उत्तर प्रदेश: बुलंदशहर जिला कारागार में बंद एडीओ पंचायत गजेंद्र की इलाज के दौरान मौत, 6 जनवरी को होनी थी अंतिम सुनवाई
यूपी के बुलंदशहर जिला कारागार में बंद किशोरी से दुष्कर्म की कोशिश, बकरी के साथ कुकर्म और पशु क्रूरता जैसे गंभीर आरोपों में निरुद्ध विचाराधीन बंदी व एडीओ पंचायत गजेंद्र (58) की गुरुवार सुबह इलाज के दौरान मौत हो गई। जेल प्रशासन के अनुसार वह लंबे समय से हृदय रोग से पीड़ित थे और अचानक सीने में दर्द उठने के बाद हालत बिगड़ गई। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है।
जेलर अशोक कुमार ने बताया कि मूल रूप से सलेमपुर थाना क्षेत्र के रसूलपुर गांव निवासी गजेंद्र जिला कारागार में बंद थे। गुरुवार सुबह उन्हें अचानक सीने में तेज दर्द की शिकायत हुई। कारागार चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार किया, लेकिन हालत गंभीर होने पर उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। जेल प्रशासन के अनुसार गजेंद्र का इलाज दिल्ली के जीबी पंत अस्पताल और मेरठ मेडिकल कॉलेज में चल रहा था। समय-समय पर उन्हें विशेषज्ञ परामर्श और इलाज के लिए इन अस्पतालों में ले जाया जाता था और वह नियमित रूप से दवाइयों का सेवन कर रहे थे।
पूरा मामला 13 अगस्त 2024 का है, जब अहमदगढ़ थाना पुलिस ने गजेंद्र को बकरी के साथ कुकर्म करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। इस मामले में उन पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 65 (2) बी, पॉक्सो एक्ट, एससी-एसटी एक्ट और पशु क्रूरता अधिनियम जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। सरकारी पद पर तैनात एडीओ पंचायत की गिरफ्तारी के बाद यह मामला जिले में काफी चर्चित रहा और विभाग की छवि पर भी सवाल उठे थे।
कानूनी प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी थी और 6 जनवरी को इस मामले की अंतिम सुनवाई होनी थी, जिसके बाद अदालत का फैसला आना था। इससे पहले ही गजेंद्र की मौत हो जाने से मामले का पटाक्षेप हो गया। मौत की सूचना मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया। पुलिस ने आवश्यक कानूनी कार्रवाई पूरी कर शव परिजनों को सौंप दिया है।













































































