सियासी मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष बोले राजनीतिक पार्टिया मुसलमानो का कर रही है शोषण

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बरेली। मुसलमान की घटती हुई राजनीतिक में भागीदारी को देखते हुए बरेली में आज सियासी मंच का गठन किया गया है भारतीय मुसलमानों की स्थिति और नई राजनीतिक मंच की आवश्यकता आजादी के बाद से भारतीय मुसलमानों का सामाजिक , आर्थिक , शैक्षिक और राजनीतिक ग्राफ लगातार नीचे गिरता रहा है । देश की सबसे बड़ी अल्पसंख्यक आबादी होने के बावजूद , मुसलमानों का प्रतिनिधित्व और विकास विभिन्न क्षेत्रों में अपेक्षाकृत कम रहा है । इसका प्रमुख कारण विभिन्न राजनीतिक दलों की नीतियां और उनकी उदासीनता रही है , जिन्होंने मुस्लिम समुदाय को केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया , न कि उनके उत्थान के लिए ठोस कदम उठाए । सांख्यिकीय आंकड़ों के अनुसार , 1951 में भारत की जनसंख्या में मुसलमानों की हिस्सेदारी 9.8 % थी , जो 2011 तक बढ़कर 14.2 % हो गई , लेकिन संसद और विधानसभाओं में उनका प्रतिनिधित्व उनकी जनसंख्या के अनुपात में नहीं रहा । 2025 के लोकसभा चुनाव में केवल 24 मुस्लिम सांसद चुने गए , जो कुल 543 सीटों का मात्र 4.4 % है । इसके अलावा , शिक्षा , रोजगार , और आर्थिक समृद्धि में भी मुस्लिम समुदाय अन्य समुदायों से पीछे है । 2006 की सच्चर समिति की रिपोर्ट ने इस असमानता को स्पष्ट रूप से उजागर किया था , लेकिन इसके बाद भी स्थिति में सुधार के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए । राजनीतिक दलों ने मुस्लिम समुदाय के मुद्दों को संबोधित करने में विफलता दिखाई है । आरोपों से बचने के लिए मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट देने में हिचकिचाते हैं , 1980 और 1990 के दशक में सांप्रदायिक तनाव ( जैसे बाबरी मस्जिद विवाद ) और उसके बाद की घटनाओं ने मुस्लिम समुदाय को सामाजिक रूप से अलग – थलग किया । सांप्रदायिक हिंसा और धार्मिक ध्रुवीकरण ने उनकी सामाजिक और राजनीतिक एकता को कमजोर किया । इसी पृष्ठभूमि में सियासी मंच का गठन किया जा रहा है , जो भारतीय मुसलमानों को एक नया आयाम प्रदान करेगा । इस मंच का उद्देश्य न केवल मुस्लिम समुदाय के अधिकारों और हितों की रक्षा करना है , बल्कि उन्हें शिक्षा , रोजगार , और राजनीतिक भागीदारी में समान अवसर प्रदान करना भी है । सियासी मंच जैसे प्रयास इस स्थिति को बदलने और मुस्लिम समुदाय को समान अवसर प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं ।यह सियासी मंच न केवल मुसलमानों के लिए , बल्कि सभी हाशिए पर पड़े समुदायों के लिए एक मंच होगा , जो सामाजिक न्याय , समानता , और संवैधानिक मूल्यों को बढ़ावा देगा ।
प्रेसवार्ता में ,वसीम मियां , शाहिद रिजवी, सैयद मोहम्मद अकरम, मोईन हसन, वसीम मियां ,आतिफ खान, जहीर अहमद, मोहम्मद ओवैस खान आदि मौजूद रहे।

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