6 माह में लड़खड़ाने लगा लोकेश अग्रवाल का “उद्योग व्यापार प्रतिनिधि
मंडल”,जिला अध्यक्ष बदायूँ ने खड़े किए गम्भीर सवाल,
बदायूं। उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मण्डल का नया कारनामा,जिलाकार्यकरिणी गठन को नहीं मिले आधा दर्जन व्यापारी,प्रेस विज्ञप्ति में करा दी दर्जनों व्यापारियों को सदस्या ग्रहण,संख्या बल दिखाने को गाजियाबाद के गायक कलाकार को भी किया खड़ा।प्रदेश अध्यक्ष हुए मायूस 6 माह में लड़खड़ाने लगा लोकेश अग्रवाल का “उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल”,जिला अध्यक्ष बदायूँ ने खड़े किए गम्भीर सवाल,
वर्तमान विवाद की जड़ में इसी संगठन से जुड़ा बदायूं का तथाकथित व्यापारी नेता फ़र्ज़ी पदनाम प्रदेश संयोजक के पद पर विराजमान हैं इस पद को लेकर विवाद बढ़ने संगठन के संविधान पढ़ने पर इस पद का कहीं कोई जिक्र नहीं पाया गया।इस पर जिलाध्यक्ष अरविंद गुप्ता का कहना है संविधान को पढ़ने के बाद संगठन के क्रिया कलापों में बहुत सी भिन्नताएं देखी गयी हैं जिस पर कानूनी राय लेकर संगठन में व्याप्त भ्र्ष्टाचार को व्यापारियों के सामने रखा जाएगा।और संविधान के उल्लंघन के दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही अमल में लायी जाएगी।जिलाध्यक्ष अरविंद गुप्ता ने प्रदेश के व बदायूँ के सभी व्यापारियों से अपील करते हुए कहा है कि ऐसे व्यापार संगठन व बदायूँ के इस तथाकथित चंदा चौकड़ी से सावधान रहें।समय समय पर कभी सम्मान करने के नाम पर कभी किसी आयोजन के नाम पर बिना रसीद दिए पैसा इकट्ठा करने वाले इस नेता से बचकर रहें।आज की नई गठित कमेटी को असंवेधानिक करार देते हुए अरविंद गुप्ता ने बताया कि संविधान में जिला कमेटी व नगर कमेटी हो बनाने या हटाने का अधिकार सिर्फ प्रदेश अध्यक्ष व प्रदेश महामंत्री को है ओर इसके लिये भी दोनों पदाधिकारियों को कुछ प्रक्रियाओं को अपनाने के बाद ही पद से हटाने हटाने के अधिकार दिए गए हैं ।जबकि बदायूं कमेटी को एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से एक तथाकथित प्रदेश संयोजक असंवैधानिक पद नाम से जिला कमेटी व नगर कमेटी को भंग किया गया ।संविधान में इस नाम से कोई पद की व्यवस्था तक नहीं है जबकि संविधान में प्रदेश अध्यक्ष/महामंत्री के अलावा किसी अन्य को किसी कमेटी को बनाने व हटाने का किसी को अधिकार ही नहीं है।

उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल उत्तर प्रदेश को बने हुए अभी 6 माह ही बीते हैं लेकिन इतने कम समय मे ही लड़खड़ाने लगा है।ताजा मामला बदायूँ का समाने आया है जहां पर प्रदेश अध्यक्ष ने 6 माह पूर्व गठित कमेटी को बिना किसी कारण बताये और बिना संबैधानिक प्रक्रिया का पालन किये नई जिलाकार्यकरिणी घोषित करने से विवादों को जन्म दे दिया है, प्रदेश अध्यक्ष ने अपने व्यापार मण्डल के संविधान की उड़ाई धज्जियां, बदायूँ जिला कमेटी को बिना हटाये ही बना दिया नया जिलाध्यक्ष, नवनियुक्त जिलाध्यक्ष जिलाकार्यकरिणी के गठन के समय केवल 10 व्यापारी भी इकट्ठा न कर सका।व्यापारियों की संख्या देख मायूस हुए प्रदेश अध्यक्ष।
बताते चलें कि लगभग 6 माह पूर्व प्रदेश अध्यक्ष लोकेश अग्रवाल ने बदायूँ आकर एक भव्य कार्यक्रम में बदायूँ के व्यापारियों की सलाह लेते हुए जिलाकार्यकरिणी गठित की थी जिसमें जिला कमेटी की कमान अरविंद गुप्ता को जिला महामंत्री की जिम्मेदारी प्रदीप कुमार शर्मा को सुनील गुप्ता को कोषाध्यक्ष घोषित किया गया था।जिलायुवाध्यक्ष कि जिम्मेदारी उज्ज्वल गुप्ता को दी गई थी इसी के साथ नगर अध्यक्ष बदायूँ नवनीत गुप्ता को नगर महामंत्री संजीब आहूजा सोनू को बनाया गया था।इसी क्रम में जिला सयोंजक के पद पर महेंद्र पाल सिंह को बनाया गया था। इस कार्यकारिणी का कार्यक्रम बड़े ही भव्य रूप में हुआ था जिसमें बदायूँ के प्रतिष्ठित व्यापारियों को बिना किसी चंदा लिये सम्मानित किया गया था। बताते हैं नवगठित कमेटी में विवादों के बीज व्यापारियों के सम्मान को लेकर ही पड़ गए थे जब व्यापारियों का सम्मान बिना उनसे बिना चंदा लिए ही नवनियुक्त जिलाध्यक्ष अरविंद गुप्ता ने नई मिशाल पेश की जिसका सभी सम्मानित व्यापारियों ने स्वागत किया, व्यापारियों ने उस समय कहा था कि अबतक व्यापारियों का सम्मान उनसे चंदा लेकर ही किया जाता रहा है लेकिन अरविंद गुप्ता के जिलाध्यक्ष के बनने से वास्तविक सम्मान मिला है और एक नई परिपाटी का उदय हुआ है।इस समारोह की जिले भर में प्रशंशा हुई थी।लेकिन एक तथाकथित व्यापारी नेता जिसको बदायूँ की चंदा चौकड़ी के नाम से भी जाना जाता है उसको राश नहीं आया था।
बदायूँ में आयोजित जिलाकमेटी के गठन के समय केवल 11 व्यापारिओं की संख्या जिले में चर्चा का बिषय बनी हुई है। एक व्यापारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उक्त व्यापारी नेता ने बीसियों फोन करके इज्जत रखने की अपील कर उसे बुलाया है जबकि में आना नहीं चाहता था।बहीं जिलाध्यक्ष अरविंद गुप्ता ने बताया कि उक्त तथाकथित नेता कल से उसके प्रतिष्ठान व घर पर इस डर से चक्कर लगाता रहा कि वो प्रदेश अध्यक्ष के आने पर विरोध न करने के लिये मान मुन्ववल करता रहा।अब यह तो आने वाला समय मे तय होगा कि इस व्यापार मण्डल की लड़ाई का अंत क्या होगा।पर बदायूँ की इस घटना से प्रतीत होता है कि व्यापार मण्डल से व्यापारी का कितना भला होता है यह तो नहीं पता पर कुछ तथाकथित व्यापारी नेता इसके माध्यम से अपना उदर पोषण जरूर कर रहे हैं।













































































