सड़क हादसे में घायल राष्ट्रीय पक्षी मोर की मौत, बिना सम्मान के दफनाने पर उठे सवाल
बदायूं।
बिल्सी क्षेत्र में कल सड़क हादसे में घायल हुए राष्ट्रीय पक्षी मोर की आज मृत्यु हो गई है। यह घटना वन विभाग और पशुपालन विभाग की कार्यशैली पर कई सवाल खड़े कर रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि मोर की मृत्यु के बाद उसे बिना किसी राष्ट्रीय सम्मान के चुपचाप दफना दिया गया।
घटना का क्रम: स्थानीयों ने दी थी सूचना, पुलिस व वन विभाग मौके पर पहुंचे
घटना कस्बा बिल्सी के समीप दिधोनी गांव की है, जहाँ सड़क किनारे घायल अवस्था में एक मोर देखा गया। स्थानीय लोगों ने तुरंत 112 नंबर पर पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुँची 112 पुलिस ने वन विभाग को बुलाया। वन विभाग के कर्मी घायल मोर को कट्टे में बंद कर अपने साथ ले गए।
मोर की मौत और सवालों के घेरे में पोस्टमॉर्टम प्रक्रिया
घायल मोर की स्थिति गंभीर थी और अगले दिन उसकी मौत हो गई। पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया ब्लॉक सहसवान पर तैनात पशु चिकित्सक कर्मवीर द्वारा की गई।
स्थानीय लोगों ने सवाल उठाए हैं कि:
- जब आमतौर पर पालतू या आवारा पशुओं को घायल होने पर बरेली IVRI जैसी संस्थाओं में रेफर किया जाता है, तो राष्ट्रीय पक्षी जैसे संवेदनशील जीव का पोस्टमॉर्टम स्थानीय स्तर पर कैसे किया गया?
- क्या ऐसा करना प्रोटोकॉल और वैज्ञानिक जांच के मानकों के अनुरूप है?
बिना राष्ट्रीय सम्मान के दफन” — स्थानीय नाराज
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि मोर जैसे राष्ट्रीय पक्षी को बिना किसी सम्मान के, चुपचाप दफना दिया गया। न तो स्थानीय प्रशासन की ओर से कोई विधिक प्रक्रिया अपनाई गई, न ही वन विभाग ने इस घटना को गंभीरता से लिया।
पूर्व की घटनाएं भी आईं सामने, वन विभाग पर गंभीर आरोप
यह पहली बार नहीं है जब वन्य जीवों की मौत के बाद वन विभाग की निष्क्रियता सामने आई हो। पूर्व में:
- बिसौली रेंज में खेत में मृत मिले हिरन
- कोल्हाई नर्सरी में हिरन के अवशेष मिलने
जैसी घटनाओं में भी कोई विधिक कार्यवाही नहीं की गई।
स्थानीय लोग इसे वन विभाग द्वारा वन्य जीवों की दुर्घटनाओं को छिपाने का प्रयास मान रहे हैं।













































































