हरीश कटियार अपहरण कांड में वांछित दो अभियुक्त मुठभेड में गिरफ्तार
बरेली। बांदा जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र के अंडा चौक निवासी और हरदोई के पाली थाना क्षेत्र मूल निवासी वर्तमान में बांदा जिला में रह रहे हरीश कटियार पुत्र गंगासरन कटियार के अपहरण कर्ताओं से 21 जनवरी को हुई मुठभेड के दौरान फरार हुए अभियुक्त रजत उर्फ उमेश पुत्र हरीश कुमार निवासी बिबयापुर थाना भोजीपुरा व खेमेन्द्र पुत्र उमाशंकर निवासी मियाँपुर थाना भोजीपुरा को बुधवार को सुबह भोजीपुरा देवरनिया थाने की पुलिस ने भोजीपुरा थाना क्षेत्र में सेमीखेडा फाटक से पीछा करते हुए गिरफ्तार करने के बाद चैन, अंगूठी घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल दो तमंचे कारतूस, धोखे व कारतूस बरामद किए आज सुबह भोपतपुर मार्ग पर भोजपुर सर्वसुख पुल के पास पुलिस ने उन्हें घेर लिया अभियुक्तों द्वारा पुलिस पार्टी पर जान से मारने की नीयत से फायरिंग की जवाबी फायरिंग में दोनो अभियुक्तो के पैरो में गोली लगी अभियुक्त रजत उर्फ उमेश के कब्जे से अपहरण के दौरान हरीश कटियार से छीनी हुई चैन व अंगुठी बरामद हुई साथ ही घटना में प्रयुक्त बिना नम्बर मोटरसाईकिल भी बरामद हुई घटना में पुलिस पार्टी से उपनिरीक्षक सन्देश यादव व सिपाही हिमांशु धींगरा भी घायल हुये सभी घायलों को उपचार हेतु सरकारी अस्पताल भेजा गया।अभियुक्तों ने पूछताछ में बताया कि अपहृत हरीश कटियार, अनूप कटियार का तहेरा भाई हैं तथा वर्तमान में अण्डे का थोक व्यापार का काम जनपद बांदा में करता है। अनूप कटियार के कहने पर हमने अपने साथियो अंकित उर्फ विनीत कटियार, शाहिद, आकाश, ललित, वीरु उर्फ वीरपाल के साथ मिलकर योजना बनाई जिसके लिए मैंने अब से करीब एक माह पहले भी जब हरीश कटियार अपने गांव पाण्डेपुर आया था वहीं पर अपहरण की योजना बनाई थी और अनूप ने हरीश को साथ में ढाबे पर चलने के लिए कहा था हमने भी अपने साथियो के साथ वीरु की गाड़ी को ढाबे पर लगा रखा था परन्तु हरीश ने अनूप के साथ ढाबे पर चलने के लिए मना कर दिया था। जिससे हमारी योजना फेल हो गयी थी, फिर हमने योजना चेन्ज की और योजना के अनुसार अनूप अपनी गाड़ी में 16 जनवरी को अकेला व दूसरी गाड़ी में हम और हमारे साथी वीरू उर्फ वीरपाल की ईको में अंकित उर्फ विनीत कटियार, आकाश चले थे, ताकि रास्ते में पड़ने वाले टोल के केमरों में हम सब लोग एक गाड़ी में न दिखाई दे। अनूप ने हम सभी साथियों को बांदा में अलग होटल में रुकवा दिया था और होटल के 2000 रुपये अंकित को दे दिये थे और मैं शाम को 9.00 बजे अपने चचेरे भाई हरीश कटियार के पास चला गया था।

उसके कमरे पर रुका था और अनूप ने हरीश को चित्रकूट घुमने चलने के लिए कहा था तो हरीश ने मना कर दिया था। हमारी प्लान इसे घुमने के बहाने ले जाकर अपहरण करने की थी ताकि अपहरण करते समय कोई शोर शराबा न हो और किसी को पता न लगे। हरीश ने यह कहकर कि मेरे अण्डे की गाड़ी आ गयी मुझे उतरवानी है, में नहीं जा पाऊँगा। तो अनूप ने कहा कि फिर में भी नहीं जाऊंगा और अनूप ने अपनी योजना चेन्ज कर दी और अगले दिन रात में घर से ही उठाने की योजना बनाई। शाम को खाना खाने के बाद अनूप ने हरीश से कहा कि मेरे दोस्त चित्रकूट घुमकर वापस आ रहे हैं में उनसे मिलकर आ रहा हूँ। इस बहाने से दरवाजा खोलकर बाहर गया और हम सभी को मकान दिखा दिया था। और बताया कि रात में 1.30 बजे आ जाना में अन्दर से कुन्डी खोल दूँगा और तुम तमन्या लगाकर हरीश को उठा लेना और मुझे भी धमकाना और ऐसा नाटक करना कि दोनो का अपहरण किया है। योजना बताकर वह वापस कमरे में आकर कमरे की कुन्डी बन्द करके लेट गया और हम लोग अपने होटल मे चले गये थे। और रात्रि 1.30 बजने का इन्तजार करने लगा। जब हरीश सो गया तो योजना के अनुसार जैसे ही रात का 1.30 बजे अनूप ने कुन्ड़ी खोली तो हम सब लोग अन्दर घुस गये और हरीश के उपर कर्बल डालकर सर पर तमन्वा लगाकर अपहरण कर लिया और अनूप को भी धमकाया कि चल गाड़ी चला तेरा भी अपहरण हो गया। अनूप अपनी गाड़ी की सीट पर बैठ गया बराबर वाली सीट पर मैं, रजत बैठ गया पीछे वाली सीट पर बीच में हरीश को बैठा लिया और पीछे वाली सीट पर एक तरफ अंकित उर्फ विनीत व दुसरी तरफ मै खेमेन्द्र बैठ गया। रजत ने हरीश के पेट पर तमंचा लगाये रखा और बार बार आवाज न करने के लिए धमकाता रहा। हम लोग उसे लेकर बरेली आ गये। और भुता पहुँचे और गाड़ी का तेल खतम हो गया था। अंकित ने हरीश के करंट अकाउण्ट से 7500 रुपये क्यू आर कोड़ के द्वारा ट्रान्सफर कराये और भुता में ही पेट्रोल पंप से 3000 रुपये का तेल डलवाया था और इसका पेमेन्ट भी हरीश के सेविंग अकाउण्ट से फोन पे से पेमेन्ट कराया था और रजत ने बताया कि मैंने हरीश से चेन और अंगूठी छीन ली थी। दिन होने के कारण हम हरीश को लेकर घुमते रहे शाहँजापुर से हरदोई रोड़ पर चले गये। हरीश जब भी पानी माँगता था तो हम इसे पानी न देकर शराब देते थे ताकि हरीश को नशा रहे ऐसे ही घुमाते हुए रात हो गयी। रात में समय करीब 10.30 बजे योजना के अनुसार अंकित के गांव में हरीश को लेकर पहुँचे और गांव के बाहर ही अंकित ने उदित को बुलाकर उसकी बैठक में हरीश का मुहँ ढककर गाड़ी से उतारकर अन्दर बन्द कर दिया। जिसकी निगरानी के लिए उदित, और खेमेन्द्र ने बताया कि मेरे पिता उमाशंकर को छोड़ दिया और खाना लाने के लिए अंकित ने अपनी पत्नी लाली को लगा दिया। फिर अगले दिन अनूप और अंकित उर्फ विनीत बहेड़ी वाला टोल बचाते हुए लालपुर उधमसिंह नगर उतराखण्ड पहुँचे और अनूप ने अपने फोन से अंकित से अपनी पत्नी ममता को फोन कराकर पाँच लाख रुपया फिरौती का माँग कराई और हरीश के फोन से उसकी पत्नी ज्योति को फोन कराकर 15 लाख रुपया की माँग कराई है और वहीं फोन करने के बाद दोंनो फोन स्विच आफ कर लिये। अनूप ने ऐसा इसलिए किया ताकि उनका लोकेशन लालपुर का आये। फिर वापस रास्ता देखते हुए कि हरीश को कहीं दुसरी जगह रखने के लिए कमरे की तलाश की, क्योंकि एक गांव में ज्यादा रखने से पकड़ने का डर था। शाहिद ने अपने किसी जान पहचान के यहाँ रखने के लिए कमरा बता दिया था उसी में हरीश को ले जाने के लिए दोनों गाड़ियों से हम सभी लोग ग्राम मियापुर जा रहे थे। रास्ते में पुलिस ने घेर लिया था। अनूप ने पुलिस से घिरा देखते हुए पुलिस पर गोली चलाने के लिए कहा था ताकि हम पुलिस के उपर गोली चलाकर मौका मिलते ही भाग जाये। हम दोनों व ललित फायरिंग करते हुए मौके से खेतो की तरफ भाग गये थे और हमारे साथी अनूप, अंकित उर्फ विनीत, शाहिद, वीरु उर्फ बीरपाल आकाश दोनों गाडियो सहित पकडे गये थे। हमारा सब प्लान पुलिस ने फेल कर दिया। इसके अलावा भी हमने अनूप के कहने पर एक होम्योपैथिक संचालक व एलोपैधिक स्टोर संचालक जो जगतपुर, बरेली शहर में है के अपहरण की योजना बनाई थी। परन्तु वहाँ भीड़ भाड़ अधिक रहने के कारण पकड़े जाने के डर के कारण हमारी योजना फेल हो गयी थी।













































































