दिल्ली एमसीडी उपचुनाव: प्रचार थमा, लेकिन दलों की हलचल शनिवार को भी जारी

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दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के 12 वार्डों के उपचुनाव के लिए शुक्रवार शाम प्रचार औपचारिक रूप से थम गया था, लेकिन चुनावी हलचल शनिवार को भी जारी रही। मतदान शुरू होने से कुछ घंटे पहले तक भाजपा, आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के नेता तथा उम्मीदवार जमीन पर सक्रिय रहे। प्रचार प्रतिबंध का पालन करते हुए भी दलों ने डोर-टू-डोर मीटिंग, बूथवार समीकरण और रूठे कार्यकर्ताओं को मनाने जैसे प्रयास जारी रखे, ताकि मतदाताओं पर प्रभाव बनाए रखा जा सके।

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तीनों दलों के दफ्तरों में शनिवार को असमंजस, उम्मीद और बेचैनी का माहौल दिखा। भाजपा और आम आदमी पार्टी ने जीत का भरोसा जताया, जबकि कांग्रेस ने मुकाबले वाले वार्डों में अपने संभावित प्रदर्शन को लेकर चर्चाएं कीं। सभी दलों ने ग्राउंड रिपोर्ट जुटाकर रविवार सुबह मतदान शुरू होने से पहले अंतिम रणनीति तय करने की तैयारी की।

भाजपा की ओर से प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा और वरिष्ठ पदाधिकारी सुबह से उम्मीदवारों और बूथ टीमों से जुड़े रहे। अधिकतर उम्मीदवारों ने बताया कि माहौल भाजपा के पक्ष में है। पार्टी ने विशेष तौर पर बूथ प्रबंधन और रूठे कार्यकर्ताओं को साधने पर ध्यान केंद्रित किया।

आम आदमी पार्टी ने भी पूरे दिन चुनाव प्रबंधन की समीक्षा की। वरिष्ठ नेताओं ने स्वयंसेवकों, वार्ड प्रभारी टीमों, आरडब्ल्यूए प्रतिनिधियों और स्थानीय समूहों से प्रतिक्रिया ली। पार्टी ने हर वार्ड में जीत-हार के संभावित कारणों की सूची तैयार की, जिसे मतदान से पहले बूथ स्तर की रणनीति में बदलने का निर्देश दिया गया।

कांग्रेस की ओर से प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने बैठक कर पार्टी की स्थिति का आकलन किया। नेताओं ने उन वार्डों की सूची बनाई जहां पार्टी को उम्मीद है या मुकाबला कड़ा है। हालांकि, समग्र मूल्यांकन में पार्टी को उम्मीद से अधिक सकारात्मक संकेत नहीं मिले, लेकिन कुछ वार्डों में करीबी मुकाबले की संभावना जताई गई।

तीनों दलों ने शनिवार को उन कार्यकर्ताओं को मनाने की कोशिश की जो चुनावी गतिविधियों से दूर थे। हालांकि, कई प्रयास अपेक्षा के अनुसार सफल नहीं हुए। इसके बावजूद दलों को उम्मीद है कि मतदान के समय परंपरागत वोट बैंक निर्णय बदल सकता है और उनके पक्ष में एकजुट हो सकता है।

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