57वां उर्स-ए-शाह शराफ़त में पंजाब, उत्तराखंड, मध्यप्रदेश, छत्तीसगण, झानरखंड, महाराष्ट्र, गुजरात, बिहार, दिल्ली, बंगाल आ रहे जायरीन

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बरेली। शहर में चल रहे 57वें उर्स-ए-शाह शराफ़त का दिनांक 13 सितंबर मुताबिक 9 रबीउल अव्वल बरोज़ जुमा दूसरा दिन है। ख़ानक़ाह-ए-सकलैनिया शराफ़तिया पर ज़ायरीन द्वारा गुल पोशी और चादर पोशी की परंपरागत रस्म जारी है। इस वर्ष भी देश भर से बड़ी संख्या में ज़ायरीन बरेली पहुंच रहे हैं। ख़ानक़ाह और आसपास के बाज़ारों में ज़ायरीन की भारी भीड़ देखी जा सकती है। आज भी पंजाब, उत्तराखंड, मध्यप्रदेश, छत्तीसगण, झानरखंड, महाराष्ट्र, गुजरात, बिहार, दिल्ली, बंगाल आदि राज्यों से बड़ी संख्या में ज़ायरीन पहुंचे। शहर की सड़कों पर नए शहर से लेकर पुराने शहर तक चादरों के जुलूस नज़र आ रहे हैं, जो इस आयोजन की भव्यता को दर्शाते हैं। ज़ायरीन की सुविधा का विशेष ध्यान रखा गया है। ख़ानक़ाह पर उनके ठहरने और भोजन की उत्तम व्यवस्था की गई है। विशेष रूप से, ख़ानक़ाह पर 24 घंटे चलने वाला लंगर ज़ायरीन की सेवा में तत्पर है। उर्स के सभी कार्यक्रम दरगाह प्रमुख ग़ाज़ी मियाँ के मार्गदर्शन में आयोजित किए जा रहे हैं। उनकी देखरेख में कार्यक्रम सुचारु रूप से संपन्न हो रहे हैं। ज़ायरीन की अप्रत्याशित संख्या को देखते हुए स्थानीय प्रशासन भी सतर्क हो गया है। प्रशासन द्वारा सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए विशेष इंतज़ाम किए गए हैं। उर्स में आने वाले ज़ायरीन के वाहनों की पार्किंग के लिए गत वर्षों की भांति इस्लामियाँ इंटर कॉलेज मैदान, के.डी.एम इंटर कॉलेज मैदान, बिशप मंडल कॉलेज मैदान, एम.बी.इंटर कॉलेज मैदान में पुलिस-प्रशासन द्वारा व्यवस्था की गई है, नैनीताल,रामपुर व पीलीभीत रोड से आने वाले वाहनों की पार्किंग एम.बी. कॉलेज के मैदान और के.डी.एम कॉलेज के मैदान में पार्किंग की जायेगी। इसके अलावा बदायूं व लखनऊ रोड से आने वाले वाहनों की पार्किंग इस्लामियां इंटर कॉलेज मैदान व बिशप मंडल इंटर कॉलेज मैदान में की जायेगी।
उर्स-ए-शाह शराफ़त न केवल धार्मिक महत्व का प्रतीक है, बल्कि यह बरेली की सांस्कृतिक विरासत का भी एक अहम हिस्सा है। यह आयोजन शहर में आध्यात्मिक माहौल के साथ-साथ सामाजिक सद्भाव और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा दे रहा है। आने वाले दिनों में उर्स के और भी कई कार्यक्रम होने हैं, जिनमें बड़ी संख्या में ज़ायरीन के शामिल होने की उम्मीद है। इस दौरान शहर में उत्सव का माहौल देखने को मिल रहा है, जो बरेली की समृद्ध सूफी परंपरा और ज़ायरीन की अक़ीदत को प्रदर्शित कर रहा है। उर्स की व्यवस्था में मोहम्मद हमज़ा, गुलाम मुर्तुजा, गौसी सकलैनी, इंतिखाब सकलैनी, महफूज सकलैनी, मुनीफ़ सकलैनी, मुकीत सकलैनी, सरताज सकलैनी, जियाउद्दीन सकलैनी, इमरान सकलैनी, हाजी लतीफ़ सकलैनी, आफताब आलम, अबरार हुसैन, मन्ना सकलैनी, जाने आलम सकलैनी, रिज़वान सकलैनी, सय्यद राशिद, फैसल सकलैनी, ज़ाहिद सकलैनी, सय्यद आमिर, जमील सकलैनी, खुर्रम सकलैनी, निज़ाम सकलैनी, यावर सकलैनी आदि अपनी ज़िम्मेदारी अदा कर रहे हैं।

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