बरेली। आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ाँ रहमतुल्लाह अलैह के 107वें उर्स-ए-रज़वी के मौके पर शहर की सरज़मीं पर महफूज़ माहौल और मोहब्बत का पैग़ाम देखने को मिला। कुल शरीफ़ से पहले नॉवल्टी चौराहे पर बरेली हज सेवा समिति और जनसेवा टीम की ओर से देश-विदेश से आए ज़ायरीन का फूलों की बारिश कर शानदार इस्तक़बाल किया गया। इस मौके पर समाजसेवी पम्मी ख़ाँ वारसी ने कहा कि बरेली की मेहमाननवाज़ी दुनियाभर के जायरीन हमेशा याद रखते हैं। उन्होंने बताया कि फूलों की बारिश दरअसल एक मोहब्बत भरा पैग़ाम है, जिससे बरेली की सरज़मीं पर आने वाले हर ज़ायरीन को अपनापन और भाईचारे का एहसास होता है। पम्मी वारसी ने जायरीनों से मुल्क की खुशहाली, आवाम की तरक़्क़ी, कामयाबी, सलामती और आपसी सौहार्द के लिए दुआ की ख़ास दरख़्वास्त भी की। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जायरीन मौजूद रहे। फूलों की बारिश के दौरान हर तरफ़ “आशिक़-ए-आला हज़रत” के नारों से माहौल गूंज उठा। दूर-दराज़ से आए मेहमानों ने इस इस्तक़बाल को बरेली की गंगा-जमुनी तहज़ीब और भाईचारे की मिसाल बताया। इस अवसर पर नईम ख़ान, हाजी साक़िब रज़ा ख़ाँ, शादाब रज़वी, क़ासिम रज़वी, सरताज, सलीम, फ़ाज़िल ख़ान, डॉ. सीताराम राजपूत, निक्की वर्मा, हाजी यासीन कुरैशी, नजमुल एसआई ख़ान समेत बड़ी तादाद में लोग शामिल रहे। 107वें उर्स-ए-रज़वी पर फूलों की बरसात का यह नज़ारा बरेली की सरज़मीं पर मोहब्बत और भाईचारे का बेहतरीन पैग़ाम बनकर उभरा।