बदायूं में सपा महिला मोर्चा ने डिंपल यादव पर अभद्र टिप्पणी करने वाले मौलाना के खिलाफ प्रदर्शन किया

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लखनऊ। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उत्तर प्रदेश एक ऐतिहासिक दौर से गुजर रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चलाए जा रहे ‘हरित महायज्ञ’ में जब पूरे प्रदेश भर में वृक्षारोपण अभियान की शुरुआत हुई, तो इसमें सहभागिता निभाने वालों में एक नाम विशेष रूप से उभरा—वाटर वुमेन शिप्रा पाठक, जिन्होंने अपनी संस्था पंचतत्व के माध्यम से 51 लाख पौधे रोपित कर इस अभियान को नया आयाम दिया। जब पर्यावरण संकट एक वैश्विक चिंता का विषय बना हुआ है, तब शिप्रा पाठक द्वारा उत्तर प्रदेश की धरती पर इतने व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण का कार्य करना न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक ठोस उदाहरण प्रस्तुत करता है। 51 लाख पौधों का रोपण कोई सामान्य उपलब्धि नहीं, यह प्रकृति के साथ किए गए एक आत्मिक संवाद जैसा है—जहाँ केवल पेड़ नहीं लगाए गए, बल्कि एक हरित संस्कृति का बीजारोपण हुआ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा जिस हरित अभियान की कल्पना की गई, उसमें प्रदेश की जिन तीन संस्थाओं को प्रमुख भागीदार बनाया गया, उनमें पंचतत्व संस्था भी एक है। यह संस्था वर्षों से जल, जंगल और जमीन को बचाने के लिए व्यापक कार्य कर रही है, जिसकी कमान संभाल रही हैं वाटर वुमेन शिप्रा पाठक।

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शिप्रा पाठक का पौधारोपण केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, यह उनके जीवन का उद्देश्य बन चुका है। वे वर्षों से राम वनगमन मार्ग—जो अयोध्या से लेकर रामेश्वरम तक फैला हुआ है—उस पर पदयात्रा करते हुए वृक्षारोपण का कार्य कर रही हैं। इस मार्ग को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना से जोड़ते हुए उन्होंने न केवल हजारों पौधे लगाए, बल्कि स्थानीय लोगों, गांवों और संस्थानों को इस यज्ञ में सहभागी बनाया। शिप्रा पाठक का यह हरित आंदोलन शहरी सीमा तक ही नहीं सीमित रहा। उन्होंने देश के करीब तीन दर्जन प्रमुख विश्वविद्यालयों में जाकर वहां के प्रशासन व छात्र समुदाय के साथ मिलकर पंचतत्व संस्था के माध्यम से लाखों युवाओं को जोड़ा। इन युवाओं को पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रशिक्षित और प्रेरित करते हुए उन्होंने उन्हें ‘ग्रीन वॉरियर’ के रूप में तैयार किया।“यह मेरा गिलहरी प्रयास है”: शिप्रा पाठक

जब इस ऐतिहासिक वृक्षारोपण अभियान को लेकर शिप्रा पाठक से पूछा गया तो उन्होंने बड़ी विनम्रता से कहा—

“मुख्यमंत्री योगी जी द्वारा बनाए जा रहे हरित प्रदेश में मेरा यह गिलहरी प्रयास है। मुझे इस बात का अत्यंत गर्व है कि पंचतत्व जैसी संस्था को प्रदेश सरकार ने इस महायज्ञ में सहभागी बनाया है। यह हमारे लिए गौरव का विषय है और हम इस प्रयास को आगे भी निरंतर जारी रखेंगे।”
यह कथन दर्शाता है कि यह कार्य केवल ‘संख्या’ के लिए नहीं बल्कि संवेदना से जुड़ा है—वो संवेदना जो प्रकृति, परंपरा और पृथ्वी की रक्षा से उपजती है।

पंचतत्व पौधशाला: हरित भविष्य की प्रयोगशाला

पंचतत्व संस्था द्वारा हाल ही में बदायूं जनपद के सराय गांव में कई बीघा भूमि पर एक विशाल पौधशाला का निर्माण किया गया है। इस पौधशाला का उद्देश्य है—लोगों को निःशुल्क पौध वितरित करना और उन्हें अपने आसपास हरियाली बढ़ाने के लिए प्रेरित करना। यह केवल पौधे उगाने की जगह नहीं, बल्कि एक हरित आंदोलन की प्रयोगशाला बन चुकी है।
आगामी २ अगस्त माह में इस पौधशाला का उद्घाटन समारोह प्रस्तावित है, जिसमें हजारों की संख्या में पौधों का निःशुल्क वितरण किया जाएगा। यह आयोजन केवल स्थानीय स्तर का नहीं रहेगा, बल्कि यह प्रदेशभर के पर्यावरण प्रेमियों को जोड़ने वाला एक मंच बनेगा।

मुख्यमंत्री के संकल्प में महिलाओं की मजबूत भागीदारी

जहाँ एक ओर सरकार हरित प्रदेश के संकल्प को मूर्त रूप देने में लगी है, वहीं शिप्रा पाठक जैसे व्यक्तित्व यह सिद्ध कर रहे हैं कि महिलाएं इस परिवर्तन की अग्रणी वाहक बन सकती हैं। ‘वाटर वुमेन’ के नाम से लोकप्रिय शिप्रा पाठक जल संरक्षण, पौधारोपण और पर्यावरणीय जागरूकता के क्षेत्र में एक व्यापक पहचान बन चुकी हैं। उनका कार्य केवल प्रचार तक सीमित नहीं है—वह गांव-गांव जाकर स्वयं श्रमदान करती हैं, बच्चों और महिलाओं को प्रशिक्षित करती हैं, और एक स्थायी हरित चेतना का निर्माण करती हैं।

निष्कर्ष: हर पौधा एक व्रत, हर वृक्ष एक वचन

उत्तर प्रदेश के इतिहास में यह शायद पहला मौका है जब सरकार, समाज और स्वयंसेवी संस्थाएं इतने समन्वय के साथ हरियाली के यज्ञ में आहुति दे रही हैं। शिप्रा पाठक और उनकी संस्था पंचतत्व का यह योगदान बताता है कि यदि संकल्प सच्चा हो, तो एक व्यक्ति भी लाखों वृक्षों का उद्गम बन सकता है।
जहाँ आज पर्यावरण संकट, जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता का ह्रास वैश्विक स्तर पर चुनौती बने हुए हैं, वहीं शिप्रा पाठक जैसे कार्यकर्ता यह संदेश दे रहे हैं कि पर्यावरण की रक्षा कोई विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्यता है।

आशा की जानी चाहिए कि यह हरित आंदोलन केवल एक बार का आयोजन न बनकर, एक सतत अभियान का स्वरूप ले—जिसमें समाज के सभी वर्ग सहभागी बनें। और भविष्य में जब आने वाली पीढ़ियाँ स्वच्छ वायु में सांस लेंगी, तो वह उन वृक्षों की छांव में होंगी, जिन्हें शिप्रा पाठक जैसे लोगों ने अपने कर्म और संकल्प से रोपा होगा।

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