भारतीय संस्कृति, सभ्यता और संस्कारों की जन्मदात्री है मां गंगा: संजीव

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‘‘औषधि जाह्न्वी तोयम्, वैद्यो नारायणः हरिः‘‘
-प्राणी जगत को जीवनदान दे रही गंगा

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उझानी। अखिल विश्व गायत्री परिवार के मार्गदर्शन में चले रहे प्रखर बाल संस्कारशाला की ओर से कछला के भागीरथी तट पर लोकमंगल की कामना से गायत्री मंत्र का जप, मां गंगा की आरती और दीपदान किया। दीपकों की झिलमिलाती रोशनी आकर्षण का केंद्र रही।
गायत्री परिवार के संजीव कुमार शर्मा ने कहा कि मां गंगा भारतीय संस्कृति, सभ्यता और संस्कारों की जन्मदात्री है। भारत की पावन भूमि पर मां गंगा का आंचल गोमुख से सागर तक 2525 किमी फैला है। भागीरथी प्रयास से धरती पर अवतरित र्हुइं मां गंगा 11 राज्यों को जीवन देती हैं। गंगा जल में प्राकृतिक रूप से बैक्टिरियोफेज तत्व होता है। वर्षाें जल संचय करने के बाद भी खराब नहीं होता है। कहा है ‘‘औषधि जाह्न्वी तोयम्, वैद्यो नारायणः हरिः‘‘। जहरीले कचरे, नगरों के मैले, खेतों के रसायन से मां गंगा का आंचल तार-तार कर दिया है। मां गंगा के पवित्र आंचल को प्रदूषित कर स्वयं विनाश को आमंत्रिण दे रहे हैं।
उसहैत से आए पंकज कुमार ने कहा कि मां गंगा भारत भूमि की सर्व प्रधान रक्त धामिनी है। गंगा भारत के कोने-कोने में युगों-युगों से प्रवाहित होकर धरती और प्राणी जगत को जीवनदान दे रही है। गंगा तट पर बसे अनेकों पौराणिक तीर्थों से आध्यात्मिक ऊर्जा से श्रेष्ठ चिंतन और सद्भाव जगे, घर-परिवार संस्कारशालाएं बनी। मानव में देवत्व जागा और धरती पर स्वर्ग का अवतरण हुआ है।
कछला के भागीरथी तट पर लोकमंगल की कामना से गायत्री मंत्र का जाप हुआ। मां गंगा की भव्य आरती हुई। दीप प्रज्ज्वलित कर मां गंगा के निर्मल धारा में प्रवाहित किए। इस अवसर पर भवेश शर्मा, आरती शर्मा, रीना शर्मा, दीप्ति, खुशबू आदि मौजूद रहे।

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