काशी में शिवमहापुराण कथा सुनने पहुंचे CM योगी, बोले- वेदव्यास परंपरा का हो रहा निर्वहन

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वाराणसी। यूपी काॅलेज के निकले के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने काल भैरव मंदिर में विशेष पूजा आरती की। इसके बाद सीएम ने बाबा विश्वनाथ का दर्शन-पूजन किया। मुख्यमंत्री ने षोडषोपचार विधि से रुद्राभिषेक किया। इसके बाद गंगा द्वार से क्रूज में सवार होकर डोमरी के लिए रवाना हुए। कथा स्थल पर पहुंचते ही मंच पर सतुआ बाबा ने सीएम योगी का स्वागत किया। पूरे पंडाल में जयघोष होने लगा। सीएम ने शिवमहापुराण कथा में शामिल होने को लेकर खुशी जाहिर की।कार्यक्रम को सीएम ने भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि बाबा विश्वनाथ और मां गंगा के पावन तट पर शिवमहापुराण की कथा को श्रवण का आनंद आप सबको प्राप्त हो रहा है। मैं सबसे पहले पंडित प्रदीप मिश्रा का आप सभी काशी, प्रदेशवासियों श्रद्धालु जनों की ओर से हृदय से स्वागत करता हूं। कहा कि 13 जनवरी से 26 फरवरी तक यानी पौष पूर्णिमा से महाशिवरात्रि तक प्रयागराज की पावन धरती पर दुनिया का सबसे बड़ा आध्यात्मिक और सांस्कृतिक समागम महाकुंभ 2025 का आयोजन है और उसे ठीक पहले काशी की धरती पर इस कथा के माध्यम से कुंभ का दर्शन हम सबको देखने का अवसर प्राप्त हो रहा है। जिस अनुशासन और श्रद्धा भाव के साथ आप सभी इस कथा का श्रवण कर रहे हैं तो मैं आप सबका भी हृदय से अभिनंदन करता हूं। भगवान शिव का भक्त और सनातनी होने के नाते मैं आप सबका अभिनंदन करता हूं। मुझे याद है कि पंडित प्रदीप मिश्रा के कथा हापुड़ में होने वाली थी तो अचानक वहां के प्रशासन ने कथा के आयोजन को निरस्त कर दिया। मुझे शाम को जानकारी मिली। मुझे बताया गया कि भीड़ ज्यादा हो सकती है। मैंने कहा कि उनकी कथा की तो चर्चा ही इस बात के लिए होती है कि वहां हजार में नहीं लाखों में श्रद्धालुओं की गिनती होती है। सभी श्रद्धालु होते हैं परम भक्त होते हैं और परम भक्त की सबसे बड़ी पहचान क्या है वह अनुशासित होता है। जिसकी आत्मा अनुशासन है, उसका भौतिक द्रव्यों पर भी अनुशासन होता है। अभी कथा को अनुमति दे दिया जाए और भव्यता के साथ आयोजन को आगे बढ़ाने के लिए कार्यक्रम को आगे बढ़ाया जाए। मुझे बहुत अच्छा लगा जो भी वहां पर गया उसे आनंद आया। फर्रुखाबाद में कार्यक्रम हुआ वहां पर भी यही दृश्य था। दृष्टि सबके अपनी होती है यह दृश्य हमारे लिए सनातन धर्म का एक लघु भारत का रूप है और यह हमारी सामाजिक क्षमता का भी प्रतीक है। कौन कहता है कि हम आपस में बंटे हैं, कहां जातिवाद है, कहां संप्रदायवाद है कहां उपासना विधि का वाद है। सीएम ने कहा कि हम तो सब एक होकर इस पावन कथा के माध्यम से उदाहरण सबके सामने प्रस्तुत कर रहे हैं। मैं कथा के इस विहंगम दृश्य को देख रहा हूं। एकदम सामने बाबा विश्वनाथ का धाम है मां गंगा का सानिध्य। सतुआ बाबा ने ऐसा स्थल चयन किया कि एक साथ बाबा के भी दर्शन हो और मां गंगा के भी। बाबा भैरव नाथ के दर्शन हो जाए यानी यहां से एक साथ यह लोग भी कथा सुन रहे हैं। बाबा भैरवनाथ भी सुन रहे हैं। काल भैरव भी सुन रहे हैं, मां गंगा और श्रद्धालु भी सुन रहे हैं। यह उन सभी लोगों के मुंह पर जवाब है जो हमें जाति के नाम पर, क्षेत्र के नाम पर, भाषा के नाम पर तमाम बातों के नाम पर बांटते हैं। उनकी आंखों को खोलने के लिए कथा का विहंगम दृश्य काफी है। कहा कि मुझे इस बात की भी प्रसन्नता है कि 5000 वर्ष पहले हम जिस पवित्र पीठ को व्यासपीठ कहते हैं भगवान वेद व्यास की पवित्र परंपरा है। भगवान वेद व्यास ने चारों वेदों का संग्रह करके आने वाली पीढ़ी को दिया। शिष्य की परंपरा वेदों के संरक्षण के लिए कैसे बनी है इसमें पूरा ज्ञान समाहित है। महाभारत जैसा 10001 श्लोक का महाकाव्य से पूरी टीम को नेतृत्व दिया। श्रीमद्भागवत महापुराण जैसा ज्ञान, भक्ति और वैराग्य की अद्भुत त्रिवेणी का महापुराण, मुक्ति और जीवन की सफलता का रहस्य, इन पुराणाें में छिपा हुआ है, वह भी भगवान वेदव्यास ने ही हमें दिया। पुराणों की रचना कैसे की जानी चाहिए, उन्होंने इसकी शुरुआत की। उसे समय के सबसे बड़े राजवंश कुरुवंश को हर विपरीत परिस्थितियों में बचाया।

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