कथक नृत्य की शाम ‘रिमझिम गिरे सावन’

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बरेली। एसआरएमएस रिद्धिमा में रविवार की शाम कथक नृत्य को समर्पित रही। कथक के गुरुओं और विद्यार्थियों ने रिमझिम गिरे सावन के नाम कथक नृत्य की शाम का आयोजन किया। कार्यक्रम का आरंभ कथक गुरु देबाज्योति नस्कर लिखित और रचित ‘नाभा घोरे घनघटा’ पर कथक के विद्यार्थी करुण्य, नायरा, अवियाना, गौर्वी, ईशान्वी, अवनी, आहाना, नित्या अग्रवाल, गौरिका, गुरनूर, नितारा, नित्या जैन, समीक्षा, अराध्या, सान्वी, वृंदा, मीरा, रिद्म, नित्या, निधि चावला, मधुर कुकरेजा, क्षमा अग्रवाल, प्रियभाषिनी पाठक, सुषमा सिंह और तृप्ता वर्मा ने प्रस्तुति दी। कथक विद्यार्थियों ने ‘बादल घुमड़ बन आज काली घटा घन घोर गगन में’, ‘बिजुरी चमके बरसे मेघा’, ‘बरसे बदरिया सावन की’, ‘इठलाती बलखाती’ और ‘बादल गरजत नभ घोरे हे’ गीतों पर भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इसके बाद कथक गुरु देबाज्योति नस्कर खुद मंच पर आए और उन्होंने विद्यार्थियों का उत्साह वर्धन के लिए ‘गावत सब मल्हार गुंजन’ पर अपनी प्रस्तुति दी। कथक गुरु रियाश्री चटर्जी ने ‘सावन मोहे तरसाए’, कथक गुरु अंशु कुमार शर्मा ने ‘घर आई हे कारी बदरिया’ को कथक के भावों से प्रदर्शित किया। ‘गरज गरज आज मेघ’ फ्यूजन पर गुरु देबाज्योति नस्कर, रियाश्री चटर्जी और अंशु कुमार शर्मा ने एक साथ अपनी प्रस्तुति दी। इंस्ट्रूमेंट गुरु उमेश मिश्रा (हारमोनियम), अमरनाथ (तबला) और अनुग्रह सिंह (की-बोर्ड) ने अपने वाद्ययंत्रों के माध्यम से एवं गायन गुरु प्रियंका ग्वाल ने अपने स्वरों के जरिये कार्यक्रम ‘रिमिझिम गिरे सावन’ में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इस अवसर पर एसआरएमएस ट्रस्ट के संस्थापक व चेयरमैन देव मूर्ति , आशा मूर्ति , आदित्य मूर्ति , ऋचा मूर्ति , डा.एमएस बुटोला, डा.प्रभाकर गुप्ता, डा.अनुज कुमार, डा.शैलेश सक्सेना, डा.रीटा शर्मा सहित शहर के गण्यमान्य लोग मौजूद रहे।

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