अचानक पैरालिसिस का शिकार हुई 60 वर्षीय महिला का सीके बिरला हॉस्पिटल में किया गया सफल इलाज

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बरेली। सीके बिरला हॉस्पिटल गुरुग्राम में एक ऐसी 60 वर्षीय महिला का सफल इलाज किया गया है जिन्हें अचानक पैरालिसिस (लकवा) हो गया था. स्पाइनल ट्यूमर के कारण महिला के दोनों पैरों पर ये असर हुआ था. रोहतक की रहने वाली इस महिला ने शुरुआत में स्थानीय अस्पताल में ही इलाज कराया लेकिन बाद में उन्हें सीके बिरला हॉस्पिटल रेफर कर दिया गया क्योंकि शुरुआती जांच में समस्या का कारण पता नहीं चल पा रहा था।
सीके बिरला अस्पताल पहुंचने पर महिला की गहनता से जांच पड़ताल की गई जिसमें पता चला कि उनकी रीढ़ में ट्यूमर है और इसके कारण उनके लोअर लिम्ब्स यानी पैरों में पैरालिसिस का असर हो गया. ट्यूमर के कारण महिला अपने रोजमर्रा के काम भी नहीं कर पा रही थी और उन्हें मामूली काम के लिए भी बच्चों पर निर्भर रहना पड़ रहा था. सीके बिरला हॉस्पिटल में लीडिंग स्पाइन सर्जन डॉक्टर अरुण भनोट से परामर्श के बाद मरीज को माइक्रोस्कोपिक ट्यूमर रिमूवल सर्जरी के बारे में बताया गया जिससे उनका मूवमेंट वापस आ सकता था. सीके बिरला हॉस्पिटल गुरुग्राम में स्पाइन सर्जरी के डायरेक्टर डॉक्टर अरुण भनोट ने सर्जिकल प्रक्रिया के बारे में जानकारी देते हुए बताया, ”माइक्रोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी में इस्तेमाल की जाने वाली लेटेस्ट तकनीक और न्यूरो मॉनिटरिंग तकनीक के जरिए ट्यूमर को हटाने की सर्जरी सफलतापूर्वक की गई. ये तकनीक रीढ़ की सर्जरी में सटीकता और निपुणता लाने में अहम भूमिका निभाती हैं. रियल टाइम गाइडेंस के साथ हाई डेफिनेशन तस्वीरों से न्यूरो मॉनिटरिंग तकनीक वाली प्रक्रिया में ट्यूमर को पूरी सटीकता के साथ हटाते हुए आसपास के स्वस्थ टिशू को संरक्षित रखना सुनिश्चित होता है. ये एडवांस तरीका न सिर्फ सर्जरी के कॉम्प्लिकेशंस को कम करता है, बल्कि इससे मरीज की रिकवरी में भी टाइम कम लगता है.” माइक्रोस्कोपिक स्पाइन सर्जरी और न्यूरो मॉनिटरिंग का इस्तेमाल करने से डॉक्टरों की क्षमताओं में भी इजाफा हो जाता है और वो रीढ़ से जुड़े चुनौतीपूर्ण मामलों को डील कर पाते हैं. यह तकनीक उन्हें बेहतरीन सटीकता के साथ मुश्किल सर्जरी करने के लिए सक्षम बनाती है, जिससे ऐसे मरीजों के लिए बेस्ट से बेस्ट रिजल्ट आते हैं. डॉक्टर अरुण ने आगे बताया, ”ये एक सफल सर्जरी रही, जिसमें स्वस्थ टिशू को बिना कोई नुकसान पहुंचे ट्यूमर को पूरी तरह से हटा दिया गया. सर्जरी के तीन दिन बाद मरीज को छुट्टी दे दी गई. एक सप्ताह के अंदर मरीज खुद से चल पाने में सक्षम थी. महिला की स्थिति सामान्य होने पर उन्हें और उनके परिवार को बहुत राहत मिली.” 60 वर्षीय महिला मरीज ने कहा, ”मैं डॉक्टर अरुण भनोट और सीके बिरला अस्पताल की पूरी टीम की आभारी हूं. जब मैंने अपनी चलने की क्षमता खो दी, तो मुझे डर था कि मैं फिर से ठीक नहीं हो पाऊंगी. लेकिन उनकी विशेषज्ञता और एडवांस सर्जरी के लिए धन्यवाद, मैं अपने पैरों पर वापस आ गई हूं और फिर से अपना जीवन जी रही हूं. मुझे जो इलाज मिला वह चमत्कार से कम नहीं था.’

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