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Uttar Pradesh

रेशम उत्पादन के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश के बढ़ते कदम

May 29, 2025By admin0 comments
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बदायूँ। रेशम उत्पादन कार्यक्रम कृषि पर आधारित कुटीर उद्योगों में प्रमुख रथान रखता है। उत्तर प्रदेश की भौगोलिक स्थिति, जलवायु एवं जैव विविधत्ता रेशम उद्योग हेतु पूर्णतया अनुकूल एवं उपयुक्त है। प्रदेश में शहतूती, टसर, एरी तीन प्रकार का रेशम उत्पादन होता है, जो प्रदेश के 57 ’जनपदों में संचालित है। शहतूती रेशम हेतु मैदानी एवं तराई क्षेत्र, अरण्डी रेशम हेतु यमुना के समीपवर्ती स्थित जनपदों एवं टसर रेशम उत्पादन हेतु विन्ध्य क्षेत्र तथा बुन्देलखण्ड में प्रचलित है। रेशम कीटों के भोज्य वृक्षों के रूप में शहतूत एवं अरण्डी की खेती तथा अर्जुन/आसन वृक्षों का वृक्षारोपण करते हुए उनकी पत्तियों का उपयोग किया जाता है। शहतूती क्षेत्र में कृषकों के द्वारा वर्ष में चार कीटपालन फसलें, अरण्डी क्षेत्र में तीन कीटपालन फसलें तथा टसर क्षेत्र मे दो कीटपालन फसलें लेने का प्रचलन है। इस उद्योग के प्रमुख क्रिया-कलाप रेशम कीटाण्ड उत्पादन, रेशम कीटपालन, कोया उत्पादन व धागाकरण प्रमुख हैं। रेशम उद्योग पर्यावरण मित्र उद्योग होने के साथ-साथ श्रमजनित भी है। यह उद्योग ग्रामीण बेरोजगार, नवयुवकों को ग्रामीण परिवेश में ही स्वरोजगार का अवसर सुलभकराते हुए शहरी क्षेत्र की ओर पलायन रोकने में सहायक है। प्रदेश में रेशम उत्पादन से जुड़े किया-कलापों यथा पौध उत्पादन, वृक्षारोपण, कोया उत्पादन एवं धागाकरण आदि कियाकलापों हेतु सहायता उपलब्ध कराकर कृषकों एवं बुनकरों को श्रृंखलाबद्ध कार्यक्रमों के माध्यम से बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रदेश की उष्ण कटिबन्धीय एवं समशीतोष्ण जलवायु में शहतूती रेशम के अतिरिक्त ट्रापिकल टसर एवं एरी रेशम उद्योग के क्रियाकलाप सफलतापूर्वक क्रियान्वित किये जाने हेतु सभी आवश्यक सम्भावनायें उपलब्ध हैं। प्रदेश के रेशम विकास विभाग द्वारा रेशम उत्पादन के क्षेत्र में विशेष कार्य किये गये हैं। रेशम कीटपालकों द्वारा उत्पादित रेशम कोयों के मूल्य में वृद्धि हेतु राजकीय क्षेत्र में 7 जनपद यथा लखीमपुर खीरी, गोण्डा, श्रावस्ती, बलरामपुर, कुशीनगर, पीलीभीत एवं बहराइच तथा निजी क्षेत्र में जनपद गोरखपुर में एक रीलिंग इकाईयों की स्थापना की गई है, जहां किसानों को सही मूल्य मिल रहा है केन्द्र एवं राज्य पोषित संचालित योजनाओं से लाभ प्राप्त करने वाले लाभार्थियों के लिये पारदर्शी सुविधा उपलब्ध कराने हेतु रेशम मित्र पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा लागू की गयी जिस पर इच्छुक लाभार्थी पंजीकरण कराते हुए विभाग की योजनाओं का लाभ ले रहे हैं। एन०जी०ओ०, एफ०पी०ओ० समितियों एवं स्वयं सहायता समूहों को रेशम उत्पादन से जोड़ा जा रहा है। जागरूकता एवं प्रशिक्षण योजनान्तर्गत प्रशिक्षणार्थियों के चयन, प्रशिक्षण तिथियां एवं प्रमाण पत्र आदि ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से करते हुए 484 लाभार्थियों को राजकीय प्रशिक्षण अन्तर्गत मिर्जापुर में स्थापित लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल राजकीय रेशम प्रशिक्षण संस्थान, बरकछा में निःशुल्क प्रशिक्षण प्रदान किया गया। महिलाओं के सशक्तिकरण हेतु रेशम विभाग एवं एन०आर०एल०एम० के अन्तर्गत 5 वर्षों में 5000 समूहों की 50000 महिलाओं को ’’रेशम सखी’’ के रूप में रेशम उत्पादन से जोड़ने हेतु दिनांक 08.03.2025 को अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर इन्दिरा गांधी प्रतिष्ठान, गोमती ’नगर, लखनऊ में एन०आर०एल०एम० एवं रेशम विभाग, उ०प्र० के मध्य एम०ओ०यू० हस्ताक्षरित किया गया है। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के कुशल मार्गदर्शन में प्रदेश के जनपद बहराइच, श्रावस्ती, लखीमपुर, सीतापुर, गोण्डा, बलरामपुर, बस्ती, महराजगंज, गोरखपुर, कुशीनगर, पीलीभीत, शाहजहांपुर, बिजनौर एवं सहारनपुर में प्रथम बार राज्य पोषित “मुख्यमंत्री रेशम विकास योजना“ वर्ष 2025-26 हेतु रू0 100.00 लाख बजट की स्वीकृति प्राप्त हुई है। रेशम निदेशालय, उ०प्र० में ैवपस जव ैपसा के प्रदर्शन एवं शुद्ध सिल्क की पहचान के लिए सेन्टर ऑफ एक्सीलेन्स के निर्माण का कार्य कराया जा रहा है। मुख्यमंत्री जी द्वारा 29.10.2024 को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में कुल 08 श्रेणियों में प्रथम एवं द्वितीय पुरस्कार अन्तर्गत 18 पुरस्कार एवं ककून उत्पादन (किसानों द्वारा), श्रेणी 1(ब)- ककून उत्पादन में नवाचार (कार्मिकों द्वारा), श्रेणी 1 (स)- रेशम से तैयार उत्पाद में नवाचार (व्यापारी/एन०जी०ओ०/बुनकर/कम्पनी/ट्रस्ट/को-ऑपरेटिव सोसाइटी इत्यादि), श्रेणी 2 (अ) सर्वोच्च कोया क्रेता/धागा विक्रय, श्रेणी 2 (ब) सर्वाधिक वस्त्र विक्रेता (रेशम फिनिश्ड प्रोडक…

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