अंतर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस के अन्तिम दिन 65 शोधपत्रों के वाचन के साथ RTPAS-2025 का हुआ समापन

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बदायूँ राजकीय महाविद्यालयके वनस्पति एवं प्राणी विज्ञान विभाग के संयुक्त तत्वावधान में चल रहे चार दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस RTPAS-2025 का आज समापन हो गया। समापन दिवस पर भारत सहित विभिन्न देशों के वैज्ञानिकों, शिक्षकों एवं शोधार्थियों ने अपने शोधपत्र का वाचन कर परिचर्चा की। कुल 65 शोधपत्रों की प्रस्तुति के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त विद्वानों ने अपने विचार साझा किए। लांझोउ यूनिवर्सिटी, चीन की प्रोफेसर डॉ नंदिनी ठाकुर ने अपने शोधपरक व्याख्यान में पौधों की तनाव सहनशीलता और पुनर्जीवन तंत्र पर महत्वपूर्ण तथ्य प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि बदलते जलवायु परिदृश्य में पौधों की शारीरिक और आणविक प्रतिक्रियाओं की समझ कृषि और पर्यावरणीय प्रबंधन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इसके पूर्व सम्मेलन में डॉ. मोहम्मद यूसुफ (यू ए ई), डॉ. अनायत रसूल मीर (चाइना), डॉ. मोहम्मद महमूद (सऊदी अरब) चार्ल्स ओलुवासेन आदेतुंजी (नाइजीरिया ) आदि अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने भी अपने शोध अनुभव साझा किए, जिससे यह आयोजन एक वैश्विक अकादमिक मंच के रूप में स्थापित हुआ। आज के सत्रों की अध्यक्षता डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर (म.प्र.) के सुमनथ घोष तथा अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की डॉ. यामशी आरिफ़ ने की। सम्मेलन में प्रस्तुत सभी शोधपत्र वेटनरी एवं पशु विज्ञान,पादप शरीर क्रिया विज्ञान, जैव प्रौद्योगिकी, पर्यावरणीय प्रबंधन एवं जलवायु परिवर्तन, मृदा स्वास्थ्य एवं सूक्ष्मजीव विज्ञान, जैव विविधता संरक्षण एवं पारिस्थितिकी, नैनो-टेक्नोलॉजी एवं नैनो-बायोइंजीनियरिंग, कृषि नवाचार एवं फसल सुधार, मानव स्वास्थ्य एवं बायोमेडिकल रिसर्च, समुद्री जीव विज्ञान एवं मत्स्य विज्ञान, सतत विकास और खाद्य सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों से संबंधित थे। समापन सत्र की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ श्रद्धा गुप्ता ने तथा संचालन डॉ प्रियंका सिंह एवं डॉ. गौरव कुमार सिंह ने संयुक्त रूप से की। अध्यक्षीय भाषण में डॉ गुप्ता ने कहा कि इस सम्मेलन में प्रस्तुत शोध-पत्र और व्याख्यान भविष्य की नीतियों और सतत विकास की राह को प्रशस्त करेंगे। यह सम्मेलन उच्च शिक्षा और शोध संस्कृति को नई ऊँचाइयों पर ले जाने वाला साबित हुआ है। अंत में आभार ज्ञापित करते हुए समन्वयक डॉ. सचिन कुमार ने कहा— “यह सम्मेलन भारतीय और वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय के बीच एक सशक्त सेतु बनकर उभरा है। इस शृंखला को हम और भी व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाएंगे।”

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