहन पड़ताल की जा रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि ई-टेंडर प्रक्रिया में किन-किन स्तरों पर नियमों का उल्लंघन हुआ और क्या इसमें किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता भी रही है। तकनीकी साक्ष्यों के साथ-साथ दस्तावेजी प्रमाणों को भी संकलित किया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर इस मामले को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। लोगों का कहना है कि यदि लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं, तो यह नगर पंचायत में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं की ओर इशारा करता है। वहीं, कुछ लोगों ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, ताकि सच सामने आ सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। प्रशासन का कहना है कि जांच प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी रखी जाएगी। दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी, ताकि सरकारी धन के दुरुपयोग पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके। फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और आगे की कार्रवाई जांच निष्कर्षों के आधार पर की जाएगी।

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