संविदा विद्युत कर्मियों को 20 प्रतिशत कम करने के विरोध में कैंट विधायक, वन मंत्री को दिया ज्ञापन
बरेली। उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन निविदा संविदा कर्मचारी संघ और विद्युत संविदा मजदूर संगठन के कार्यकर्ताओं ने संविदा कर्मियों के साथ आज मध्यांचल मुख्यालय द्वारा विद्युत वितरण बरेली मंडल में जारी कंपनी के अनुबंध में आवंटित कर्मियों की संख्या 20 प्रतिशत कम करने के विरोध में कैट विधायक और वन एवं पर्यावरण मंत्री अरुण कुमार के कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन दिया और कर्मियों की संख्या में कटौती को रोके जाने की मांग की है।

इस दौरान विद्युत संविदा मजदूर संगठन के उत्तर प्रदेश महामंत्री सुनील गोस्वामी ने कहा की मध्यांचल मुख्यालय से जो नया आदेश आया है उसमें जिस कंपनी से अनुबंध हुआ है उसमें 20% निविदा कर्मियों की छटनी की जाएगी जिससे बरेली के लगभग 2,000 निविदा कर्मी प्रभावित होंगे । उन्होंने कहा कि जिस संविदा कर्मी ने 15 वर्ष तक 20 वर्ष तक अपनी सेवाएं दी उनको एकदम निकाला जाएगा तो वह आखिर कहां जाएगा। उन्होंने कहा कि अभी हम जन प्रतिनिधियों के माध्यम से यह संदेश दे रहे हैं कि इस आदेश को वापस लिया जाए। इसके बाद यदि हमारी बात नहीं सुनी गई तो हम मुख्यालय का घेराव करेंगे और हम अंतिम समय तक अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।

उत्तर प्रदेश निविदा संविदा कर्मचारी संघ के बरेली जिला अध्यक्ष का कहना है कि अधिकारियों का संविदा कर्मचारियों पर शोषण चरम पर है लगातार कोई ना कोई नए नियम निकाले जाते हैं जिससे संविदा कर्मचारियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इससे पहले कई बार संविदा कर्मचारियों के साथ हादसा हुआ है जिसका मुआवजा अभी तक नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि 16 वर्षों से वह विद्युत विभाग में सेवा दे रहे हैं अब ऐसे में नया आदेश जारी हुआ है कि 20% संविदा कर्मचारियों की छटनी की जाएगी, उन्होंने कहा कि अब शोषण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मध्यांचल एमडी का घेराव करेंगे, अगर यह आदेश लागू होता है तो पूर्ण कार्य बहिष्कार किया जाएगा और फिर भी हमारी बात नहीं सुनी गई तो हम आत्मदाह कर लेंगे। वही उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन निविदा संविदा कर्मचारी संघ के बरेली जिला महामंत्री राहुल शर्मा ने कहा कि हम बरसों से आउटसोर्सिंग के माध्यम से कार्य करते चले आ रहे हैं। हमारी कंपनी का टेंडर खत्म हो चुका है। नई कंपनी के द्वारा 1 फरवरी से जो नए नियम लागू हो रहे हैं उसके मुताबिक 20% कर्मियों की संख्या कम की जा रही है,ऐसे में जिन कर्मियों की छटनी की जाएगी उनका परिवार भुखमरी के कगार पर आ जाएगा, उन्होंने कहा कि वह अभी जनप्रतिनिधियों के माध्यम से मुख्यमंत्री तक अपनी मांग पहुंचा रहे हैं। अगर उनकी मांग पूरी नहीं की गई तो उनके आगे आत्महत्या के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है।













































































